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स्वागत 2026 : कनेक्टिविटी के जंक्शन पर खड़े जिले को औद्योगिक पहचान की दरकार, साल 2026 पर टिकी उद्यमियों की निगाहें
Wed, 31 Dec 2025 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 31 Dec 2025 02:22 AM IST
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चरखी दादरी की सड़क।
चरखी दादरी। प्रदेश के सबसे युवा जिलों में शामिल चरखी दादरी की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और व्यापारिक केंद्र बनाने की क्षमता रखती है लेकिन यह जिले की विडंबना है कि जिला बनने के नौ वर्ष बीतने के बाद भी यहां औद्योगिक क्षेत्र की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
तीन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और रेल कनेक्टिविटी होने के बावजूद दादरी जिला औद्योगिक मरुस्थल बना है। ऐसे में अब लोगों को उम्मीद है कि नव वर्ष 2026 में सरकार इस तरफ ध्यान जरूर देगी और दादरी में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना होगी।
दादरी से गुजरते हैं तीन राष्ट्रीय राजमार्ग
दादरी से मौजूदा समय में तीन एनएच गुजरते हैं। इसमें एनएच 152-डी, एनएच 334-बी व एनएच 148-बी शामिल हैं। ये एनएच दादरी को राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों से जोड़ते हैं। यहां से रेल की भी बेहतर कनेक्टिविटी है। इससे यहां ट्रांसपोर्टेशन की भी समस्या नहीं है। इन सबके बावजूद यहां औद्योगिक सेक्टर विकसित न होना बड़ी नाकामी है।
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उद्यमियों के सामने बनी चुनौतियां
औद्योगिक क्षेत्र के अभाव में स्थानीय उद्यमियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यहां संचालित छोटे-मोटे उद्योग बिखरे हुए हैं और उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण उद्योग लगाने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दमकल विभाग जैसे कई विभागों से एनओसी मिलने में मशक्कत करनी पड़ती है। बैंक भी उद्योग के लिए ऋण देने से पहले सीएलयू, औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति देखते हैं। दादरी में अधिकृत औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण बैंक जोखिम लेने से कतराते हैं, जिससे नए स्टार्टअप और मध्यम उद्योगों को पूंजी की कमी का सामना करना पड़ता है।
उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव
औद्योगिक क्षेत्र न होने से बिजली के भारी लोड, ड्रेनेज सिस्टम और सड़कों का बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं हो पाता। निजी जमीनों पर उद्योग चलाने वाले बिजली के व्यावसायिक कनेक्शन और पानी की निकासी के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं।
सीसीआई की जमीन का नहीं हो सका समाधान
दादरी में सीमेंट काॅरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की 200 एकड़ से अधिक जमीन के सदुपयोग के लिए पिछले करीब 29 वर्षों से कोई ठोस योजना नहीं बन सकी है। वर्ष 1996 में इस कारखाने में सीमेंट उत्पादन कार्य बंद होने के बाद से यह जमीन बेकार पड़ी है। पिछले लंबे समय से लोग इस जमीन पर औद्योगिक या आवासीय सेक्टर बनाने की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक दादरी में औद्योगिक क्षेत्र न बन पाने के पीछे मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया और प्रशासन की सुस्ती रही है। हालांकि हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसीई) की ओर से समय-समय पर सर्वे करने की बात जरूर कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इस दिशा में काम नहीं हो सका।
नववर्ष 2026 से उम्मीदें
क्षेत्र के उद्यमियों को अब नववर्ष 2026 में दादरी में औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा होने की उम्मीदें हैं। इसके लिए उद्यमियों की ओर से स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी यहां औद्योगिक क्षेत्र की मांग उठाई जा रही है। कुछ वर्ष पहले प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दादरी में औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से आवेदन मंगवाने की बात कही थी लेकिन वह योजना पूरी नहीं हो सकी।
बढ़ सकेंगे रोजगार के अवसर
दादरी जिले से काफी संख्या में युवा दूसरे जिलों या राज्यों में जाकर नौकरी करते हैं। दादरी में औद्योगिक सेक्टर बनने व उद्योग स्थापित होने से यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ऐसे में काफी संख्या में स्थानीय युवाओं को यहीं पर रोजगार मिल सकेगा। दादरी के बाजारों में कारोबार में भी इजाफा होना स्वाभाविक है। अन्य जिलों की तरह यहां भी औद्योगिक सेक्टर के आसपास काफी दुकानें खुल सकेंगी, जो स्वरोजगार को भी बढ़ावा देंगी।
लघु उद्योग भारती भी उठा रहा है मांग
लघु उद्योग भारती संगठन की ओर से भी पिछले काफी समय से दादरी में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग उठाई जा रही है। इसके लिए उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें भी हो चुकी हैं। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि एक निर्धारित जगह न होने के कारण जिले में विशेष क्षेत्र के बजाय कई स्थानों पर उद्योग लगे हैं। उनके संचालकों को बिजली, सीवरेज सहित कई समस्याएं आती हैं।
क्रशर एसोसिएशन भी कर रही औद्योगिक दर्जा देने की मांग
दादरी जिले के विभिन्न गांवों में स्थित माइनिंग जोन में संचालित क्रशर जोन से सरकार को हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। जिले में करीब 275 स्टोन क्रशर संचालित हैं। इनसे हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। क्रशर संचालकों का कहना है कि उन्हें ग्रेप की पाबंदियों और बिजली संबंधित समस्याओं के कारण काफी परेशानी होती है। ऐसे में यदि क्रशर जोन को संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा दिया जाए, तो यहां बुनियादी ढांचे में सुधार होगा और प्रदूषण नियंत्रण की आधुनिक तकनीकें सामूहिक रूप से लगाई जा सकेंगी।
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तीन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और रेल कनेक्टिविटी होने के बावजूद दादरी जिला औद्योगिक मरुस्थल बना है। ऐसे में अब लोगों को उम्मीद है कि नव वर्ष 2026 में सरकार इस तरफ ध्यान जरूर देगी और दादरी में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना होगी।
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दादरी से गुजरते हैं तीन राष्ट्रीय राजमार्ग
दादरी से मौजूदा समय में तीन एनएच गुजरते हैं। इसमें एनएच 152-डी, एनएच 334-बी व एनएच 148-बी शामिल हैं। ये एनएच दादरी को राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों से जोड़ते हैं। यहां से रेल की भी बेहतर कनेक्टिविटी है। इससे यहां ट्रांसपोर्टेशन की भी समस्या नहीं है। इन सबके बावजूद यहां औद्योगिक सेक्टर विकसित न होना बड़ी नाकामी है।
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उद्यमियों के सामने बनी चुनौतियां
औद्योगिक क्षेत्र के अभाव में स्थानीय उद्यमियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यहां संचालित छोटे-मोटे उद्योग बिखरे हुए हैं और उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण उद्योग लगाने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दमकल विभाग जैसे कई विभागों से एनओसी मिलने में मशक्कत करनी पड़ती है। बैंक भी उद्योग के लिए ऋण देने से पहले सीएलयू, औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति देखते हैं। दादरी में अधिकृत औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण बैंक जोखिम लेने से कतराते हैं, जिससे नए स्टार्टअप और मध्यम उद्योगों को पूंजी की कमी का सामना करना पड़ता है।
उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव
औद्योगिक क्षेत्र न होने से बिजली के भारी लोड, ड्रेनेज सिस्टम और सड़कों का बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं हो पाता। निजी जमीनों पर उद्योग चलाने वाले बिजली के व्यावसायिक कनेक्शन और पानी की निकासी के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं।
सीसीआई की जमीन का नहीं हो सका समाधान
दादरी में सीमेंट काॅरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की 200 एकड़ से अधिक जमीन के सदुपयोग के लिए पिछले करीब 29 वर्षों से कोई ठोस योजना नहीं बन सकी है। वर्ष 1996 में इस कारखाने में सीमेंट उत्पादन कार्य बंद होने के बाद से यह जमीन बेकार पड़ी है। पिछले लंबे समय से लोग इस जमीन पर औद्योगिक या आवासीय सेक्टर बनाने की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक दादरी में औद्योगिक क्षेत्र न बन पाने के पीछे मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया और प्रशासन की सुस्ती रही है। हालांकि हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसीई) की ओर से समय-समय पर सर्वे करने की बात जरूर कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इस दिशा में काम नहीं हो सका।
नववर्ष 2026 से उम्मीदें
क्षेत्र के उद्यमियों को अब नववर्ष 2026 में दादरी में औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा होने की उम्मीदें हैं। इसके लिए उद्यमियों की ओर से स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी यहां औद्योगिक क्षेत्र की मांग उठाई जा रही है। कुछ वर्ष पहले प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दादरी में औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से आवेदन मंगवाने की बात कही थी लेकिन वह योजना पूरी नहीं हो सकी।
बढ़ सकेंगे रोजगार के अवसर
दादरी जिले से काफी संख्या में युवा दूसरे जिलों या राज्यों में जाकर नौकरी करते हैं। दादरी में औद्योगिक सेक्टर बनने व उद्योग स्थापित होने से यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ऐसे में काफी संख्या में स्थानीय युवाओं को यहीं पर रोजगार मिल सकेगा। दादरी के बाजारों में कारोबार में भी इजाफा होना स्वाभाविक है। अन्य जिलों की तरह यहां भी औद्योगिक सेक्टर के आसपास काफी दुकानें खुल सकेंगी, जो स्वरोजगार को भी बढ़ावा देंगी।
लघु उद्योग भारती भी उठा रहा है मांग
लघु उद्योग भारती संगठन की ओर से भी पिछले काफी समय से दादरी में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग उठाई जा रही है। इसके लिए उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें भी हो चुकी हैं। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि एक निर्धारित जगह न होने के कारण जिले में विशेष क्षेत्र के बजाय कई स्थानों पर उद्योग लगे हैं। उनके संचालकों को बिजली, सीवरेज सहित कई समस्याएं आती हैं।
क्रशर एसोसिएशन भी कर रही औद्योगिक दर्जा देने की मांग
दादरी जिले के विभिन्न गांवों में स्थित माइनिंग जोन में संचालित क्रशर जोन से सरकार को हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। जिले में करीब 275 स्टोन क्रशर संचालित हैं। इनसे हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। क्रशर संचालकों का कहना है कि उन्हें ग्रेप की पाबंदियों और बिजली संबंधित समस्याओं के कारण काफी परेशानी होती है। ऐसे में यदि क्रशर जोन को संगठित औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा दिया जाए, तो यहां बुनियादी ढांचे में सुधार होगा और प्रदूषण नियंत्रण की आधुनिक तकनीकें सामूहिक रूप से लगाई जा सकेंगी।