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30 मिनट तक लघु सचिवालय के बाहर वर्क र्स ने रोष जताया, ज्ञापन नहीं लेने आया कोई तो पुलिस को धकेल अंदर घुसीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 12:44 AM IST
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For 30 minutes, the workers expressed their anger outside the mini secretariat, if someone did not come to take the memorandum, they pushed the police inside.
फोटो 26 इंतजार के बाद ज्ञापन लेने अधिकारी के न पहुंचने पर डीसी कार्यालय में घुसने के लिए पुलिस को ध? - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। परियोजना कर्मियों की देशव्यापी हड़ताल के तहत शुक्रवार को सीटू के नेतृत्व में आशा वर्कर्स और मिड-डे मील वर्कर्स ने शहर में प्रदर्शन कर रोष जताया। वर्कर करीब दोपहर एक बजे लघु सचिवालय पहुंचीं और 30 मिनट तक वहां नारेबाजी कर रोष जताया। जब कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनका ज्ञापन लेने बाहर नहीं आया तो सभी वर्कर्स अंदर घुसने लगीं। पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया मगर पुलिस को धकेलते हुए सभी अंदर डीसी कार्यालय तक पहुंच गई। वहां उपायुक्त कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर रोष जताया। इसके बाद बीडीपीओ कंवर धवन सिंह वहां पहुंचे और वर्कर्स का ज्ञापन लिया। उहोंने अपना मांग पत्र प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भेजा।
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हड़ताली वर्कर्स को संबोधित करते हुए मिड-डे मील वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय व सीटू राज्य महासचिव जय भगवान, जिला प्रधान बबली, आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष कमलेश ने कहा कि भाजपा सरकार देश की एक करोड़ आशा, मिड-डे मील, आंगनबड़ी कर्मियो के साथ धोखाधड़ी कर रही है। परियोजना के नाम पर महिलाओं का शोषण किया जा रहा है। सरकार खोखली बयानबाजी कर रही है, लेकिन वास्तव में वर्कर्स को कोई राहत नहीं दे रही है।
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उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में भी आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील कर्मियों ने बुनियादी काम किया है। इसके बावजूद न तो सरकार इन्हें कर्मचारी का दर्जा दे रही और न ही 24000 न्यूनतम वेतन लागू कर रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र, शिक्षा व पोषण के कार्य को अधिक गंभीरता से किया जाना चाहिए, लेकिन यह सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, सहित तमाम सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र जो देश की आत्मनिर्भरता व जनकल्याणकारी योजनाओं की बुनियाद है उसे तबाह कर रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइप लाइन योजना सरकारी नौकरी के सपनों को ही खत्म करने वाली है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने मजदूरों के बारे चार लेबर कोड्स पारित कर मजदूरों को गुलाम बनाने का काम किया है। तीन कृषि कानून खेती व किसानों को बर्बाद करने वाले व खाद्य सुरक्षा को तबाह करने वाले है। इसलिए देश की स्कीम वर्कर्स इस आंदोलन के साथ हैं और 27 सितंबर के भारत बंद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।
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वर्कर्स को सीटू जिला सहसंयोजक सुमेर सिंह धारणी, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राजकुमार, हेमसा जिला प्रधान विजय लांबा, रोडवेज डिपो प्रधान कृष्ण, पूर्व कर्मचारी नेता कृष्ण फोगाट, आशा वर्कर्स यूनियन प्रधान प्रेमपति, सचिव अनिल देवी, कोषाध्यक्ष चंद्रमुखी, सुनीता, बाला, मिड-डे मील नेता सुनीता, निर्मला, बिमला आदि ने भी सभा को संबोधित किया। वर्कर्स ने 27 सितम्बर के भारत बंद में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने, मिड-डे मील वर्कर्स की 13 नवंबर की करनाल में राज्य स्तरीय रैली व आशा वर्कर्स के 16 व 17 अक्टूबर को होने वाले राज्य सम्मेलन में आंदोलन की घोषणा में भाग लेने का फैसला किया। उन्

ये है मुख्य मांग
केंद्र सरकार 45वें व 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार स्कीम वर्कर्स को मजदूर के रूप में मान्यता दो, सभी स्कीम वर्कर्स को 21000 रू प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दो, 10000 रुपये प्रतिमाह पेंशन और ईएसआई, पीएफ आदि प्रदान करें। मजदूर विरोधी लेबर कोड्स को वापस लिया जाए। स्कीम वर्कर्स को ‘वर्कर’ की श्रेणी में लाया जाए। जब तक स्कीम वर्कर्स का नियमितकरण लंबित है, तब तक सुनिश्चित करें कि सभी स्कीम वर्कर्स का ई-श्रम पोर्टल में पंजीकरण किया जाए। सरकार आईसीडीएस, एनएचएम व मिड-डे मील स्कीम के बजट आवंटन में बढ़ोतरी कर वर्कर्स को स्थायी करे। आईसीडीएस और मिड डे मील स्कीम के सभी लाभार्थियों के लिए अच्छी गुणवत्ता के साथ पर्याप्त अतिरिक्त राशन तुरंत प्रदान किया जाए। इन योजनाओं में प्रवासियों को शामिल किए जाए।
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