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Charkhi Dadri News: पुण्य के साथ कमा रहे पर्यावरण प्रदूषित करने का पाप

Thu, 28 May 2026 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Thu, 28 May 2026 12:09 AM IST
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Earning the sin of polluting the environment with virtue
बस स्टैंड रोड स्थित डिवाइडर के पास दूर तक बिखरे पड़े प्लास्टिक के गिलास। संवाद
चरखी दादरी। जेठ की तपती दुपहरी में राहगीरों को ठंडा शरबत पिलाना पुण्य और सेवा का कार्य है। लेकिन बीते कुछ सालों में इस पुण्य कर्म के पीछे पर्यावरण के साथ खिलवाड़ भी हो रहा है। आस्था के नाम पर बांटे जा रहे इस शरबत के साथ सड़कों, नालियों में फेंके जा रहे एकल उपयोग प्लास्टिक के गिलास हमारे पर्यावरण के लिए एक खतरनाक बनते जा रहे हैं।
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बढ़ती गर्मियों के सीजन में शहर की अनेक धार्मिक संस्थाएं या स्थानीय दुकानदार बड़े-बड़े टेंट लगाकर उत्साह से लोगों को शरबत वितरित करते हैं। इस दौरान संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण को दरकिनार कर प्लास्टिक के गिलासों में शरबत पिलाने का काम करते है लेकिन इस सेवा भाव का यह दृश्य तब बदसूरत हो जाता है जब शरबत पीने के बाद लोग उस प्लास्टिक के गिलास को वहीं सड़क पर फेंक कर आगे बढ़ जाते हैं। चंद घंटों में ही पूरी सड़क एकल उपयोग प्लास्टिक के गिलासों से पट जाती है।
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सड़कों पर जमा हो रहा कचरा

इन आयोजनों के बाद मुख्य मार्गों और उनके आसपास क्षेत्रों में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा हो जाता है जो तेज हवा के साथ उड़ता रहता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि आस्था के साथ हमें प्रकृति का भी ख्याल रखना जरूरी है। सनातन परंपरा में तो प्रकृति, नदियों और पेड़ों को पूजने का विधान है। ऐसे में धर्म और सेवा के नाम पर पर्यावरण को इस कदर दूषित करना पुण्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक परेशानी बनता जा रहा है।
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नालों के ब्लॉक और बेजुबानों की मौत का बन रहे कारण

यह समस्या सिर्फ सड़कों के गंदे दिखने तक सीमित नहीं है। हवा चलने पर ये हल्के प्लास्टिक के गिलास उड़कर सीधे नालों और सीवर लाइनों में चले जाते हैं। इसके कारण नालियां और सीवर जाम हो जाते हैं। मानसून से ठीक पहले इस तरह का प्लास्टिक कचरा शहरों के जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह जाम कर देता है जिससे हल्की बारिश में भी शहरों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। वहीं, सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश और अन्य जानवर अक्सर इन गिलासों में बचे हुए मीठे के चक्कर में इन्हें निगल जाते हैं। यह प्लास्टिक उनके पेट में जमा होकर उनकी दर्दनाक मौत का कारण बनता है।


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शहर की समाजसेवी संस्थाओं से शरबत वितरण के लिए प्लास्टिक के गिलास प्रयोग नहीं करने की अपील की गई है। नगर परिषद कार्यालय परिसर में धार्मिक संस्था की ओर से पानी पिलाने के लिए स्टील के गिलास निशुल्क देने की घोषणा की गई है ताकि प्लास्टिक के गिलासों का इस्तेमाल करना बंद कर दे। बावजूद नियमों की अवहेलना करने वाले लोगों पर नियमों अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

- राजेश कुमार, सीएसआई, नगर परिषद।
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