फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   Krishna's penance...could not become literate herself but wrote the destiny of her children, six out of seven children became senior officers

Charkhi Dadri News: कृष्णा की तपस्या...खुद साक्षर न बन सकीं पर लिख डाली बच्चों की तकदीर, सात में से छह बच्चे बने उच्चाधिकारी

Sun, 10 May 2026 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 10 May 2026 12:14 AM IST
विज्ञापन
Krishna's penance...could not become literate herself but wrote the destiny of her children, six out of seven children became senior officers
दादरी में पति व बेटे-बेटियों के साथ कृष्णा देवी (गुलाबी सूट में कुर्सी पर)। स्वयं
मोहित बेरलिया
विज्ञापन

चरखी दादरी। कहते हैं कि बच्चों की कामयाबी के पीछे मां का त्याग और संस्कार सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। जिले के गांव घिकाड़ा की कृष्णा देवी ने इस कहावत को हकीकत में बदला है। स्वयं कभी स्कूल की दहलीज न लांघ पाने वाली कृष्णा देवी ने ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच अपने बच्चों को उच्च पदों तक पहुंचाकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। आज उनके सभी बच्चे देश और समाज सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
खेतों में पसीना बहाया पर बच्चों के भविष्य से संवारा
कृष्णा देवी के पति रणधीर सिंह किसान हैं। बच्चों की परवरिश के लिए कृष्णा देवी ने न केवल घर संभाला बल्कि खेतों में भी पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत की। एक सामान्य ग्रामीण परिवार की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका एकमात्र संकल्प बच्चों को शिक्षित करना था। उनके इसी संघर्ष का परिणाम है कि आज उनके बेटे-बेटियां प्रदेश भर में जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
विज्ञापन

शिक्षिका, डीपीई व एसएचओ बनाईं बेटियां
परिवार की सबसे बड़ी बेटी उर्मिला गृहिणी हैं और परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रही हैं। उनसे छोटी शर्मिला छुछकवास के सरकारी स्कूल में संस्कृत शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे रही हैं। तीसरे नंबर पर प्रमिला हैं जो दादरी शहर के राजकीय स्कूल में डीपीई के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. किरण ने पुलिस विभाग में अपनी पहचान बनाई। वह हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में झज्जर महिला थाना प्रभारी के रूप में कार्य कर रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के लिए वह लगातार काम कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डीएसपी से बैंक अधिकारी बन हासिल की उपलब्धि
कृष्णा देवी ने अपनी पूरी उम्र संघर्ष किया। परिवार की पांचवीं बेटी गरिमा ने अपनी मेहनत से बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह डीएसपी रैंक की अधिकारी हैं और फिलहाल एंटी करप्शन ब्यूरो रोहतक में एसीपी के पद पर कार्यरत हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी में जिम्मेदारी संभालते हुए वह समाज में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दे रही हैं। गरिमा से छोटी संतोष आर्य भारतीय स्टेट बैंक पानीपत में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। वहीं सबसे छोटे बेटे शशि ग्रामीण बैंक में प्रबंधक के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

बेटा-बेटी में नहीं किया भेद
गांव घिकाड़ा की कृष्णा देवी आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई हैं। जिस मां ने खुद कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा उसी मां ने अपने बच्चों को पढ़ाई का महत्व समझाया और हर परिस्थिति में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण क्षेत्र में अक्सर बेटियों की पढ़ाई को लेकर संकोच देखने को मिलता है लेकिन कृष्णा देवी ने बेटा-बेटी में कभी फर्क नहीं किया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed