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50 सेमिफोल्ड बेड, इंफ्यूजन पंप, ई-पेप मशीन और 250 नुबेलाइजर की हेड ऑफिस भेजी मांग

Wed, 16 Jun 2021 11:43 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jun 2021 11:43 PM IST
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Demand sent to head office for 50 semifold beds, infusion pumps, e-pep machines and 250 nubilizers
चरखी दादरी। कोरोना की आशंकित तीसरी लहर से निपटने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू करते हुए आवश्यक संसाधनों की मांग हेड ऑफिस भेजी है। इसमें इंफ्यूजन पंप, सी-पेप मशीन, सेमिफोल्ड बेड और बच्चों के प्लस ऑक्सीमीटर शामिल हैं। इनमें से कई उपकरण तो ऐसे हैं जो बेहद आवश्यक हैं और फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के पास इनमें से एक भी नहीं है। इसके साथ ही कोरोना की आशंकित तीसरी लहर की चपेट में बच्चों के आने की आशंका के मद्देनजर सिविल अस्पताल के प्रथम तल पर स्थित बाल-शिशु नर्सरी को विभाग तैयार करेगा।
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आशंकित तीसरी लहर से निपटने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की भारी कमी है। जिले में न तो बाल रोग विशेषज्ञ है और न ही बच्चों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद उपचार के लिए पुख्ता संसाधन हैं। डीसी के निर्देशों पर ही संसाधनों की सूची तैयार कर हेड ऑफिस भेजी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार बच्चों के लिए 250 नुबेलाइजर, 50 सेमिफोल्ड बेड, 50 इंफ्यूजन पंप, 20 इंफेंट वॉर्मर, प्लस ऑक्सीमीटर और वेंटिलेटर की मांग भेजी जा चुकी है। जल्द ही ये संसाधन जिला स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचने की उम्मीद है। इसके मद्देनजर दूसरी लहर में आईसीयू में तबदील की गई बाल-शिशु नर्सरी को विभाग ने बच्चों के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा भी स्वास्थ्य विभाग ने कुछ अन्य संसाधनों की खरीद की मांग भी हेड ऑफिस भेजी है।
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दूसरी लहर का प्रकोप हुआ कम
जिले में अब कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप काफी कम हो चुका है और गिने-चुने पॉजिटिव केस ही अब सामने आ रहे हैं। वहीं, दूसरी लहर से पार पाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग का फोकस तीसरी लहर पर है और इसके मद्देनजर विभाग तैयारियों में जुटा है। दूसरी लहर की अगर बात करें तो जिले में 100 से अधिक मौतें हुई हैं, जबकि साढ़े तीन हजार संक्रमित मिले हैं।
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जानिए....कौन-सा उपकरण किस स्थिति में आता है काम
1- इंफ्यूजन पंप - इसके जरिये बच्चों को निर्धारित मात्रा में ही दवा दी जा सकती है। यह क्षमता समय के हिसाब से तय की जा सकती है।
2-ई-पेप मशीन - यह मास्क की तरह होती है। अगर किसी बच्चे को सांस लेने में अगर थोड़ी तकलीफ होती है तो उस स्थिति में ई-पेप मशीन इस्तेमाल की जाती है।
3- सेमिफोल्ड बेड:- सिविल अस्पताल स्थित बाल-शिशु नर्सरी में बच्चों के लिए एक भी सेमिफोल्ड बेड नहीं है। यह कम जगह घेरता है और इसे ऊपर नीचे भी किया जा सकता है।
बाल रोग विशेषज्ञ की जिले को खल रही सबसे अधिक कमी
जिले में बच्चों की संख्या एक लाख से अधिक है, लेकिन सरकार अब तक जिले को एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं दे पाई है। इसके चलते जिले के लोग बच्चों के उपचार के लिए निजी अस्पतालों पर जाकर जेब ढीली करने को विवश हैं। जिले में पिछले लंबे समय से बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। हाल ही में विभाग ने दो बाल रोग विशेषज्ञ तैनात करने की मांग भी की है।
कोरोना की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर हम हेड ऑफिस मांग भेज चुके हैं। जल्द ही ये संसाधन हमारे पास पहुंच जाएंगे। कोरोना की अगली लहर में बच्चों के अधिक चपेट में आने का अंदेशा है और इसी के मद्देनजर बाल-शिशु नर्सरी में हम पुख्ता प्रबंध करने में जुटे हैं।

डॉक्टर नरेश कुमार, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी
जिला स्वास्थ्य विभाग को तीसरी लहर के मद्देनजर तैयारियां शुरू करने के आदेश दिए जा चुके हैं। प्रशासन अपने स्तर पर भी सरकार को बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए लिख चुका है। जल्द से जल्द तमाम व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी।
अमरजीत सिंह मान, डीसी।
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