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कर्मचारियों का 4.68 लाख का अटका भुगतान, फेस्टिवल सीजन में सारा शहर परेशान
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कर्मचारियों का 4.68 लाख का वेतन अटका, फेस्टिवल सीजन में सारा शहर परेशान
तीन दिन से 46 कर्मचारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, सीवर लाइनों की सफाई और पानी उठान का काम रुकने से बैक मार रहे मैनहोल, पांच जगह शहर में जलभराव और 25 जगह सीवर लाइन लीकेज
ट्रेजरी ऑफिसर के आश्वासन के बाद भी कर्मचारियों ने शुक्रवार को हड़ताल नहीं की खत्म
चरखी दादरी। जनस्वास्थ्य विभाग में तैनात 46 कर्मचारियों का 4.68 लाख का भुगतान अटकने का खामियाजा फेस्टिवल सीजन में शहर वासी भुगत रहे है। चार माह का वेतन न मिलने के कारण पिछले तीन दिनों से 25 मोटर ऑपरेटर्स, 18 सीवरमैन और तीन चालक हड़ताल पर हैं। इसके चलते शहर में सीवर समस्याएं गंभीर हो गई है। सीवर लाइनों की सफाई और पानी उठान का काम रुकने से मैनहोल बैक मार रहे है। पांच जगह शहर में जलभराव है और 25 जगह सीवर लाइन लीकेज की समस्या है। शुक्रवार को जनआंदोलन समिति पदाधिकारी व शहर के तीन निवर्तमान पार्षद कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में पहुंचे और उन्होंने विभाग और ट्रेजरी के अधिकारियों से इस मसले पर बातचीत की। वहीं, ट्रेजरी ऑफिसर ने कर्मचारियों के बीच पहुंचकर आश्वासन दिया कि दिवाली से पहले सभी के खातों में बकाया वेतनमान डाल दिया जाएगा। इस आश्वासन पर कर्मचारियों ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि पहले रुपये जेब में डलने के बाद ही काम पर लौटेंगे।
विदित रहे कि लगातार चार माह तक वेतनमान न मिलने पर जनस्वास्थ्य विभाग में तैनात मोटर ऑपरेटर्स, सीवर मैन और चालकों ने गत बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। वो एक्सईएन कार्यालय के सामने धरना दे रहे हैं और ये 46 कर्मचारी काम पर नहीं जा रहे। इनकी बकाया राशि चार लाख 68 हजार रुपये बनती है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के 46 कर्मचारी एकसाथ हड़ताल पर जाने से व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। बुधवार को ही एक्सईएन ने उन्हें शुक्रवार तक बकाया वेतनमान का भुगतान करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन शुक्रवार को भी स्थिति जस की तस रही। इसके चलते कर्मचारियों ने धरना जारी रखा। वहीं, दूसरी ओर नगर व्यापार मंडल प्रधान एवं निवर्तमान पार्षद रविंद्र गुप्ता, महेश गुप्ता, एडवोकेट विक्रम श्योराण और सुनील सांगवान कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि जनआंदोलन समिति इस लड़ाई में कर्मचारियों के साथ है। इसके बाद उन्होंने पहले जनस्वास्थ्य विभाग और फिर ट्रेजरी ऑफिसर से बातचीत की। ट्रेजरी ऑफिसर ने कर्मचारियों को दीवाली से पहले खातों में भुगतान करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन वो नहीं माने।
- फाइल पर लग गया था ऑब्जेक्शन
कर्मचारियों के बीच पहुंचे ट्रेजरी ऑफिसर ने बताया कि भुगतान के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से फाइल कार्यालय में भेजी गई थी। खामियों के चलते उस पर ऑब्जेक्शन लग गए। शुक्रवार को विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत हो गई है। दो से तीन दिन के अंदर कर्मचारियों के खातों में राशि डाल दी जाएगी।
- पार्षद बोले : अफसर बैठे मौन, मेहनतकश कर्मचारियों की सूखी जा रही दीवाली
निवर्तमान पार्षद रविंद्र गुप्ता, महेश गुप्ता, नितिन जांघू और एडवोकेट विक्रम श्योराण ने ट्रेजरी ऑफिसर से बात करते हुए कहा कि ये शहर की गंदगी साफ करने वाले मेहनतकश कर्मचारी हैं। चार माह से इनका वेतनमान अटकना अफसरों की लापरवाही दिखा रहा है। इन कर्मचारियों की दीवाली सूखी जा रही है जबकि अधिकारी मौन हैं। रविंद्र गुप्ता ने कहा कि शहर में पांच जगह पानी भरा हुआ है जबकि 25 जगह सीवर ब्लॉकेज है।
- सीवर लाइनों की मोटरें चलाने और सीवर लाइनों की ब्लॉकेज खोलने का काम बंद
25 मोटर ऑपरेटर्स हड़ताल पर होने के चलते सीवर लाइनों की मोटरें नहीं चल पा रही हैं जिसके चलते लाइनों से उठान नहीं हो पा रहा है। वहीं, 18 सीवरमैन हड़ताल पर होने से सीवर ब्लॉकेज खोलने का काम पिछले तीन दिन से नहीं हो पा रहा। ये कर्मचारी प्रतिदिन 25 से अधिक ब्लॉकेज खोलते थे, लेकिन अब सीवर लाइनों की ब्लॉकेज की समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। जल्द हड़ताल खत्म नहीं हुई तो शहर में सीवर लाइनों की गंदगी सड़कों पर आने में देर नहीं लगेगी।
- कर्मचारी बोले : अफसर ही बताए, कैसे पाले परिवार...
हड़ताल में शामिल प्रेम सिंह, दिनेश, सुखबीर, सन्नी, सुनील, मातूराम, रविंद्र, सौरभ, दीपक, अमरदीप, पवन, बने सिंह और प्रवीन आदि कर्मचारियों ने बताया कि चार माह से वेतन नहीं मिलने के कारण घर का चूल्हा भी उधार मांगकर जलाना पड़ रहा है। वेतन से ही हमारा घर चलता है और तीन माह से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हक अब तक नहीं मिल पाया। उन्होंने पीड़ा बयां करते हुए कहा कि अधिकारी ही बताए कि हम घर कैसे चलाए?
वर्जन :::
ट्रेजरी कार्यालय में हमारी बात हो चुकी है। जल्द ही कर्मचारियों के खाते में भुगतान कर दिया जाएगा। मेरी अपील है कि कर्मचारी हड़ताल खत्म कर काम पर लौट आएं। इनके हड़ताल पर होने से सीवर समस्याएं गहराई हुई हैं।
संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
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तीन दिन से 46 कर्मचारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, सीवर लाइनों की सफाई और पानी उठान का काम रुकने से बैक मार रहे मैनहोल, पांच जगह शहर में जलभराव और 25 जगह सीवर लाइन लीकेज
ट्रेजरी ऑफिसर के आश्वासन के बाद भी कर्मचारियों ने शुक्रवार को हड़ताल नहीं की खत्म
चरखी दादरी। जनस्वास्थ्य विभाग में तैनात 46 कर्मचारियों का 4.68 लाख का भुगतान अटकने का खामियाजा फेस्टिवल सीजन में शहर वासी भुगत रहे है। चार माह का वेतन न मिलने के कारण पिछले तीन दिनों से 25 मोटर ऑपरेटर्स, 18 सीवरमैन और तीन चालक हड़ताल पर हैं। इसके चलते शहर में सीवर समस्याएं गंभीर हो गई है। सीवर लाइनों की सफाई और पानी उठान का काम रुकने से मैनहोल बैक मार रहे है। पांच जगह शहर में जलभराव है और 25 जगह सीवर लाइन लीकेज की समस्या है। शुक्रवार को जनआंदोलन समिति पदाधिकारी व शहर के तीन निवर्तमान पार्षद कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में पहुंचे और उन्होंने विभाग और ट्रेजरी के अधिकारियों से इस मसले पर बातचीत की। वहीं, ट्रेजरी ऑफिसर ने कर्मचारियों के बीच पहुंचकर आश्वासन दिया कि दिवाली से पहले सभी के खातों में बकाया वेतनमान डाल दिया जाएगा। इस आश्वासन पर कर्मचारियों ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि पहले रुपये जेब में डलने के बाद ही काम पर लौटेंगे।
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विदित रहे कि लगातार चार माह तक वेतनमान न मिलने पर जनस्वास्थ्य विभाग में तैनात मोटर ऑपरेटर्स, सीवर मैन और चालकों ने गत बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। वो एक्सईएन कार्यालय के सामने धरना दे रहे हैं और ये 46 कर्मचारी काम पर नहीं जा रहे। इनकी बकाया राशि चार लाख 68 हजार रुपये बनती है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के 46 कर्मचारी एकसाथ हड़ताल पर जाने से व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। बुधवार को ही एक्सईएन ने उन्हें शुक्रवार तक बकाया वेतनमान का भुगतान करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन शुक्रवार को भी स्थिति जस की तस रही। इसके चलते कर्मचारियों ने धरना जारी रखा। वहीं, दूसरी ओर नगर व्यापार मंडल प्रधान एवं निवर्तमान पार्षद रविंद्र गुप्ता, महेश गुप्ता, एडवोकेट विक्रम श्योराण और सुनील सांगवान कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि जनआंदोलन समिति इस लड़ाई में कर्मचारियों के साथ है। इसके बाद उन्होंने पहले जनस्वास्थ्य विभाग और फिर ट्रेजरी ऑफिसर से बातचीत की। ट्रेजरी ऑफिसर ने कर्मचारियों को दीवाली से पहले खातों में भुगतान करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन वो नहीं माने।
- फाइल पर लग गया था ऑब्जेक्शन
कर्मचारियों के बीच पहुंचे ट्रेजरी ऑफिसर ने बताया कि भुगतान के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से फाइल कार्यालय में भेजी गई थी। खामियों के चलते उस पर ऑब्जेक्शन लग गए। शुक्रवार को विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत हो गई है। दो से तीन दिन के अंदर कर्मचारियों के खातों में राशि डाल दी जाएगी।
- पार्षद बोले : अफसर बैठे मौन, मेहनतकश कर्मचारियों की सूखी जा रही दीवाली
निवर्तमान पार्षद रविंद्र गुप्ता, महेश गुप्ता, नितिन जांघू और एडवोकेट विक्रम श्योराण ने ट्रेजरी ऑफिसर से बात करते हुए कहा कि ये शहर की गंदगी साफ करने वाले मेहनतकश कर्मचारी हैं। चार माह से इनका वेतनमान अटकना अफसरों की लापरवाही दिखा रहा है। इन कर्मचारियों की दीवाली सूखी जा रही है जबकि अधिकारी मौन हैं। रविंद्र गुप्ता ने कहा कि शहर में पांच जगह पानी भरा हुआ है जबकि 25 जगह सीवर ब्लॉकेज है।
- सीवर लाइनों की मोटरें चलाने और सीवर लाइनों की ब्लॉकेज खोलने का काम बंद
25 मोटर ऑपरेटर्स हड़ताल पर होने के चलते सीवर लाइनों की मोटरें नहीं चल पा रही हैं जिसके चलते लाइनों से उठान नहीं हो पा रहा है। वहीं, 18 सीवरमैन हड़ताल पर होने से सीवर ब्लॉकेज खोलने का काम पिछले तीन दिन से नहीं हो पा रहा। ये कर्मचारी प्रतिदिन 25 से अधिक ब्लॉकेज खोलते थे, लेकिन अब सीवर लाइनों की ब्लॉकेज की समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। जल्द हड़ताल खत्म नहीं हुई तो शहर में सीवर लाइनों की गंदगी सड़कों पर आने में देर नहीं लगेगी।
- कर्मचारी बोले : अफसर ही बताए, कैसे पाले परिवार...
हड़ताल में शामिल प्रेम सिंह, दिनेश, सुखबीर, सन्नी, सुनील, मातूराम, रविंद्र, सौरभ, दीपक, अमरदीप, पवन, बने सिंह और प्रवीन आदि कर्मचारियों ने बताया कि चार माह से वेतन नहीं मिलने के कारण घर का चूल्हा भी उधार मांगकर जलाना पड़ रहा है। वेतन से ही हमारा घर चलता है और तीन माह से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हक अब तक नहीं मिल पाया। उन्होंने पीड़ा बयां करते हुए कहा कि अधिकारी ही बताए कि हम घर कैसे चलाए?
वर्जन :::
ट्रेजरी कार्यालय में हमारी बात हो चुकी है। जल्द ही कर्मचारियों के खाते में भुगतान कर दिया जाएगा। मेरी अपील है कि कर्मचारी हड़ताल खत्म कर काम पर लौट आएं। इनके हड़ताल पर होने से सीवर समस्याएं गहराई हुई हैं।
संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग