{"_id":"67476ce2e46707272f07bfd4","slug":"farmers-should-irrigate-green-fodder-at-an-interval-of-15-days-for-regular-germination-charkhi-dadri-news-c-126-1-shsr1012-126982-2024-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: नियमित फुटाव के लिए हरा चारा की 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करें किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: नियमित फुटाव के लिए हरा चारा की 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करें किसान
विज्ञापन
हरा चारा की प्रमुख फसल बरसिम।
चरखी दादरी। किसान हरा चारा की फसलों की सिंचाई 15 दिन के अंतराल में करें, ताकि सही एवं नियमित फुटाव होता रहे। हरा चारा की फसलों की समय पर सिंचाई होती रहे, तो किसान मार्च तक इसकी चार से पांच कटाई लेकर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं।
दरअसल, रबी सीजन में किसानों ने हरे चारे के लिए जई व बरसीम की बिजाई कर रखी है। यह दोनों फसलें हरे चारे की प्रमुख फसलें हैं। काफी संख्या में किसान हरे चारे की बिक्री करते हैं। हरा चारा पशु के लिए बेहद पौष्टिक एवं गुणकारी माना जाता है। हरा चारा आयरन की मात्रा को बढ़ाता है और इसमें पशु के शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गाय या भैंस के दूध में बढ़ोतरी होती है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार दुधारू पशुओं को सूखा चारा में मिलाकर हरा चारा खिलाना चाहिए। कई बार अकेले हरा चारा की वजह से पशु को पेचिस की शिकायत हो जाती है। किसान हरा चारा की अच्छी पैदावार लेने के लिए 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करें। समय पर सिंचाई करने से इसकी कई कटाई ली जा सकती है। हरा चारा की गोशालाओं में भी जरूरत होती है। बाजार में भी खुले में हरे चारे की बिक्री जा सकती है। एक प्रकार से हरा चारा की फसल किसानों के लिए नकदी फसल है।
विज्ञापन
8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में की गई बिजाई
इस समय जिले में करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने जई, बरसीम की बिजाई कर रखी है। अब तक किसान इसकी दो सिंचाई कर चुके हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- हरा चारा की फसलों की किसान 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करते रहें। समय पर सिंचाई से फुटाव जल्द होगा। इसकी चार से पांच कटाई ली जा सकती हैं।
- कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
विज्ञापन
दरअसल, रबी सीजन में किसानों ने हरे चारे के लिए जई व बरसीम की बिजाई कर रखी है। यह दोनों फसलें हरे चारे की प्रमुख फसलें हैं। काफी संख्या में किसान हरे चारे की बिक्री करते हैं। हरा चारा पशु के लिए बेहद पौष्टिक एवं गुणकारी माना जाता है। हरा चारा आयरन की मात्रा को बढ़ाता है और इसमें पशु के शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गाय या भैंस के दूध में बढ़ोतरी होती है।
विज्ञापन
पशु चिकित्सकों के अनुसार दुधारू पशुओं को सूखा चारा में मिलाकर हरा चारा खिलाना चाहिए। कई बार अकेले हरा चारा की वजह से पशु को पेचिस की शिकायत हो जाती है। किसान हरा चारा की अच्छी पैदावार लेने के लिए 15 दिन के अंतराल में सिंचाई करें। समय पर सिंचाई करने से इसकी कई कटाई ली जा सकती है। हरा चारा की गोशालाओं में भी जरूरत होती है। बाजार में भी खुले में हरे चारे की बिक्री जा सकती है। एक प्रकार से हरा चारा की फसल किसानों के लिए नकदी फसल है।
विज्ञापन
8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में की गई बिजाई
इस समय जिले में करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने जई, बरसीम की बिजाई कर रखी है। अब तक किसान इसकी दो सिंचाई कर चुके हैं।
- कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग