{"_id":"6ab567e30cd1ce03f40f4440","slug":"lived-together-parted-together-couple-dies-within-a-span-of-40-hours-charkhi-dadri-news-c-126-1-shsr1012-160790-2026-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: साथ जीए, साथ बिछड़े... 40 घंटे के अंतराल में दंपती की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: साथ जीए, साथ बिछड़े... 40 घंटे के अंतराल में दंपती की मौत
Thu, 24 Sep 2026 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 24 Sep 2026 11:41 PM IST
विज्ञापन
मायाराम व सुकमा देवी।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। गांव खेड़ी बत्तर निवासी मायाराम और सुकमा देवी का करीब 65 साल से अधिक का दांपत्य जीवन अब एक ऐसी मार्मिक कहानी बन गया है जिसकी चर्चा आसपास के गांवों में भी हो रही है। दोनों ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया और अंतिम समय में भी यह साथ नहीं छूटा। सुकमा देवी अक्सर परिजनों और ग्रामीणों से कहती थीं कि वह सुहागन रहते ही दुनिया से विदा होंगी। उनकी यह बात उस समय सच साबित हो गई, जब उनके निधन के महज 40 घंटे बाद पति मायाराम ने भी अंतिम सांस ली।
85 वर्षीय सुकमा देवी का मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे निधन हुआ। पत्नी के निधन के गम के बीच करीब 90 वर्षीय मायाराम ने वीरवार सुबह 5:40 बजे प्राण त्याग दिए। एक साथ जीवन बिताने वाले दंपती का इस तरह कुछ घंटों के अंतराल में दुनिया से विदा होना परिवार और ग्रामीणों के लिए भावुक कर देने वाला है।
मायाराम के बड़े बेटे देशराज मुंशी और बिजली निगम में कार्यरत राजेश ने बताया कि उनके माता-पिता के बीच बेहद गहरा प्रेम था। दोनों हमेशा एक-दूसरे के साथ रहते थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, यदि दोनों में से कोई एक बीमार पड़ता तो दूसरे की तबीयत भी बिगड़ जाती थी। उनके बेटे बंसीलाल और विजय कुमार ने बताया कि माता-पिता भले ही अनपढ़ थे लेकिन व्यवहार, संस्कार और जीवन के अनुभवों में वे किसी शिक्षित व्यक्ति से कम नहीं थे। उन्होंने पूरे परिवार को हमेशा एकजुट रखा। भाइयों में कभी मनमुटाव होता तो दोनों उन्हें बैठाकर समझाते और आपसी प्रेम से रहने की सीख देते थे।
विज्ञापन
सुकमा देवी की बहन के बेटे और दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि मौसी के निधन से करीब दो दिन पहले ही उनसे फोन पर बात हुई थी। उस दौरान सुकमा देवी ने कहा था, बेटा, मैं पहले मरूंगी और तेरे ताऊ को भी जल्दी बुला लूंगी। पर जितने दिन वह रहें उनका ध्यान रखना। परिवार के लिए उनकी यह बात अब भावुक कर देने वाली याद बन गई है।
हमने तो दोनों को हमेशा साथ ही देखा
गांव के सरपंच कुलदीप ने कहा कि मायाराम और सुकमा देवी का प्रेम गांव में मिसाल था। घूमने-फिरने से लेकर खेत में जाने तक दोनों हमेशा साथ रहते थे। वे अपने परिवार के साथ-साथ दूसरों को भी प्रेम और भाईचारे से रहने की सीख देते थे। दोनों का एक साथ दुनिया से जाना परिवार ही नहीं पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है।
पीछे वे बेटों, पौत्रों और प्रपौत्रों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार में कुल 28 सदस्य हैं। उनके जाने के बाद घर में मौजूद हर सदस्य के पास उनकी साथ निभाने वाली जिंदगी की यादें रह गई हैं।
विज्ञापन
85 वर्षीय सुकमा देवी का मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे निधन हुआ। पत्नी के निधन के गम के बीच करीब 90 वर्षीय मायाराम ने वीरवार सुबह 5:40 बजे प्राण त्याग दिए। एक साथ जीवन बिताने वाले दंपती का इस तरह कुछ घंटों के अंतराल में दुनिया से विदा होना परिवार और ग्रामीणों के लिए भावुक कर देने वाला है।
विज्ञापन
मायाराम के बड़े बेटे देशराज मुंशी और बिजली निगम में कार्यरत राजेश ने बताया कि उनके माता-पिता के बीच बेहद गहरा प्रेम था। दोनों हमेशा एक-दूसरे के साथ रहते थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, यदि दोनों में से कोई एक बीमार पड़ता तो दूसरे की तबीयत भी बिगड़ जाती थी। उनके बेटे बंसीलाल और विजय कुमार ने बताया कि माता-पिता भले ही अनपढ़ थे लेकिन व्यवहार, संस्कार और जीवन के अनुभवों में वे किसी शिक्षित व्यक्ति से कम नहीं थे। उन्होंने पूरे परिवार को हमेशा एकजुट रखा। भाइयों में कभी मनमुटाव होता तो दोनों उन्हें बैठाकर समझाते और आपसी प्रेम से रहने की सीख देते थे।
विज्ञापन
सुकमा देवी की बहन के बेटे और दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि मौसी के निधन से करीब दो दिन पहले ही उनसे फोन पर बात हुई थी। उस दौरान सुकमा देवी ने कहा था, बेटा, मैं पहले मरूंगी और तेरे ताऊ को भी जल्दी बुला लूंगी। पर जितने दिन वह रहें उनका ध्यान रखना। परिवार के लिए उनकी यह बात अब भावुक कर देने वाली याद बन गई है।
हमने तो दोनों को हमेशा साथ ही देखा
गांव के सरपंच कुलदीप ने कहा कि मायाराम और सुकमा देवी का प्रेम गांव में मिसाल था। घूमने-फिरने से लेकर खेत में जाने तक दोनों हमेशा साथ रहते थे। वे अपने परिवार के साथ-साथ दूसरों को भी प्रेम और भाईचारे से रहने की सीख देते थे। दोनों का एक साथ दुनिया से जाना परिवार ही नहीं पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है।
पीछे वे बेटों, पौत्रों और प्रपौत्रों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार में कुल 28 सदस्य हैं। उनके जाने के बाद घर में मौजूद हर सदस्य के पास उनकी साथ निभाने वाली जिंदगी की यादें रह गई हैं।