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Charkhi Dadri News: चरखी दादरी में बनेगा आंखों का ओटी, ऑपरेशन के लिए भागदौड़ होगी छोटी
Fri, 12 Jan 2024 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 12 Jan 2024 01:30 AM IST
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नागरिक अस्पताल चरखी दादरी में आंखों का ऑपरेशन थिएटर तैयार करने में जुटे श्रमिक।
चरखी दादरी। जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल (जीएच) में जल्द ही नेत्र जांच सुविधाओं में विस्तार होने वाला है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने नेत्र जांच ऑपरेशन थिएटर (ओटी) का निर्माण करवाने की कवायद शुरू कर दी है। दस दिन में यहां आंखों के ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे। नेत्र जांच सुविधा बढ़ने से हर माह करीब 1,500 मरीजों को लाभ मिलेगा और उन्हें उपचार के लिए दूसरे जिलों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
अस्पताल में करीब दो साल पहले नेत्र रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी लेकिन जिले में ओटी न होने के कारण फिलहाल आंखों के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। ऑपरेशन की स्थिति वाले मरीज को प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। जिले से हर माह करीब 400 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों की भागदौड़ करने के लिए मजबूर हैं। इन मरीजों को भागदौड़ से छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2021 में नेत्र रोग विभाग के लिए अलग ब्लॉक के निर्माण की योजना बनाई थी। पहले इस ब्लॉक का निर्माण नागरिक अस्पताल में करवाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन बाद में सरकार के निर्देशों पर इस योजना में फेरबदल कर मातृ-शिशु अस्पताल में जगह तय की गई। अब फिर से इसका स्थान नागरिक अस्पताल में तय कर विभाग ने काम शुरू करवा दिया गया है। विभाग का दावा है कि 22 जनवरी तक ओटी निर्माण कार्य पूरा करवा दिया जाएगा। इसके तुरंत बाद आंखों के ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे।
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रोजाना 100 के करीब है दैनिक ओपीडी
नागरिक अस्पताल के पुराने भवन में आंखों के विशेषज्ञ ओपीडी देख रहे हैं। यहां करीब 100 दैनिक ओपीडी रहती है। रोजाना करीब बीस मरीजों को ऑपरेशन के लिए यहां से भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। इस लिहाज से एक माह में 20 कार्य दिवस मानें तो करीब 4,000 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों में भेजे जा रहे हैं। आंखों का ब्लॉक बनने के बाद मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 5,000 से 30,000 तक है निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मरीजों के परिजन दूसरे जिलों की भागदौड़ से बचने के लिए निजी अस्पतालों में जाकर भी ऑपरेशन करवा रहे हैं। एक निजी अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन का खर्च 5,000 से लेकर 30,000 तक आता है। गरीब तबके के लिए ये खर्च उठाना संभव नहीं है।
आंखोंं के ऑपरेशन शुरू करने के लिए ओटी का निर्माण शुरू कर दिया गया है। पूरा प्रयास है कि दस दिन में ओटी तैयार करवाकर ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएं। इसके बाद मरीजों को दूसरे जिलों के सरकारी या निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाने नहीं जाना पड़ेगा। - डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी।
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अस्पताल में करीब दो साल पहले नेत्र रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी लेकिन जिले में ओटी न होने के कारण फिलहाल आंखों के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। ऑपरेशन की स्थिति वाले मरीज को प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। जिले से हर माह करीब 400 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों की भागदौड़ करने के लिए मजबूर हैं। इन मरीजों को भागदौड़ से छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
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स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2021 में नेत्र रोग विभाग के लिए अलग ब्लॉक के निर्माण की योजना बनाई थी। पहले इस ब्लॉक का निर्माण नागरिक अस्पताल में करवाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन बाद में सरकार के निर्देशों पर इस योजना में फेरबदल कर मातृ-शिशु अस्पताल में जगह तय की गई। अब फिर से इसका स्थान नागरिक अस्पताल में तय कर विभाग ने काम शुरू करवा दिया गया है। विभाग का दावा है कि 22 जनवरी तक ओटी निर्माण कार्य पूरा करवा दिया जाएगा। इसके तुरंत बाद आंखों के ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएंगे।
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रोजाना 100 के करीब है दैनिक ओपीडी
नागरिक अस्पताल के पुराने भवन में आंखों के विशेषज्ञ ओपीडी देख रहे हैं। यहां करीब 100 दैनिक ओपीडी रहती है। रोजाना करीब बीस मरीजों को ऑपरेशन के लिए यहां से भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। इस लिहाज से एक माह में 20 कार्य दिवस मानें तो करीब 4,000 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों में भेजे जा रहे हैं। आंखों का ब्लॉक बनने के बाद मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 5,000 से 30,000 तक है निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मरीजों के परिजन दूसरे जिलों की भागदौड़ से बचने के लिए निजी अस्पतालों में जाकर भी ऑपरेशन करवा रहे हैं। एक निजी अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन का खर्च 5,000 से लेकर 30,000 तक आता है। गरीब तबके के लिए ये खर्च उठाना संभव नहीं है।
आंखोंं के ऑपरेशन शुरू करने के लिए ओटी का निर्माण शुरू कर दिया गया है। पूरा प्रयास है कि दस दिन में ओटी तैयार करवाकर ऑपरेशन शुरू कर दिए जाएं। इसके बाद मरीजों को दूसरे जिलों के सरकारी या निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाने नहीं जाना पड़ेगा। - डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी।