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Charkhi Dadri News: माताओं की लापरवाही बिगाड़ रही शिशुओं की सेहत, 162 अति कुपोषित और 1265 कुपोषित मिले

Thu, 21 Sep 2023 10:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 21 Sep 2023 10:48 AM IST
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Negligence of mothers is spoiling the health of babies, 162 were found extremely malnourished and 1265 malnourished
आंगनबाड़ी केंद्र में शिशु के वजन की जांच कराती सीडीपीओ गीता सहारण व उपस्थित महिलाएं।
चरखी दादरी। माताओं की लापरवाही गर्भ में पल रहे शिशुओं की सेहत पर भारी पड़ रही है। पिछले आठ माह के दौरान 162 बच्चे अति कुपोषित व 1265 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इस वर्ष अति कुपोषित श्रेणी के दस बच्चों की मौत भी हो चुकी है जिनमें एक वर्ष तक के आठ और एक से तीन वर्ष के दो बच्चे शामिल हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जनवरी से अगस्त माह तक की तैयार की गई रिपोर्ट में कुपोषण की स्थिति के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। हालांकि सितंबर माह के महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है।
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इस समय जिले में एक माह से छह साल तक के कुल 40,255 बच्चे हैं। इनमें से 19,520 लड़के व 17,853 लड़कियां शामिल हैं। जिले के इन 40,255 बच्चों में से 36,954 बच्चे सामान्य पैदा हुए हैं। वहीं, आठ माह के दौरान पैदा हुए 337 बच्चों में 2.100 किलोग्राम से भी कम वजन पाया गया है जिसके कारण उन्हें अति कुपोषित की श्रेणी में रखा गया। जबकि 1265 बच्चों में 2.1 किलोग्राम से अधिक और 2.5 किलोग्राम से कम वजन पाया गया जो कुपोषित की श्रेणी में रखे गए।
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जिले में इस समय एक से छह माह आयु के 3032, एक से तीन साल के 17,331 और तीन से छह साल के 19,892 बच्चे हैं। वहीं, अगस्त माह तक गर्भवती महिलाओं की संख्या 3608 थीं इनमें से भी करीब 30 प्रतिशत में रक्त की कमी पाई गई है जो गर्भ में पल रहे शिशुओं के लिए सही नहीं हैं। साथ ही जिले में इस समय स्तनपान कराने वाली कुल 3028 माताएं हैं। संवाद
- ये हैं शिशुओं में कुपोषण के मुख्य कारण
एक स्वस्थ शिशु पैदा करने के लिए उसकी देखभाल एक महिला को गर्भावस्था के दौरान की करनी होती है। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग की जिले में 634 आंगनबाड़ी की 596 वर्करों और 535 हेल्परों की ओर से किए गए सर्वे में कुपोषण के मुख्य कारण माताओं की लापरवाही सामने आई है। सर्वे के अनुसार कुपोषित एवं अतिकुपोषित शिशुओं की माताओं में गर्भावस्था के दौरान फास्ट फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक की आदत, अनियमित दिनचर्या, हरी एवं पत्तेदार सब्जियों में कम रूचि होना, खानपान की अनियमितता, अव्यवस्थित दिनचर्या, समय पर टीकाकरण न कराना, कुछ महिलाओं में नशे की प्रवृत्ति व जागरूकता का अभाव सामने आया है। महिलाओं की यह लापरवाही गर्भ में पल रहे शिशुओं एवं नवजात बच्चों की सेहत बिगाड़ रही है।
- विभाग के प्रयासों से अति कुपोषण से 91 व कुपोषण से 928 बच्चे हुए बाहर
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पिछले आठ माह के दौरान सराहनीय कार्य किया गया है जिसके चलते कुल 162 अतिकुपोषित बच्चों में से 91 व कुपोषित में से 928 बच्चे बाहर आए हैं और अब वो सामान्य हैं। विभाग की ओर से इन बच्चों पर विशेष निगरानी रखी गई। माताओं व शिशुओं की नियमित रूप से देखभाल के लिए होम विजिट, नियमित रूप से मां व शिशु की स्वास्थ्य जांच, डाइट प्लान, पोषण कैप्सूल, लो कॉस्ट रेसिपी, नियमित रूप से शिशु के वजन एवं लंबाई की जांच सहित अन्य प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से सराहनीय प्रयास किए गए हैं। 71 बच्चे अभी भी अतिकुपोषित व 337 बच्चे कुपोषित की श्रेणी में हैं।


जिले में कुपोषण को कम करने के लिए विभाग की ओर से सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है जिसके तहत नियमित रूप से गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष 162 अति कुपोषित बच्चों में से 91 तथा 1265 कुपोषित बच्चों में से 928 ने विभाग के प्रयासों से ही रिकवरी की है। अब 71 अतिकुपोषित व 337 कुपोषित बच्चों पर विशेष निगरानी है। नियमित रूप से इनकी देखभाल की जा रही है।

-गीता सहारण, महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी
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