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मनु भाकर के संघर्ष की कहानी:कारगिल जंग के जवान ने सिखाया था पहली बार निशाना साधना, परिजन बनाना चाहते थे डॉक्टर

Tue, 06 Aug 2024 10:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा) Updated Tue, 06 Aug 2024 10:46 AM IST
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Manu Bhaker struggle story, soldier from Kargil war taught her to aim for first time
पदक विजेता मनु भाकर और कोच अनिल जाखड़। - फोटो : संवाद

पेरिस ओलंपिक-2024 में दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली मनु भाकर की शुरुआत कारगिल जंग में देश के लिए लड़ने वाले अनिल जाखड़ ने करवाई थी। 2004 में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद झाड़ली गांव के निवासी अनिल जाखड़ ने झज्जर के गांव गौरिया स्थित यूनिवर्सल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को शूटिंग करना सिखाना शुरू किया।

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मनु जब 9वीं कक्षा में थी, तब पहली बार अनिल के पास कोचिंग के लिए आई। उसके बाद शुरू हुआ उसका सफर ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने पर पहुंच गया। कोच अनिल के अनुसार, मनु की मां और पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। उसके लिए उन्होंने मनु को कोचिंग के लिए बाहर भेजने का फैसला भी लिया था।
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जब यह बात कोच अनिल को पता चली तो उन्होंने जोर देकर उनको रोकते हुए इसके लिए राजी कर लिया कि एक दिन मनु शूटिंग के क्षेत्र में उनका नाम रोशन करेगी। इसके बाद उन्होंने उसकी प्रतिभा को तराशने का काम किया। नेशनल प्रतिस्पर्धा पुणे में भाग लेने गई मनु का चयन जब भारतीय टीम के लिए हो गया तो उसके बाद उसके खेल ने सभी को प्रभावित किया।
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मनु का शारीरिक सौष्ठव देख पहचाना प्रतिभा को
कोच अनिल के अनुसार, जब पहली बार मनु उनके पास कोचिंग के लिए आई तो उसके हाव-भाव और खेलने का तरीका काफी अलग था। उसी से उन्होंने आइडिया लगा लिया कि मनु को अगर सही कोचिंग मिल जाए तो वह काफी आगे जा सकती है। इसके बाद उन्होंने उसे कोचिंग देना शुरू किया।


जब तुगलकाबाद में मंदिर में रुके मनु और उसके साथी
कोच अनिल के अनुसार, स्कूल की तरफ से एक बार वह मनु और टीम के अन्य साथियों को खेलने के लिए दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित डॉ. कर्णी शूटिंग रेंज लेकर गए थे। उस समय उन्हें एक शिव मंदिर में रुकना पड़ा था। तब वहां के पुजारी ने कहा कि आप यहां आराम से रहें। रुकने के नाम पर यहां साफ-सफाई और मंदिर का ख्याल रखना शर्त थी।

ये हैं मनु भाकर की उपलब्धियांं

  • वर्ष 2017 में केरल में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नौ स्वर्ण पदक जीतकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था।
  • वर्ष 2017 में ही एशियायी जूनियर चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता।
  • वर्ष 2018 में अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स शूटिंग वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीता।
  • वर्ष 2018 में ही आईएसएसएफ जूनियर विश्वकप में दो स्वर्ण पदक जीता।
  • राष्ट्रमंडल खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता था।
  • म्यूनिख आईएसएसएफ में चौथे स्थान पर रहने के साथ टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था।
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