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मासूम के लिए डॉक्टर और नि:संतान दंपती फरिश्ता बनकर आए

Wed, 07 Jun 2023 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 07 Jun 2023 01:10 AM IST
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Doctor and childless couple came as angels for the innocent
चरखी दादरी। शादी के ढाई महीने बाद ही जींद जिला निवासी एक महिला ने निजी अस्पताल में 25 मई को नवजात को जन्म दिया। महिला और उसके पति ने बच्चे को अपनाने से इन्कार कर दिया और अस्पताल में ही बच्चे को छोड़कर चला गया। ऐसे में प्रधान अस्पताल की संचालिका डॉक्टर सुनीता प्रधान और 30 साल से नि:संतान दंपती मासूम के लिए फरिश्ता बनकर आगे आए।
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डिलीवरी के बाद जब माता-पिता ने बच्चे को ले जाने से इन्कार कर दिया तो अस्पताल प्रबंधन समिति की ओर से उनकी सुलह कराने की कोशिश की गई। महिला के पति ने कहा कि ढाई माह पहले उसकी शादी हुई है और ये बच्चा उसका नहीं है। दूसरी ओर, महिला के मायके पक्ष के लोगों ने भी बच्चे को अपनाने से इन्कार कर दिया। इतना ही नहीं महिला के पक्ष ने तो ये तक लिख दिया कि उनके लिए बच्चा मर चुका है।ऐसे में सबसे पहले प्रधान अस्पताल संचालिका डॉ. सुनीता प्रधान ने इंसानियत का फर्ज निभाया।
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महिला डॉक्टर सुनीता प्रधान ने बताया कि बच्चे की मां और नानी ने उसे मारने की कोशिश तक की। इस पर अस्पताल प्रबंधन समिति ने उसे एक अन्य अस्पताल में भर्ती करा दिया, ताकि बच्चे को आंच न आए। वहां उसकी तबीयत में सुधार न होने पर उसे बच्चों के एक अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले बच्चे के माता और पिता ने उसे न अपनाने की बात लिखित में अस्पताल प्रबंधन समिति को दी थी।
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इसके बाद, 30 साल से नि:संतान दंपती बच्चे को अपनाने के लिए आगे आई। नि:संतान दंपती के सामने डॉ. ने बताया कि बच्चे का उपचार चलेगा और इसमें काफी खर्च आएगा। इस पर दंपती ने सहमति जता दी और बच्चे को अपनाने के लिए तैयार हो गए। महिला डॉक्टर ने अपने पास से बच्चे के उपचार पर करीब 67 हजार रुपये खर्च कर डाली। इसके बाद, बच्चा कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा और अब वो इनक्यूबेटर पर है। बच्चे पर अब तक नि:संतान दंपती भी लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं। संवाद
दस हजार आया प्रतिदिन वेंटिलेटर का खर्च
महिला डॉक्टर ने बताया कि डिलीवरी के अगले ही दिन बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। वेंटिलेटर का एक दिन का खर्च करीब दस हजार रुपये आया। उन्होंने बताया कि जो दंपती बच्चे को अपनाने के लिए आगे आए हैं, वो ही अब तक उपचार का खर्च वहन कर रहे हैं।

शादी के वक्त साढ़े पांच माह की गर्भवती थी युवती
दरअसल, शहर निवासी युवक ने इस मामले में अपनी पत्नी और उसके मायके पक्ष के लोगों पर एफआईआर दर्ज करा दी है। दर्ज रिपोर्ट में अवगत कराया गया है कि युवक की युवती से शादी मार्च में हुई थी। शादी के ढाई माह बाद ही महिला की डिलीवरी हो गई। जब उसकी शादी हुई तो वो करीब साढ़े 5 माह की गर्भवती थी। बावजूद इसके किसी को उसकी हालत का पता नहीं चल सका, जो चौंकाने वाली बात है।
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