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लापरवाही : हर मानसून सीजन में करंट लील रहा 20 पशुओं की जिंदगी, जमीन पर रखे ट्रांसफार्मर, लोहे के पोल भी जस के तस
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चरखी दादरी। बिजली निगम अधिकारियों की नजरअंदाजी बेजुबान जानवरों पर भारी पड़ रही है। शहर में विभिन्न जगहों पर जमीन पर रखे ट्रांसफार्मरों और लगाए गए लोहे के पोल से करंट लगने पर हर मानसून सीजन में करीब 20 लावारिस पशु काल का शिकार बनते हैं। गोभक्तों के अनुसार, यह सिलसिला पिछले कई साल से जारी है, लेकिन बिजली निगम अधिकारी केवल आश्वासन देने तक सीमित हैं।
शहर में बधवाना गेट, लाजपतराय चौक व अन्य जगहों बिजली ट्रांसफार्मर जमीन पर रखे हुए हैं जबकि कुछ जगहों पर लोहे के पोल भी लगे हुए है। मानसून सीजन में जलभराव होने के चलते इनमें करंट आया रहता है और पशुओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
गो सेवक रिंपी फौगाट और उनकी टीम के सदस्यों ने बताया कि इस समस्या से बिजली निगम के कर्मचारियों को अवगत करवाया जा चुका है। हर बार सिर्फ आश्वासन देकर बात को टाल दिया जाता है, जबकि अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। गो सेवकों ने बताया कि अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही पर वो कई बार पुलिस को भी शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो मानसून के सत्र में फिर पशुओं को जान गंवानी पड़ेगी।
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बच्चे व बुजुर्गों के लिए भी आफत बन रहे लोहे के पोल -
लोहे के पोल और नीचे रखे हुए ट्रांसफार्मर न सिर्फ पशुओं के लिए मौत का कारण बन रहे हैं, बल्कि इससे बच्चों व बुजुर्गों के लिए भी आफत पैदा कर रहे हैं। बारिश के समय बच्चे और बुजुर्ग लोहे के पोल का सहारा लेकर रास्ता पार करने की कोशिश करते हैं, जिससे करंट तक लग जाता है।
- चार साल में 80 पशुओं की हो चुकी मौत
गो सेवक रिंपी फौगाट ने बताया कि हर बारिश के समय एक या दो पशु की करंट लगने के कारण मौत हो जाती है। पिछले करीब चार साल में इस तरह के हादसों से करीब 80 पशुओं की मौत हो चुकी है। कई बार गो सेवकों ने अपने खर्च पर पोस्टमार्टम करवाया तो मौत का कारण करंट लगना सामने आया।
वर्जन::
लोहे के कुछ जगहों पर हमने पोल बदल दिए हैं और बाकी बचे पोल को भी जल्द बदल दिया जाएगा। बिजली ट्रांसफार्मर को हम जल्द ही एच-पोल पर शिफ्ट करवा देंगे।
- प्रदीप सोनी, एसडीओ, बिजली निगम।
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शहर में बधवाना गेट, लाजपतराय चौक व अन्य जगहों बिजली ट्रांसफार्मर जमीन पर रखे हुए हैं जबकि कुछ जगहों पर लोहे के पोल भी लगे हुए है। मानसून सीजन में जलभराव होने के चलते इनमें करंट आया रहता है और पशुओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
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गो सेवक रिंपी फौगाट और उनकी टीम के सदस्यों ने बताया कि इस समस्या से बिजली निगम के कर्मचारियों को अवगत करवाया जा चुका है। हर बार सिर्फ आश्वासन देकर बात को टाल दिया जाता है, जबकि अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। गो सेवकों ने बताया कि अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही पर वो कई बार पुलिस को भी शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो मानसून के सत्र में फिर पशुओं को जान गंवानी पड़ेगी।
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बच्चे व बुजुर्गों के लिए भी आफत बन रहे लोहे के पोल -
लोहे के पोल और नीचे रखे हुए ट्रांसफार्मर न सिर्फ पशुओं के लिए मौत का कारण बन रहे हैं, बल्कि इससे बच्चों व बुजुर्गों के लिए भी आफत पैदा कर रहे हैं। बारिश के समय बच्चे और बुजुर्ग लोहे के पोल का सहारा लेकर रास्ता पार करने की कोशिश करते हैं, जिससे करंट तक लग जाता है।
- चार साल में 80 पशुओं की हो चुकी मौत
गो सेवक रिंपी फौगाट ने बताया कि हर बारिश के समय एक या दो पशु की करंट लगने के कारण मौत हो जाती है। पिछले करीब चार साल में इस तरह के हादसों से करीब 80 पशुओं की मौत हो चुकी है। कई बार गो सेवकों ने अपने खर्च पर पोस्टमार्टम करवाया तो मौत का कारण करंट लगना सामने आया।
वर्जन::
लोहे के कुछ जगहों पर हमने पोल बदल दिए हैं और बाकी बचे पोल को भी जल्द बदल दिया जाएगा। बिजली ट्रांसफार्मर को हम जल्द ही एच-पोल पर शिफ्ट करवा देंगे।
- प्रदीप सोनी, एसडीओ, बिजली निगम।