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Charkhi Dadri News: स्वतंत्रता सेनानियों के पुत्र-पुत्रियों और दोहता-दोहतियों को सरकारी नौकरियों में मिले दो प्रतिशत आरक्षण
Mon, 22 Jan 2024 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 22 Jan 2024 11:37 PM IST
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चरखी दादरी। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर जिले के स्वतंत्रता सेनानियों ने सरकार से उनके पुत्र-पुत्रियों और दोहता-दोहतियों के लिए सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की है। स्वतंत्रता सेनानियों के बेटा-बेटियों को 60 साल की आयु पर सम्मान के तौर पर पेंशन का प्रावधान करने की मांग भी सरकार से की गई है।
गांव अचीना निवासी स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन श्योकरण के बेटे उमेद सिंह, गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद के बेटे सुरेंद्र सिंह का कहना कि भजनलाल सरकार के समय स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण मिलता था। बाद में यह आरक्षण बंद कर दिया गया। अब सरकार को आरक्षण की सुविधा फिर से बहाल करनी चाहिए।
इसी प्रकार गांव बलकरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी सुधनराम, अटेला निवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान सिंह ने भी आजाद हिंद फौज में रहकर देश को आजाद कराया। इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को ताम्रपत्र सम्मान प्राप्त है।
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वर्ष 1934 में सेना में भर्ती हुए थे श्योकरण
नंबरदार उमेद सिंह ने बताया कि चरखी दादरी के स्वतंत्रता सेनानियों का आजादी की लड़ाई में सराहनीय योगदान रहा है। उनके पिता श्योकरण 1934 में सेना में भर्ती हुए थे। वह वर्ष 1941 में आजादी फौज में शामिल हुए। वे सिंगापुर और मुल्तान जेल में करीब तीन साल रहे। वे अरकाना फ्रंट के कमांडर थे। सुभाष चंद्र बोस की सेना में 60,000 जवान थे जिन्होंने अंग्रेजों से देश को आजाद कराया।
आजाद हिंद फौज के प्रभाव के कारण इटली, जापान चीन, जर्मनी, स्वीडन सहित नौ देशों ने भारत को आजाद करने पर अपनी सहमति एवं समर्थन दिया था। इन देशों ने मान लिया था कि भारत हर तरह से आजादी के लिए सक्षम एवं लायक है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने तो 21 अक्तूबर 1943 को ही भारत देश की आजादी की घोषणा कर दी थी। उमेद सिंह का कहना है कि अगर आजाद हिंद फौज का गठन नहीं होता तो देश आजाद नहीं होता।
- भैरू सिंह और नानकचंद ने भी नेताजी के साथ मिलकर लड़ी थी लड़ाई
इसी प्रकार गांव ढाणी फौगाट निवासी भैरू सिंह ने भी नेताजी की फौज में रहते देश को आजाद करवाने के लिए सुुभाषचंद्र बोस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंंत्रता सेनानी नानकचंद के बेटे सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता देश की आजादी के लिए लड़ाई के दौरान कई बार जेल गए। भारत सरकार ने उनको ताम्रपत्र से सम्मानित किया।
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गांव अचीना निवासी स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन श्योकरण के बेटे उमेद सिंह, गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद के बेटे सुरेंद्र सिंह का कहना कि भजनलाल सरकार के समय स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण मिलता था। बाद में यह आरक्षण बंद कर दिया गया। अब सरकार को आरक्षण की सुविधा फिर से बहाल करनी चाहिए।
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इसी प्रकार गांव बलकरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी सुधनराम, अटेला निवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान सिंह ने भी आजाद हिंद फौज में रहकर देश को आजाद कराया। इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को ताम्रपत्र सम्मान प्राप्त है।
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वर्ष 1934 में सेना में भर्ती हुए थे श्योकरण
नंबरदार उमेद सिंह ने बताया कि चरखी दादरी के स्वतंत्रता सेनानियों का आजादी की लड़ाई में सराहनीय योगदान रहा है। उनके पिता श्योकरण 1934 में सेना में भर्ती हुए थे। वह वर्ष 1941 में आजादी फौज में शामिल हुए। वे सिंगापुर और मुल्तान जेल में करीब तीन साल रहे। वे अरकाना फ्रंट के कमांडर थे। सुभाष चंद्र बोस की सेना में 60,000 जवान थे जिन्होंने अंग्रेजों से देश को आजाद कराया।
आजाद हिंद फौज के प्रभाव के कारण इटली, जापान चीन, जर्मनी, स्वीडन सहित नौ देशों ने भारत को आजाद करने पर अपनी सहमति एवं समर्थन दिया था। इन देशों ने मान लिया था कि भारत हर तरह से आजादी के लिए सक्षम एवं लायक है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने तो 21 अक्तूबर 1943 को ही भारत देश की आजादी की घोषणा कर दी थी। उमेद सिंह का कहना है कि अगर आजाद हिंद फौज का गठन नहीं होता तो देश आजाद नहीं होता।
- भैरू सिंह और नानकचंद ने भी नेताजी के साथ मिलकर लड़ी थी लड़ाई
इसी प्रकार गांव ढाणी फौगाट निवासी भैरू सिंह ने भी नेताजी की फौज में रहते देश को आजाद करवाने के लिए सुुभाषचंद्र बोस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंंत्रता सेनानी नानकचंद के बेटे सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता देश की आजादी के लिए लड़ाई के दौरान कई बार जेल गए। भारत सरकार ने उनको ताम्रपत्र से सम्मानित किया।