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Charkhi Dadri News: जंक फूड की चाहत सेहत पर भारी, पोषण ट्रैकर से हो रही हर बच्चे की पहरेदारी, अब जिले में सिर्फ 49 कुपोषण के शिकार बच्चे
Sun, 10 May 2026 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 10 May 2026 12:19 AM IST
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चरखी दादरी। जिले में बच्चों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के निरंतर प्रयासों और निगरानी के चलते कुपोषित बच्चों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 67 से घटकर अब 49 रह गई है।
जिले के 634 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत करीब 35 हजार बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाती है। जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 69 था। विभाग पोषण ट्रैकर मशीन के माध्यम से बच्चों के वजन और कद की निगरानी करता है। कुपोषित पाए जाने पर बच्चों को स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाता है जहां विशेषज्ञों द्वारा उनके अभिभावकों की डाइट संबंधी काउंसिलिंग की जाती है और आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराए जाते हैं।
जंक फूड और बिगड़ती जीवनशैली है मुख्य कारण
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कुपोषण का एक बड़ा कारण खान-पान में आया बदलाव है। आजकल बच्चे पौष्टिक भोजन के बजाय बर्गर, चाऊमीन, समोसा और पिज्जा जैसे जंक फूड को प्राथमिकता दे रहे हैं। गरिष्ठ और तले हुए भोजन से बच्चों में पेट और आंतों के विकार बढ़ रहे हैं।शरीर को जरूरी पोषक तत्व न मिलने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे वे अपनी आयु के अन्य बच्चों की तुलना में पढ़ाई और खेलकूद में पिछड़ जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आदर्श स्थिति में बच्चे का वजन उसके कद और आयु के अनुपात में होना चाहिए (सामान्यतः प्रति इंच लंबाई पर एक किलोग्राम वजन का मानक माना जाता है)।
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आंगनबाड़ी व क्रैच में भेजी जा रही डाइट
केंद्र सरकार की ओर से कुपोषण से बचाव के लिए कई योजनाएं भी शुरू की गई है। इसके तहत आंगनबाड़ी व क्रैच में छह वर्ष तक के बच्चों को डाइट के रूप में संतुलित खाद्य पदार्थ खिलाए जाते हैं जिनमें अंजीर, रेडीमेड खीर, सोयाबिन, मूंगफली, चावल, पौष्टिक पराठा, पाउडर दूध आदि शामिल हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में एक बच्चे की डाइट का बजट 9 रुपये प्रतिदिन है जबकि क्रैच में डाइट बजट 12 रुपये है। कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए डाइट भत्ता 15 रुपये तय कर रखा है।
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कुपोषित बच्चों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। विभाग की ओर से इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को संतुलित डाइट दी जा रही है। चिकित्सकों की सलाह पर खाद्य पदार्थ खिलाए जा रहे हैं। समय-समय पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करवाई जा रही है। - सुशीला देवी, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, दादरी।
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जिले के 634 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत करीब 35 हजार बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाती है। जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 69 था। विभाग पोषण ट्रैकर मशीन के माध्यम से बच्चों के वजन और कद की निगरानी करता है। कुपोषित पाए जाने पर बच्चों को स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाता है जहां विशेषज्ञों द्वारा उनके अभिभावकों की डाइट संबंधी काउंसिलिंग की जाती है और आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराए जाते हैं।
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जंक फूड और बिगड़ती जीवनशैली है मुख्य कारण
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कुपोषण का एक बड़ा कारण खान-पान में आया बदलाव है। आजकल बच्चे पौष्टिक भोजन के बजाय बर्गर, चाऊमीन, समोसा और पिज्जा जैसे जंक फूड को प्राथमिकता दे रहे हैं। गरिष्ठ और तले हुए भोजन से बच्चों में पेट और आंतों के विकार बढ़ रहे हैं।शरीर को जरूरी पोषक तत्व न मिलने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे वे अपनी आयु के अन्य बच्चों की तुलना में पढ़ाई और खेलकूद में पिछड़ जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आदर्श स्थिति में बच्चे का वजन उसके कद और आयु के अनुपात में होना चाहिए (सामान्यतः प्रति इंच लंबाई पर एक किलोग्राम वजन का मानक माना जाता है)।
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आंगनबाड़ी व क्रैच में भेजी जा रही डाइट
केंद्र सरकार की ओर से कुपोषण से बचाव के लिए कई योजनाएं भी शुरू की गई है। इसके तहत आंगनबाड़ी व क्रैच में छह वर्ष तक के बच्चों को डाइट के रूप में संतुलित खाद्य पदार्थ खिलाए जाते हैं जिनमें अंजीर, रेडीमेड खीर, सोयाबिन, मूंगफली, चावल, पौष्टिक पराठा, पाउडर दूध आदि शामिल हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में एक बच्चे की डाइट का बजट 9 रुपये प्रतिदिन है जबकि क्रैच में डाइट बजट 12 रुपये है। कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए डाइट भत्ता 15 रुपये तय कर रखा है।
कुपोषित बच्चों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। विभाग की ओर से इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को संतुलित डाइट दी जा रही है। चिकित्सकों की सलाह पर खाद्य पदार्थ खिलाए जा रहे हैं। समय-समय पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करवाई जा रही है। - सुशीला देवी, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, दादरी।