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Charkhi Dadri News: चार साल पहले 11 करोड़ से बने मातृ-शिशु अस्पताल में पहली बार गूंजी किलकारी
Sat, 08 Feb 2025 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 08 Feb 2025 12:07 AM IST
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शहर का मातृ-शिशु अस्पताल में जच्चा बच्चा वार्ड का शुभारंभ करते स्थानीय स्टाफ ।
चरखी दादरी। शहर में चार साल पहले तैयार किए गए एमसीएच यानी मातृ-शिशु अस्पताल में पहली बार बच्चे की किलकारी गूंजी। यहां सीएमओ डॉ. राजविंद्र मलिक ने वीरवार शाम पहली सिजेरियन डिलीवरी कराई। चंपापुरी निवासी बबीता ने बेटे को जन्म दिया। वहीं, शुक्रवार से जिला स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में संचालित लेबर रूम और एसएनसीयू सुविधा मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट कर दी है। अब महिला संबंधी ओपीडी यहीं देखी जाएगी।
वर्ष 2021 में लोक निर्माण विभाग ने करीब साढ़े 8 करोड़ से मातृ-शिशु अस्पताल भवन तैयार किया था। वहीं, लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रीशियन शाखा ने भी यहां ढाई करोड़ का बजट खर्च किया था। 11 करोड़ खर्च करने के बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग नए भवन में बच्चों व महिलाओं के उपचार की सुविधा शुरू नहीं कर पाया था।
तीन दिन पहले एनएचएम मुख्यालय से टीम दादरी पहुंची थी। टीम में शामिल अधिकारियों ने महिलाओं व बच्चों की तमाम स्वास्थ्य सेवाएं नागरिक अस्पताल के बजाय मातृ-शिशु अस्पताल में शुरू करने के निर्देश दिए थे। निर्देशों का पालन करते हुए विभाग ने बुधवार से ही लेबर रूम और एसएनसीयू में रखे सामान की शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
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वहीं, बुधवार को नागरिक अस्पताल में तैनात 53 कर्मचारियों की तैनाती नागरिक अस्पताल में की गई। वीरवार शाम ही सीएमओ डॉ. राजविंद्र मलिक ने यहां पहली सिजेरियन डिलीवरी की। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
- निदेशक ने किया निरीक्षण, महिला मरीज से की बातचीत
एनएचएम निदेशक डॉ. विरेंद्र यादव ने वीरवार शाम नागरिक अस्पताल के बाद मातृ-शिशु अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां की गईं व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुधार संबंधी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सिजेरियन डिलीवरी के जरिये बेटे को जन्म देने वाली महिला बबीता से भी बातचीत कर सुविधाओं की जानकारी ली।
शुक्रवार को किया गया उद्घाटन
एमसीएच में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के उपचार की सुविधा शुरू होने के बाद शुक्रवार सुबह उद्घाटन की औपचारिकता पूरी की गई। उद्घाटन वर्चुअल हुआ। इसमें स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी और स्थानीय अधिकारी जुड़े।
दादरी के अलावा अंबाला में ही ऐसी व्यवस्था
प्रदेश के 22 जिलों में से दो जिले ऐसे हैं, जिनमें महिलाओं व बच्चों के लिए अलग से अस्पताल भवन बनाया गया है। दादरी के अलावा अंबाला ऐसा जिला है, जहां जन्म के बाद जच्चा-बच्चा की तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलती हैं।
नागरिक के बजाय एमसीएच आएं महिलाएं
जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की सुविधा पहले नागरिक अस्पताल में थी। अब इसे मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। अगर किसी गर्भवती महिला को डिलीवरी करानी है तो तीमारदार उसे अब मातृ-शिशु अस्पताल में ही लेकर आएं। कारण यह कि लेबर रूम अब यहां शिफ्ट किया जा चुका है।
लेबर रूम और एसएनसीयू मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट कर दिए गए हैं। वीरवार शाम सीएमओ डॉ. राजविंद्र मलिक ने यहां एक सिजेरियन डिलीवरी कराई है। अब भविष्य में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी व बच्चों के उपचार की सुविधा मातृ-शिशु अस्पताल में ही मिलेगी।
-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग
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वर्ष 2021 में लोक निर्माण विभाग ने करीब साढ़े 8 करोड़ से मातृ-शिशु अस्पताल भवन तैयार किया था। वहीं, लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रीशियन शाखा ने भी यहां ढाई करोड़ का बजट खर्च किया था। 11 करोड़ खर्च करने के बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग नए भवन में बच्चों व महिलाओं के उपचार की सुविधा शुरू नहीं कर पाया था।
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तीन दिन पहले एनएचएम मुख्यालय से टीम दादरी पहुंची थी। टीम में शामिल अधिकारियों ने महिलाओं व बच्चों की तमाम स्वास्थ्य सेवाएं नागरिक अस्पताल के बजाय मातृ-शिशु अस्पताल में शुरू करने के निर्देश दिए थे। निर्देशों का पालन करते हुए विभाग ने बुधवार से ही लेबर रूम और एसएनसीयू में रखे सामान की शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
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वहीं, बुधवार को नागरिक अस्पताल में तैनात 53 कर्मचारियों की तैनाती नागरिक अस्पताल में की गई। वीरवार शाम ही सीएमओ डॉ. राजविंद्र मलिक ने यहां पहली सिजेरियन डिलीवरी की। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
- निदेशक ने किया निरीक्षण, महिला मरीज से की बातचीत
एनएचएम निदेशक डॉ. विरेंद्र यादव ने वीरवार शाम नागरिक अस्पताल के बाद मातृ-शिशु अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां की गईं व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुधार संबंधी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सिजेरियन डिलीवरी के जरिये बेटे को जन्म देने वाली महिला बबीता से भी बातचीत कर सुविधाओं की जानकारी ली।
शुक्रवार को किया गया उद्घाटन
एमसीएच में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के उपचार की सुविधा शुरू होने के बाद शुक्रवार सुबह उद्घाटन की औपचारिकता पूरी की गई। उद्घाटन वर्चुअल हुआ। इसमें स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी और स्थानीय अधिकारी जुड़े।
दादरी के अलावा अंबाला में ही ऐसी व्यवस्था
प्रदेश के 22 जिलों में से दो जिले ऐसे हैं, जिनमें महिलाओं व बच्चों के लिए अलग से अस्पताल भवन बनाया गया है। दादरी के अलावा अंबाला ऐसा जिला है, जहां जन्म के बाद जच्चा-बच्चा की तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलती हैं।
नागरिक के बजाय एमसीएच आएं महिलाएं
जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की सुविधा पहले नागरिक अस्पताल में थी। अब इसे मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। अगर किसी गर्भवती महिला को डिलीवरी करानी है तो तीमारदार उसे अब मातृ-शिशु अस्पताल में ही लेकर आएं। कारण यह कि लेबर रूम अब यहां शिफ्ट किया जा चुका है।
लेबर रूम और एसएनसीयू मातृ-शिशु अस्पताल में शिफ्ट कर दिए गए हैं। वीरवार शाम सीएमओ डॉ. राजविंद्र मलिक ने यहां एक सिजेरियन डिलीवरी कराई है। अब भविष्य में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी व बच्चों के उपचार की सुविधा मातृ-शिशु अस्पताल में ही मिलेगी।
-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग