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Charkhi Dadri News: ईशांत सिंह ने समुद्री लहरों को मात देकर लंदन से फ्रांस तक तैरकर देश का नाम किया रोशन
Fri, 20 Jun 2025 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 20 Jun 2025 11:51 PM IST
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चरखी दादरी। गांव मानकावास के 17 वर्षीय तैराक ईशांत सिंह ने समुद्र की लहरों और खतरों को पार करते हुए लंदन से फ्रांस तक करीब 47 किलोमीटर की दूरी तैरकर बुधवार रात एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस उपलब्धि ने एक बार फिर देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है।
ये यात्रा लंदन से मंगलवार को शुरू हुई थी। इस दौरान वहां का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस था। कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को पहला पदक दिलाने वाले अर्जुन अवाॅर्डी तैराकी टीम के ग्रुप लीडर, प्रशांत करमाकर ने इस शानदार सफलता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईशांत सिंह ने ठंडे और खारे पानी, तेज हवाओं व ज्वार की धाराओं को मात देते हुए समुद्री मार्ग से लंदन से फ्रांस तक की 47 किलोमीटर लंबी दूरी तैरकर पार की। यह हमारे लिए गर्व की बात है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
ईशांत के पिता जोगेंद्र सिंह ने कहा कि इससे पहले भी ईशांत ने अप्रैल माह में भारत और श्रीलंका के बीच स्थित प्रसिद्ध रामसेतु को तैरकर स्पर्श किया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका बेटा आने वाले समय में और भी प्रयास करेगा और देश का नाम और रोशन करेगा।
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ईशांत की सफलता को आसान नहीं कहा जा सकता। जोगेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों ही अभियान काफी कठिन थे, क्योंकि खारे पानी में समुद्र के जीव-जंतुओं की भी भरमार होती है। इस चुनौतीपूर्ण अभियान की निगरानी नौसेना और वायुसेना के जहाजों द्वारा की गई थी।
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ये यात्रा लंदन से मंगलवार को शुरू हुई थी। इस दौरान वहां का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस था। कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को पहला पदक दिलाने वाले अर्जुन अवाॅर्डी तैराकी टीम के ग्रुप लीडर, प्रशांत करमाकर ने इस शानदार सफलता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईशांत सिंह ने ठंडे और खारे पानी, तेज हवाओं व ज्वार की धाराओं को मात देते हुए समुद्री मार्ग से लंदन से फ्रांस तक की 47 किलोमीटर लंबी दूरी तैरकर पार की। यह हमारे लिए गर्व की बात है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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ईशांत के पिता जोगेंद्र सिंह ने कहा कि इससे पहले भी ईशांत ने अप्रैल माह में भारत और श्रीलंका के बीच स्थित प्रसिद्ध रामसेतु को तैरकर स्पर्श किया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका बेटा आने वाले समय में और भी प्रयास करेगा और देश का नाम और रोशन करेगा।
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ईशांत की सफलता को आसान नहीं कहा जा सकता। जोगेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों ही अभियान काफी कठिन थे, क्योंकि खारे पानी में समुद्र के जीव-जंतुओं की भी भरमार होती है। इस चुनौतीपूर्ण अभियान की निगरानी नौसेना और वायुसेना के जहाजों द्वारा की गई थी।