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Charkhi Dadri News: ज्यादा तापमान में झुलसे सरसों के अंकुरित पौधे, 10 हजार एकड़ में किसानों को फिर करनी पड़ेगी बिजाई
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चरखी दादरी। जिले में असामान्य रूप से बढ़े तापमान के कारण सरसों की फसल का ताजा अंकुरित पौधा झुलस गया, जिससे किसानों को करीब 10 हजार एकड़ भूमि में दोबारा बिजाई करनी पड़ी है। इस स्थिति से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर उत्पादन में देरी, दूसरी लागत में बढ़ोतरी। अनुमान के अनुसार, किसानों को कुल मिलाकर करीब 1.50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस बार जिले में लगभग 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई का अनुमान है। अब किसान गेहूं की बिजाई की तैयारी में जुट गए हैं।
किसान नेता हरपाल सिंह भांडवा, टेकराम, राम सिंह व लीलाराम ने बताया कि तेज तापमान के कारण पौधे सूख गए, जिससे उन्हें दोबारा बिजाई करनी पड़ी। किसानों के अनुसार, 20 अक्तूबर के आसपास सरसों की बिजाई का समय उपयुक्त माना जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते अब मौसम का मिजाज बदल गया है और फसलों की बिजाई में देरी करनी पड़ रही है।
बारिश के बाद शुरू हुई थी बिजाई
जिले में 7 अक्तूबर को हुई 21 एमएम बारिश के बाद किसानों ने सरसों की बिजाई शुरू की थी। अधिकांश किसानों ने 20 अक्तूबर के आसपास बीज बोया था। उस समय तापमान सामान्य से अधिक था। तेज गर्मी के कारण अंकुरित पौधे अधिक तापमान को झेल नहीं पाए और झुलस गए। फलस्वरूप किसानों को सिंचाई कर दोबारा बीज बोने को मजबूर होना पड़ा। प्रति एकड़ किसान को औसतन 1500 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा, जिसमें बीज 1100 रुपये प्रति किलोग्राम व बिजाई का किराया शामिल है।
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रेतीला क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
रेतीले क्षेत्रों में इस बार सबसे अधिक नुकसान हुआ है। जिले के बाढड़ा, कादमा, झोझू कलां व दादरी खंड के कुछ गांव प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में दिन के समय रेत जल्दी गर्म हो जाती है, जिससे अंकुरित पौधा अधिक तापमान सहन नहीं कर सका और सूख गया।
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ज्यादा तापमान के कारण सरसों का ताजा अंकुरित पौधा सूख गया, जिससे किसानों को दोबारा बिजाई करनी पड़ी। इससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ा है। यह समस्या विशेष रूप से रेतीले क्षेत्रों में देखने को मिली है। - कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, दादरी।
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किसान नेता हरपाल सिंह भांडवा, टेकराम, राम सिंह व लीलाराम ने बताया कि तेज तापमान के कारण पौधे सूख गए, जिससे उन्हें दोबारा बिजाई करनी पड़ी। किसानों के अनुसार, 20 अक्तूबर के आसपास सरसों की बिजाई का समय उपयुक्त माना जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते अब मौसम का मिजाज बदल गया है और फसलों की बिजाई में देरी करनी पड़ रही है।
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बारिश के बाद शुरू हुई थी बिजाई
जिले में 7 अक्तूबर को हुई 21 एमएम बारिश के बाद किसानों ने सरसों की बिजाई शुरू की थी। अधिकांश किसानों ने 20 अक्तूबर के आसपास बीज बोया था। उस समय तापमान सामान्य से अधिक था। तेज गर्मी के कारण अंकुरित पौधे अधिक तापमान को झेल नहीं पाए और झुलस गए। फलस्वरूप किसानों को सिंचाई कर दोबारा बीज बोने को मजबूर होना पड़ा। प्रति एकड़ किसान को औसतन 1500 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा, जिसमें बीज 1100 रुपये प्रति किलोग्राम व बिजाई का किराया शामिल है।
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रेतीला क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
रेतीले क्षेत्रों में इस बार सबसे अधिक नुकसान हुआ है। जिले के बाढड़ा, कादमा, झोझू कलां व दादरी खंड के कुछ गांव प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में दिन के समय रेत जल्दी गर्म हो जाती है, जिससे अंकुरित पौधा अधिक तापमान सहन नहीं कर सका और सूख गया।
ज्यादा तापमान के कारण सरसों का ताजा अंकुरित पौधा सूख गया, जिससे किसानों को दोबारा बिजाई करनी पड़ी। इससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ा है। यह समस्या विशेष रूप से रेतीले क्षेत्रों में देखने को मिली है। - कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग, दादरी।