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आस्था: पानी में चलकर जलाभिषेक करने शिवालय तक पहुंचे श्रद्धालु
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फोटो 09 चंपापुरी शिव मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी।
बेपटरी व्यवस्थाओं पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी। मातृ-शिशु के सामने स्थित शिव मंदिर में जलभराव के बावजूद लोग पूजा करने पहुंचे। ये श्रद्धालु पानी में चलकर शिवालय तक पहुंचे और जलाभिषेक किया। इसके अलावा शहर के सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दो मंदिरों के बाहर मेले लगे और इन दोनों बड़े मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नजर आए। जिले के 100 मंदिरों में पहुंचकर करीब तीस हजार श्रद्धालुओं ने पूजा की और भगवान शिव से मन्नतें मांगी।
शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में पूजा करने पहुंचे श्रद्धालुओं को मंदिर के समीप जलभराव और कीचड़ के चलते परेशानियों से दो-चार होना पड़ा। परशुराम चौक समीप स्थित प्राचीन शिव मंदिर वाली सड़क पर जलभराव और कीचड़ के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, लगातार दूसरे साल भी इसके समीप स्थित शिव मंदिर में जलभराव रहा, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालु शिवलिंग तक पहुंचे।
जिले में शिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से पूजा की। गांवों में तो स्थिति ठीक रही, लेकिन शहर में बेपटरी सीवर व्यवस्था और जलभराव के चलते मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शहर के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में दो फुट तक पानी भरा रहा। शहर की अगर बात करें तो बाला वाला मंदिर, चंपापुरी स्थित शिव मंदिर, गामड़ी क्षेत्र स्थित शिव मंदिर, वार्ड-19 स्थित शिव मंदिर में जलाभिषेक किया गया।
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इन मंदिरों में भी हुआ जलाभिषेक
बौंदकलां क्षेत्र के दस और झोझूकलां क्षेत्र के 15 मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र के 20 मंदिरों में आठ हजार श्रद्धालु शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने पहुंचे। दोपहर तक जिले के मंदिर बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते रहे। जिले में श्रद्धालुओं ने डाक विभाग के जरिये शिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगाजल मंगवाया।
- मंदिरों के बाहर लगे मेले, खरीदारी को लेकर कम रहा रुझान
प्राचीन शिव मंदिर के सामने मेला भी लगा, जिसमें खिलौनों के अलावा अन्य सामान की स्टाल लगीं। हालांकि खरीदारी को लेकर उत्साह काफी कम रहा। स्टाल धारक दलीप और संजना ने बताया कि सामान्य दिनों के मुकाबले इस साल कमाई दस प्रतिशत ही है। पहले मेले में एक दिन में पांच से छह हजार की कमाई हो जाती थी, लेकिन इस बार पांच सौ से छह सौ रुपये के सामान की ही बिक्री हुई है।
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बेपटरी व्यवस्थाओं पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी। मातृ-शिशु के सामने स्थित शिव मंदिर में जलभराव के बावजूद लोग पूजा करने पहुंचे। ये श्रद्धालु पानी में चलकर शिवालय तक पहुंचे और जलाभिषेक किया। इसके अलावा शहर के सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। दो मंदिरों के बाहर मेले लगे और इन दोनों बड़े मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नजर आए। जिले के 100 मंदिरों में पहुंचकर करीब तीस हजार श्रद्धालुओं ने पूजा की और भगवान शिव से मन्नतें मांगी।
शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में पूजा करने पहुंचे श्रद्धालुओं को मंदिर के समीप जलभराव और कीचड़ के चलते परेशानियों से दो-चार होना पड़ा। परशुराम चौक समीप स्थित प्राचीन शिव मंदिर वाली सड़क पर जलभराव और कीचड़ के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, लगातार दूसरे साल भी इसके समीप स्थित शिव मंदिर में जलभराव रहा, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालु शिवलिंग तक पहुंचे।
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जिले में शिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से पूजा की। गांवों में तो स्थिति ठीक रही, लेकिन शहर में बेपटरी सीवर व्यवस्था और जलभराव के चलते मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शहर के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में दो फुट तक पानी भरा रहा। शहर की अगर बात करें तो बाला वाला मंदिर, चंपापुरी स्थित शिव मंदिर, गामड़ी क्षेत्र स्थित शिव मंदिर, वार्ड-19 स्थित शिव मंदिर में जलाभिषेक किया गया।
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इन मंदिरों में भी हुआ जलाभिषेक
बौंदकलां क्षेत्र के दस और झोझूकलां क्षेत्र के 15 मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र के 20 मंदिरों में आठ हजार श्रद्धालु शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने पहुंचे। दोपहर तक जिले के मंदिर बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते रहे। जिले में श्रद्धालुओं ने डाक विभाग के जरिये शिवरात्रि पर हरिद्वार से गंगाजल मंगवाया।
- मंदिरों के बाहर लगे मेले, खरीदारी को लेकर कम रहा रुझान
प्राचीन शिव मंदिर के सामने मेला भी लगा, जिसमें खिलौनों के अलावा अन्य सामान की स्टाल लगीं। हालांकि खरीदारी को लेकर उत्साह काफी कम रहा। स्टाल धारक दलीप और संजना ने बताया कि सामान्य दिनों के मुकाबले इस साल कमाई दस प्रतिशत ही है। पहले मेले में एक दिन में पांच से छह हजार की कमाई हो जाती थी, लेकिन इस बार पांच सौ से छह सौ रुपये के सामान की ही बिक्री हुई है।