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मोदी सरकार ने बदल दिए लोकतंत्र के मायने: कुमारी शैलजा
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कांग्रेस का हर कार्यकर्ता मजबूती से किसानों के इस संघर्ष में हर मोर्चे पर डटकर साथ देगा। यह बात कितलाना टोल पर चल रहे किसानों के अनिश्चितकालीन धरने को समर्थन देने पहुंचीं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा कुमारी सैलजा ने कही। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों से न केवल मंडी व्यवस्था ध्वस्त होगी, बल्कि एमएसपी भी नहीं बचेगी। सैैलजा ने कहा कि मोदी सरकार ने लोकतंत्र के मायने ही बदलकर रख दिए हैं।
कुमारी सैलजा ने कहा कि नए कृषि कानूनों से असीमित भंडारण होगा, जिससे मंहगाई का सामना करना मुश्किल हो जाएगा। यही वजह है कि ये सब खतरे भांप किसान, मजदूर, व्यापारी और कर्मचारियों की एकजुटता से ये आंदोलन जनांदोलन बन गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का गठन जनता द्वारा लोक कल्याण के लिए होता है, लेकिन मोदी सरकार ने इसके मायने बदल दिये हैं। आज दो महीने से ठंड में शांतिपूर्ण ढंग से लाखों लोग दिल्ली बॉर्डर पर और एक महीने से विभिन्न टोलों पर अपनी वाजिब मांगों को लेकर बैठे हैं। इस दौरान 150 से ज्यादा किसान जान गंवा चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के नशे में चूर हैं। इसलिए इतने बड़े घटनाक्रम पर उनके मुख से एक शब्द तक नहीं निकला। कुमारी सैैलजा ने कहा कि मोदी सरकार महज अपने चहेते पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है, आम जन मानस से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।
वहीं, कितलाना टोल पर चल रहे अनिश्चित कालीन धरने के 30वें दिन नरसिंह डीपीई, बलवंत नंबरदार, गंगाराम श्योराण, रणधीर घिकाड़ा, सूरजभान सांगवान, रणबीर फौजी, राज सिंह धनाना, रणधीर कुंगड़, राजू मान, राकेश आर्य, मास्टर राज सिंह ने् संयुक्त अध्यक्षता की। किसान नेताओं ने कहा कि किसान परेड के लिए भिवानी और दादरी जिले से हजारों ट्रैक्टर 25 जनवरी को रवाना होंगे, जो सरकार को हिलाकर रख देंगे। इस मौके पर वयोवृद्ध किसान नेता कमल सिंह मांढी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रख शोक व्यक्त किया गया। धरने का मंच संचालन धर्मेंद्र छपार ने किया।
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ये रहे मौजूद
धरनास्थल पर अजय चौधरी, शमशेर फौगाट, दिलबाग ग्रेवाल, बलबीर बजाड़, भूपेंद्र चौधरी, करतार ग्रेवाल, सीटू नेता अनिल, रामफल देशवाल, कमलेश भैरवी, कमल प्रधान, सुभाष यादव, अनिल शेषमा, राजकुमार घिकाड़ा, सुशील, अधिवक्ता ब्रह्मानंद, विधायक इंदुराज नरवाल, पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सांगवान, रणबीर महेंद्रा, बजरंग दास गर्ग, पवन बुवानीवाला, प्रोफेसर राजेंद्र डोहकी आदि मौजूद रहे।
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कुमारी सैलजा ने कहा कि नए कृषि कानूनों से असीमित भंडारण होगा, जिससे मंहगाई का सामना करना मुश्किल हो जाएगा। यही वजह है कि ये सब खतरे भांप किसान, मजदूर, व्यापारी और कर्मचारियों की एकजुटता से ये आंदोलन जनांदोलन बन गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का गठन जनता द्वारा लोक कल्याण के लिए होता है, लेकिन मोदी सरकार ने इसके मायने बदल दिये हैं। आज दो महीने से ठंड में शांतिपूर्ण ढंग से लाखों लोग दिल्ली बॉर्डर पर और एक महीने से विभिन्न टोलों पर अपनी वाजिब मांगों को लेकर बैठे हैं। इस दौरान 150 से ज्यादा किसान जान गंवा चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के नशे में चूर हैं। इसलिए इतने बड़े घटनाक्रम पर उनके मुख से एक शब्द तक नहीं निकला। कुमारी सैैलजा ने कहा कि मोदी सरकार महज अपने चहेते पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है, आम जन मानस से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।
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वहीं, कितलाना टोल पर चल रहे अनिश्चित कालीन धरने के 30वें दिन नरसिंह डीपीई, बलवंत नंबरदार, गंगाराम श्योराण, रणधीर घिकाड़ा, सूरजभान सांगवान, रणबीर फौजी, राज सिंह धनाना, रणधीर कुंगड़, राजू मान, राकेश आर्य, मास्टर राज सिंह ने् संयुक्त अध्यक्षता की। किसान नेताओं ने कहा कि किसान परेड के लिए भिवानी और दादरी जिले से हजारों ट्रैक्टर 25 जनवरी को रवाना होंगे, जो सरकार को हिलाकर रख देंगे। इस मौके पर वयोवृद्ध किसान नेता कमल सिंह मांढी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रख शोक व्यक्त किया गया। धरने का मंच संचालन धर्मेंद्र छपार ने किया।
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ये रहे मौजूद
धरनास्थल पर अजय चौधरी, शमशेर फौगाट, दिलबाग ग्रेवाल, बलबीर बजाड़, भूपेंद्र चौधरी, करतार ग्रेवाल, सीटू नेता अनिल, रामफल देशवाल, कमलेश भैरवी, कमल प्रधान, सुभाष यादव, अनिल शेषमा, राजकुमार घिकाड़ा, सुशील, अधिवक्ता ब्रह्मानंद, विधायक इंदुराज नरवाल, पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सांगवान, रणबीर महेंद्रा, बजरंग दास गर्ग, पवन बुवानीवाला, प्रोफेसर राजेंद्र डोहकी आदि मौजूद रहे।