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Charkhi Dadri News: शहर में दो साल में नई स्ट्रीट लाइटें लगी न पुरानी बदली
Tue, 04 Jul 2023 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 04 Jul 2023 11:37 PM IST
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शहर में लगी पुरानी स्ट्रीट लाइट।
चरखी दादरी। शहर में स्ट्रीट लाइटों की कमी बनी हुई है जबकि दूसरी ओर नगर परिषद ने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है। उदासीनता का आलम ये है कि पिछले दो साल से न तो कोई नई स्ट्रीट लाइट लगी है और न ही पुरानी बदली गई है। कुछ स्ट्रीट लाइटों के तो पाेल ही जर्जर हो चुके हैं और तेज हवा चलने पर इनके गिरने का अंदेशा है। ऐसे में नगर परिषद को शहरवासियों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द स्ट्रीट लाइटें लगवानी चाहिए।
इस समय शहर को करीब दो हजार लाइटों की जरूरत है लेकिन मामला ठंडे बस्ते हैं। सरकार ने पहले तो खुद ही स्टेट लेवल पर किसी एजेंसी से लाइटें लगवाने का निर्णय लिया था जो सिरे नहीं चढ़ सका। बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि अब नगर परिषद व नगरपालिकाएं खुद ही अपने अधिकार क्षेत्र में लाइटें लगवा सकेंगी। ऐसे में अब नगर परिषद सरकार के आदेशों के इंतजार में हैं जबकि शहर की जनता परेशान है। शहर के 21 वार्डाें की आबादी करीब एक लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। अब मानसून सीजन चल रहा है जिसमें वैसे ही लाइटें ज्यादा खराब हो रही हैं। शहर में कुल छह हजार लाइटें लगी हुई हैं।
बता दें कि नगरपालिकाओं व नगर परिषदों में स्ट्रीट लाइटें लगवाने के लिए राज्य सरकार ने स्टेट लेवल पर एजेंसी से अनुबंध किया था लेकिन काम सिरे नहीं चढ़ सका। शहर में काफी संख्या में पुरानी तकनीकी की स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं जो अक्सर खराब पड़ी रहती हैं। मौसम खराब होने पर इनमें खराबी आ जाती है जिससे गलियों में अंधेरा छाया जाता है। पुरानी लाइटों से बिजली भी ज्यादा मात्रा में खपत होती है, जिससे नगर परिषद पर बिजली बिल का खर्च भी बढ़ता है। इस समय पूरे शहर में करीब छह हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, जिनमें से 50 फीसदी कई वर्ष पुरानी हैं। पुरानी लाइटें सोडियम पर आधारित हैं और इनकी क्षमता 72 वाॅट तक ही है। ये बिजली तो ज्यादा खपत करती हैं, लेकिन रोशनी कम देती हैं। बारिश में किसी लाइट के स्विच खराब हो जाते हैं तो कहीं से तार टूट जाता है। इनको ठीक करने में भी अधिक समय लग जाता है।
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- वार्डों व बाजारों में है जरूरत
नगर परिषद की ओर से शहर के सभी 21 वार्डों में गलियों व सड़क मार्गों पर दो हजार लाइटें रिप्लेस करने की जरूरत है। यहां अब सोडियम लाइटें लगी हुई हैं इनको बदलकर 30 व 45 वाट की एलईडी लगाई जानी हैं। इससे बिजली की बचत के अलावा बिल राशि भी कम हो सकेगी। नगर परिषद ने डेढ़ साल से दो हजार एलईडी लाइटों की डिमांड भेज कर रखी है।
- नई कॉलोनियों की गलियां भी सुविधा से वंचित
शहर की नई कॉलोनियों में इस समय लाइटों की सख्त जरूरत है। शहर के कई क्षेत्र ऐसे हैं जो 30 से 35 साल से आबाद हैं लेकिन उनमें लाइटें व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नगर परिषद को शहर के लाल डोरा की सीमा बढ़ाकर इस अवैध एरिया को भी परिषद में शामिल करने की जरूरत है ताकि इन कॉलोनियों में भी लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।
शहर में नई लाइटें लगनी हैं। पुरानी भी रिप्लेस करवाई जानी है। जैसे ही हेड ऑफिस से गाइडलाइन आती है। नगर परिषद इस काम को तत्परता से पूरा करेगा।
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इस समय शहर को करीब दो हजार लाइटों की जरूरत है लेकिन मामला ठंडे बस्ते हैं। सरकार ने पहले तो खुद ही स्टेट लेवल पर किसी एजेंसी से लाइटें लगवाने का निर्णय लिया था जो सिरे नहीं चढ़ सका। बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि अब नगर परिषद व नगरपालिकाएं खुद ही अपने अधिकार क्षेत्र में लाइटें लगवा सकेंगी। ऐसे में अब नगर परिषद सरकार के आदेशों के इंतजार में हैं जबकि शहर की जनता परेशान है। शहर के 21 वार्डाें की आबादी करीब एक लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। अब मानसून सीजन चल रहा है जिसमें वैसे ही लाइटें ज्यादा खराब हो रही हैं। शहर में कुल छह हजार लाइटें लगी हुई हैं।
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बता दें कि नगरपालिकाओं व नगर परिषदों में स्ट्रीट लाइटें लगवाने के लिए राज्य सरकार ने स्टेट लेवल पर एजेंसी से अनुबंध किया था लेकिन काम सिरे नहीं चढ़ सका। शहर में काफी संख्या में पुरानी तकनीकी की स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं जो अक्सर खराब पड़ी रहती हैं। मौसम खराब होने पर इनमें खराबी आ जाती है जिससे गलियों में अंधेरा छाया जाता है। पुरानी लाइटों से बिजली भी ज्यादा मात्रा में खपत होती है, जिससे नगर परिषद पर बिजली बिल का खर्च भी बढ़ता है। इस समय पूरे शहर में करीब छह हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, जिनमें से 50 फीसदी कई वर्ष पुरानी हैं। पुरानी लाइटें सोडियम पर आधारित हैं और इनकी क्षमता 72 वाॅट तक ही है। ये बिजली तो ज्यादा खपत करती हैं, लेकिन रोशनी कम देती हैं। बारिश में किसी लाइट के स्विच खराब हो जाते हैं तो कहीं से तार टूट जाता है। इनको ठीक करने में भी अधिक समय लग जाता है।
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- वार्डों व बाजारों में है जरूरत
नगर परिषद की ओर से शहर के सभी 21 वार्डों में गलियों व सड़क मार्गों पर दो हजार लाइटें रिप्लेस करने की जरूरत है। यहां अब सोडियम लाइटें लगी हुई हैं इनको बदलकर 30 व 45 वाट की एलईडी लगाई जानी हैं। इससे बिजली की बचत के अलावा बिल राशि भी कम हो सकेगी। नगर परिषद ने डेढ़ साल से दो हजार एलईडी लाइटों की डिमांड भेज कर रखी है।
- नई कॉलोनियों की गलियां भी सुविधा से वंचित
शहर की नई कॉलोनियों में इस समय लाइटों की सख्त जरूरत है। शहर के कई क्षेत्र ऐसे हैं जो 30 से 35 साल से आबाद हैं लेकिन उनमें लाइटें व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नगर परिषद को शहर के लाल डोरा की सीमा बढ़ाकर इस अवैध एरिया को भी परिषद में शामिल करने की जरूरत है ताकि इन कॉलोनियों में भी लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।
शहर में नई लाइटें लगनी हैं। पुरानी भी रिप्लेस करवाई जानी है। जैसे ही हेड ऑफिस से गाइडलाइन आती है। नगर परिषद इस काम को तत्परता से पूरा करेगा।