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Charkhi Dadri News: 7 विशेषज्ञों की कमी नहीं हुई दूर, मरीज दूसरे जिलों में जाने के लिए मजबूर
Thu, 15 May 2025 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 15 May 2025 01:35 AM IST
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स्वास्थ्य
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फोटो 04
दादरी नागरिक अस्पताल, जहां विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं।
- दादरी नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञों के पद लंबे समय से पड़े हैं खाली, मरीजों और तीमारदारों को झेलनी पड़ रही परेशानी
- दादरी के जिला बनने के बाद विशेषज्ञों की तैनाती के लिए स्थानीय अधिकारी भेज चुके 30 से अधिक मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी को जिला बने साढ़े आठ साल पूरे होने को हैं। इस समय अवधि में भी सरकार नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं कर पाई है। इस समय विशेषज्ञों के 7 पद खाली होने से इसका सीधे तौर पर असर जिला नागरिक अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, जिलास्तरीय अस्पताल से उपमंडल स्तरीय अस्पताल की तर्ज पर मरीजों को रेफर कर काम चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को दूसरे जिले के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। हालांकि, जिला बनने के बाद यहां मेडिकल ऑफिसर की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन, विशेषज्ञों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। इस बारे में जब पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पड़ताल में सामने आया कि चरखी दादरी जब उपमंडल था तो यहां अल्ट्रासाउंड सुविधा थी, लेकिन, जिला बनने के कुछ समय बाद ही यह सेवा बंद हो गई। अब आलम यह है कि यह सुविधा पिछले छह साल से बंद पड़ी है। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर रेफर किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने एमओयू किया हुआ है। जिले में फिलहाल, विशेषज्ञों की भारी कमी है। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं।
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विशेषज्ञों की कमी के चलते नागरिक अस्पताल से एक दिन में औसतन 30 मरीज रेफर किए जाते हैं। इस लिहाज से एक माह में 25 वर्किंग दिवस मानें तो रेफर किए जाने वाले मरीजों की संख्या 750 बैठती है। कई बार तो 50 से अधिक मरीज भी रेफर किए जाते हैं।
- साढ़े 5 लाख की आबादी नागरिक अस्पताल पर निर्भर
नागरिक अस्पताल पर जिले की साढ़े 5 लाख की आबादी निर्भर है, लेकिन, विशेषज्ञों की कमी के चलते जिला अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। विशेषज्ञों के साथ यहां पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
- हर साल भेजी चार से पांच डिमांड, तैनाती फिर भी नहीं
स्थानीय अधिकारी मुख्यालय 30 से अधिक मांग भेज चुके हैं, लेकिन, अब तक विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पाई है। एक अधिकारी के अनुसार, हर साल विशेषज्ञों की तैनाती के लिए मुख्यालय औसतन चार से पांच मांग भेजी गई है, लेकिन, अब भी विशेषज्ञों की कमी बरकरार है।
- इन विशेषज्ञों की खल रही कमी
दादरी नागरिक अस्पताल में जनरल सर्जन, मनोरोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, एमडी मेडिसिन, ईएनटी सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इनके अलावा, यहां रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिस्ट, गायनी के पद भी खाली हैं।
वर्सन
विशेषज्ञों की तैनाती के लिए विभाग प्रयासरत है। इस संबंध में मुख्यालय डिमांड भेजी जा चुकी हैं। विशेषज्ञ न होने के चलते मजबूरीवश मरीजों को दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की तैनाती होते ही मरीजों के लिए उनकी सेवाएं शुरू करवा दी जाएंगी।
-डॉ. राहुल, प्रवक्ता, जिला स्वास्थ्य विभाग
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फोटो 04
दादरी नागरिक अस्पताल, जहां विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं।
- दादरी नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञों के पद लंबे समय से पड़े हैं खाली, मरीजों और तीमारदारों को झेलनी पड़ रही परेशानी
- दादरी के जिला बनने के बाद विशेषज्ञों की तैनाती के लिए स्थानीय अधिकारी भेज चुके 30 से अधिक मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी को जिला बने साढ़े आठ साल पूरे होने को हैं। इस समय अवधि में भी सरकार नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं कर पाई है। इस समय विशेषज्ञों के 7 पद खाली होने से इसका सीधे तौर पर असर जिला नागरिक अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, जिलास्तरीय अस्पताल से उपमंडल स्तरीय अस्पताल की तर्ज पर मरीजों को रेफर कर काम चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को दूसरे जिले के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। हालांकि, जिला बनने के बाद यहां मेडिकल ऑफिसर की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन, विशेषज्ञों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। इस बारे में जब पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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पड़ताल में सामने आया कि चरखी दादरी जब उपमंडल था तो यहां अल्ट्रासाउंड सुविधा थी, लेकिन, जिला बनने के कुछ समय बाद ही यह सेवा बंद हो गई। अब आलम यह है कि यह सुविधा पिछले छह साल से बंद पड़ी है। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर रेफर किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने एमओयू किया हुआ है। जिले में फिलहाल, विशेषज्ञों की भारी कमी है। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं।
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विशेषज्ञों की कमी के चलते नागरिक अस्पताल से एक दिन में औसतन 30 मरीज रेफर किए जाते हैं। इस लिहाज से एक माह में 25 वर्किंग दिवस मानें तो रेफर किए जाने वाले मरीजों की संख्या 750 बैठती है। कई बार तो 50 से अधिक मरीज भी रेफर किए जाते हैं।
- साढ़े 5 लाख की आबादी नागरिक अस्पताल पर निर्भर
नागरिक अस्पताल पर जिले की साढ़े 5 लाख की आबादी निर्भर है, लेकिन, विशेषज्ञों की कमी के चलते जिला अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। विशेषज्ञों के साथ यहां पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
- हर साल भेजी चार से पांच डिमांड, तैनाती फिर भी नहीं
स्थानीय अधिकारी मुख्यालय 30 से अधिक मांग भेज चुके हैं, लेकिन, अब तक विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पाई है। एक अधिकारी के अनुसार, हर साल विशेषज्ञों की तैनाती के लिए मुख्यालय औसतन चार से पांच मांग भेजी गई है, लेकिन, अब भी विशेषज्ञों की कमी बरकरार है।
- इन विशेषज्ञों की खल रही कमी
दादरी नागरिक अस्पताल में जनरल सर्जन, मनोरोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, एमडी मेडिसिन, ईएनटी सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इनके अलावा, यहां रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजिस्ट, गायनी के पद भी खाली हैं।
वर्सन
विशेषज्ञों की तैनाती के लिए विभाग प्रयासरत है। इस संबंध में मुख्यालय डिमांड भेजी जा चुकी हैं। विशेषज्ञ न होने के चलते मजबूरीवश मरीजों को दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की तैनाती होते ही मरीजों के लिए उनकी सेवाएं शुरू करवा दी जाएंगी।
-डॉ. राहुल, प्रवक्ता, जिला स्वास्थ्य विभाग