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Charkhi Dadri News: स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में किसान राज्यपाल को सौंपेंगे 30 हजार शपथ-पत्र
Sun, 10 May 2026 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 10 May 2026 12:15 AM IST
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बाढड़ा। भाकियू ने जून माह के प्रथम सप्ताह में राज्यपाल को बिजली चालित ट्यूबवेल पर स्मार्ट मीटर योजना और स्लैब प्रणाली के संभावित समाप्त होने के विरोध में 30 हजार शपथ-पत्र सौंपने का निर्णय लिया है। भाकियू जिला अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा ने बताया कि दादरी और भिवानी जिले के किसान इस अभियान में शामिल होंगे। शनिवार को भांडवा, हड़ौदी और बाढड़ा गांवों में किसानों से शपथ-पत्र भरवाने का अभियान शुरू किया गया।
भाकियू जिला अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा कि सरकार कृषि सिंचाई के लिए स्मार्ट मीटर लागू करने की तैयारी कर रही है, जिससे लंबे समय से चल रही स्लैब प्रणाली समाप्त होने का खतरा है। दक्षिणी हरियाणा के किसान नहरी पानी की कमी के कारण बिजली चालित ट्यूबवेल से अपनी फसलें सिंचाई करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में स्लैब प्रणाली को समाप्त करने का प्रयास किया गया था, लेकिन लंबी किसान आंदोलन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे बहाल किया था।
भाकियू ने बताया कि कृषि क्षेत्र में स्मार्ट मीटर योजना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी। विरोध स्वरूप दो कमेटियों का गठन किया गया है जो पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से गांव-गांव जाकर किसानों से शपथ-पत्र एकत्रित करेंगी।
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किसान नेता ने बताया कि वर्ष 2023 में रबी और खरीफ सीजन में प्राकृतिक आपदा के कारण कपास, ग्वार और बाजरे की फसलें बर्बाद हो गई थीं। बीमा कंपनी ने सैटेलाइट सर्वे के आधार पर नाममात्र का मुआवजा जारी किया जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
भाकियू ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो पहले राज्यपाल और फिर मुख्यमंत्री से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। साथ ही मांगें नहीं मानी गई तो जनप्रतिनिधियों का गांवों में प्रवेश रोका जाएगा। इस दौरान यूनियन महासचिव राधेश्याम शर्मा, रामौतार लाड, गिरधारी मोद, रणधीर हुई, सतबीर बाढड़ा, धर्मपाल सिंह, कमल सिंह हड़ौदी, पूर्व सरपंच वेदप्रकाश और जगत सिंह माैजूद रहे।
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भाकियू जिला अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा कि सरकार कृषि सिंचाई के लिए स्मार्ट मीटर लागू करने की तैयारी कर रही है, जिससे लंबे समय से चल रही स्लैब प्रणाली समाप्त होने का खतरा है। दक्षिणी हरियाणा के किसान नहरी पानी की कमी के कारण बिजली चालित ट्यूबवेल से अपनी फसलें सिंचाई करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में स्लैब प्रणाली को समाप्त करने का प्रयास किया गया था, लेकिन लंबी किसान आंदोलन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे बहाल किया था।
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भाकियू ने बताया कि कृषि क्षेत्र में स्मार्ट मीटर योजना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी। विरोध स्वरूप दो कमेटियों का गठन किया गया है जो पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से गांव-गांव जाकर किसानों से शपथ-पत्र एकत्रित करेंगी।
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किसान नेता ने बताया कि वर्ष 2023 में रबी और खरीफ सीजन में प्राकृतिक आपदा के कारण कपास, ग्वार और बाजरे की फसलें बर्बाद हो गई थीं। बीमा कंपनी ने सैटेलाइट सर्वे के आधार पर नाममात्र का मुआवजा जारी किया जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
भाकियू ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो पहले राज्यपाल और फिर मुख्यमंत्री से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। साथ ही मांगें नहीं मानी गई तो जनप्रतिनिधियों का गांवों में प्रवेश रोका जाएगा। इस दौरान यूनियन महासचिव राधेश्याम शर्मा, रामौतार लाड, गिरधारी मोद, रणधीर हुई, सतबीर बाढड़ा, धर्मपाल सिंह, कमल सिंह हड़ौदी, पूर्व सरपंच वेदप्रकाश और जगत सिंह माैजूद रहे।