{"_id":"682a37d785baecea3607c51f","slug":"mother-sewed-clothes-study-for-daughter-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1003-137177-2025-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: निजी स्कूल में पढ़ाने के लिए मां ने की सिलाई, बेटी 93 फीसदी अंक लाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: निजी स्कूल में पढ़ाने के लिए मां ने की सिलाई, बेटी 93 फीसदी अंक लाई
Mon, 19 May 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 19 May 2025 01:11 AM IST
विज्ञापन
अपने माता-पिता के साथ छात्रा सालोनी। स्रोत: स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। बेटी को आगे बढ़ाने और सपने पूरे करने के लिए मां-बाप हर संभव प्रयास करते हैं। गांव चरखी निवासी छात्रा सलोनी की मां ने बेटी को निजी स्कूल में पढ़ाने के लिए सिलाई की। बेटी ने 10वीं में 93 फीसदी अंक लाकर मां की मेहनत सफल कर दी है।
सलोनी गांव चरखी की निवासी है। उसके पिता सुनील कुमार खेती करते हैं। मां सुशीला सिलाई का काम करती हैं। सलोनी को निजी स्कूल में पढ़ाकर अच्छे अंक दिलाने के लिए मां सुशीला ने तीन साल पहले सिलाई का काम शुरू किया। मां को घरेलू कामों में मदद करना सलोनी की रुचि है।
परीक्षा के दौरान मां ने कभी बेटी की सहायता नहीं ली और केवल पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। सलोनी ने बताया कि परीक्षा के दो माह पहले प्रतिदिन पांच घंटे तक पढ़ाई की। साथ ही स्कूल में शिक्षकों ने जो पढ़ाया, उसे घर आकर दोहराया। इतना करने से चीजें दिमाग में बैठने लगीं। इससे परीक्षा के दौरान भी काफी सवाल याद रहे।
विज्ञापन
- पुराने टेस्ट पेपरों से मिली अधिक मदद
सलोनी का कहना है कि पुराने टेस्ट पेपरों से उसे अधिक मदद मिली। शिक्षकों ने भी स्कूल में महत्वपूर्ण प्रश्नों और सैंपल पेपर का अभ्यास कराया। उनके अनुसार ही सलोनी ने तैयारी की। अब परीक्षा में 93 फीसदी अंक हासिल किए हैं। सलोनी ने अपनी सफलता का श्रेय मां सुशीला और और शिक्षकों को दिया है।
विज्ञापन
चरखी दादरी। बेटी को आगे बढ़ाने और सपने पूरे करने के लिए मां-बाप हर संभव प्रयास करते हैं। गांव चरखी निवासी छात्रा सलोनी की मां ने बेटी को निजी स्कूल में पढ़ाने के लिए सिलाई की। बेटी ने 10वीं में 93 फीसदी अंक लाकर मां की मेहनत सफल कर दी है।
सलोनी गांव चरखी की निवासी है। उसके पिता सुनील कुमार खेती करते हैं। मां सुशीला सिलाई का काम करती हैं। सलोनी को निजी स्कूल में पढ़ाकर अच्छे अंक दिलाने के लिए मां सुशीला ने तीन साल पहले सिलाई का काम शुरू किया। मां को घरेलू कामों में मदद करना सलोनी की रुचि है।
विज्ञापन
परीक्षा के दौरान मां ने कभी बेटी की सहायता नहीं ली और केवल पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। सलोनी ने बताया कि परीक्षा के दो माह पहले प्रतिदिन पांच घंटे तक पढ़ाई की। साथ ही स्कूल में शिक्षकों ने जो पढ़ाया, उसे घर आकर दोहराया। इतना करने से चीजें दिमाग में बैठने लगीं। इससे परीक्षा के दौरान भी काफी सवाल याद रहे।
विज्ञापन
- पुराने टेस्ट पेपरों से मिली अधिक मदद
सलोनी का कहना है कि पुराने टेस्ट पेपरों से उसे अधिक मदद मिली। शिक्षकों ने भी स्कूल में महत्वपूर्ण प्रश्नों और सैंपल पेपर का अभ्यास कराया। उनके अनुसार ही सलोनी ने तैयारी की। अब परीक्षा में 93 फीसदी अंक हासिल किए हैं। सलोनी ने अपनी सफलता का श्रेय मां सुशीला और और शिक्षकों को दिया है।