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Charkhi Dadri News: डीएपी के संकट से किसान संगठनों में उबाल
Thu, 12 Jun 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 12 Jun 2025 01:07 AM IST
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पैक्स केंद्र बाढड़ा।
संवाद न्यूज एजेंसी
बाढड़ा। डीएपी की किल्लत से किसानों के लिए खरीफ सीजन की बाजरे की बिजाई के लिए समस्या पैदा हो गई है। किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल प्रभाव से डीएपी उपलब्ध करवाने की मांग की है।
मई माह में कपास की बिजाई के समय किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं हो सकी थी। अब बाजरे की बिजाई के दौर में भी यही हालात बने हुए हैं। कपास की फसल के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की ज्यादा जरूरत होती है। नाइट्रोजन तत्व पौधे की बढ़ोतरी व फास्फोरस पौधे की जड़ों व तना आदि की मजबूती और संपूर्ण विकास के लिए जरूरी होता है। डीएपी फास्फेटिक फर्टिलाइजर की श्रेणी में आती है। इसमें 46 प्रतिशत फॉस्फोरस पोषक तत्व होते हैं जबकि 18 प्रतिशत नाइट्रोजन है। कुछ हद तक डीएपी खाद नाइट्रोजन की भी पूर्ति करती है। इसलिए रेतीले क्षेत्र में डीएपी जरूरी होती है।
प्रदेश सरकार सरकारी खाद पैक्स समितियों को यूरिया व डीएपी उपलब्ध करवाती है। इस समय समिति कार्यालयों में खाद नहीं है। रेतीले क्षेत्र में ज्यादा तापमान को झेलने के लिए डीएपी नमी प्रदान करती है। पिछले सीजन में करीब 40 हजार एकड़ रकबे में कपास की बिजाई की गई थी। अबकी बार 20 हजार एकड़ भी नहीं छू पाया। कृषि विभाग भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए दलहन की फसलें बोने की सिफारिश कर रहा है।
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किसान अतर सिंह, सतपाल सिंह, रामफल श्योराण, सत्यनारायण शर्मा, धर्मेंद्र काकड़ौली, राजेश, अजय का कहना है कि प्रशासन क्षेत्र के किसानों के साथ हर क्षेत्र में सौतेला बर्ताव कर रहा है। गत रबी सीजन में किसानों को डीएपी व यूरिया पुलिस स्टेशनों में लंबी लाइनों में लगकर लेनी पड़ी थी। सांसद, विधायकों ने दावा किया था कि भविष्य में खाद की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी, वहीं, आज फिर से डीएपी व यूरिया संकट पैदा हो गया है। इस पर अब सभी जनप्रतिनिधि कोई कदम उठाने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं।
अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा व महासचिव ओमप्रकाश उमरवास ने बताया कि बाढड़ा, झोझूकलां, कादमा व बेरला में भी पैक्स समितियों के पास डीएपी नहीं है। सरकार किसानों के साथ हर मामले में मनमानी कर रही है। प्रशासन को किसानों की जरूरत के अनुसार डीएपी उपलब्ध करवानी चाहिए।
इस संबंध में सहकारी बैंक भिवानी के चेयरमैन सुधीर चांदवास ने बताया कि रेतीले क्षेत्र में किसान कम भूभाग में डीएपी प्रयोग करते हैं। उसके बावजूद जिला दादरी व भिवानी में बड़े स्तर पर डीएपी आपूर्ति की जा रही है। अकेले दादरी जिले में 4100 बैग डीएपी व 500 बैग एनपीके खाद दो दिन में किसानों को मिल जाएगी।
जिला कृषि विशेषज्ञ चंद्रभान ने बताया कि किसान को अब कृषि में सजगता बरतनी जरूरी है। जिले में डीएपी आपूर्ति शुरू है। परंपरागत खेती के दौर में जमीन की उपजाऊ शक्ति सुदृढ़ थी। भूमि में सभी फसलों के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद थे।
सघन खेती के शुरू होने के बाद साल में दो से तीन फसलें उगानी शुरू हुईं। इसका नतीजा ये निकला कि जमीन में पोषक तत्वों की कमी होती चली गई। प्रयोगशालाओं में मिट्टी की जांच से पता चला है कि भूमि में नाइट्रोजन, फास्फोरस व जिंक सल्फेट की कमी पाई गई है। किसानों से अपील है कि डीएपी की जगह एनपीके का चयन करें।
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बाढड़ा। डीएपी की किल्लत से किसानों के लिए खरीफ सीजन की बाजरे की बिजाई के लिए समस्या पैदा हो गई है। किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल प्रभाव से डीएपी उपलब्ध करवाने की मांग की है।
मई माह में कपास की बिजाई के समय किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं हो सकी थी। अब बाजरे की बिजाई के दौर में भी यही हालात बने हुए हैं। कपास की फसल के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की ज्यादा जरूरत होती है। नाइट्रोजन तत्व पौधे की बढ़ोतरी व फास्फोरस पौधे की जड़ों व तना आदि की मजबूती और संपूर्ण विकास के लिए जरूरी होता है। डीएपी फास्फेटिक फर्टिलाइजर की श्रेणी में आती है। इसमें 46 प्रतिशत फॉस्फोरस पोषक तत्व होते हैं जबकि 18 प्रतिशत नाइट्रोजन है। कुछ हद तक डीएपी खाद नाइट्रोजन की भी पूर्ति करती है। इसलिए रेतीले क्षेत्र में डीएपी जरूरी होती है।
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प्रदेश सरकार सरकारी खाद पैक्स समितियों को यूरिया व डीएपी उपलब्ध करवाती है। इस समय समिति कार्यालयों में खाद नहीं है। रेतीले क्षेत्र में ज्यादा तापमान को झेलने के लिए डीएपी नमी प्रदान करती है। पिछले सीजन में करीब 40 हजार एकड़ रकबे में कपास की बिजाई की गई थी। अबकी बार 20 हजार एकड़ भी नहीं छू पाया। कृषि विभाग भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए दलहन की फसलें बोने की सिफारिश कर रहा है।
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किसान अतर सिंह, सतपाल सिंह, रामफल श्योराण, सत्यनारायण शर्मा, धर्मेंद्र काकड़ौली, राजेश, अजय का कहना है कि प्रशासन क्षेत्र के किसानों के साथ हर क्षेत्र में सौतेला बर्ताव कर रहा है। गत रबी सीजन में किसानों को डीएपी व यूरिया पुलिस स्टेशनों में लंबी लाइनों में लगकर लेनी पड़ी थी। सांसद, विधायकों ने दावा किया था कि भविष्य में खाद की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी, वहीं, आज फिर से डीएपी व यूरिया संकट पैदा हो गया है। इस पर अब सभी जनप्रतिनिधि कोई कदम उठाने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं।
अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा व महासचिव ओमप्रकाश उमरवास ने बताया कि बाढड़ा, झोझूकलां, कादमा व बेरला में भी पैक्स समितियों के पास डीएपी नहीं है। सरकार किसानों के साथ हर मामले में मनमानी कर रही है। प्रशासन को किसानों की जरूरत के अनुसार डीएपी उपलब्ध करवानी चाहिए।
इस संबंध में सहकारी बैंक भिवानी के चेयरमैन सुधीर चांदवास ने बताया कि रेतीले क्षेत्र में किसान कम भूभाग में डीएपी प्रयोग करते हैं। उसके बावजूद जिला दादरी व भिवानी में बड़े स्तर पर डीएपी आपूर्ति की जा रही है। अकेले दादरी जिले में 4100 बैग डीएपी व 500 बैग एनपीके खाद दो दिन में किसानों को मिल जाएगी।
जिला कृषि विशेषज्ञ चंद्रभान ने बताया कि किसान को अब कृषि में सजगता बरतनी जरूरी है। जिले में डीएपी आपूर्ति शुरू है। परंपरागत खेती के दौर में जमीन की उपजाऊ शक्ति सुदृढ़ थी। भूमि में सभी फसलों के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद थे।
सघन खेती के शुरू होने के बाद साल में दो से तीन फसलें उगानी शुरू हुईं। इसका नतीजा ये निकला कि जमीन में पोषक तत्वों की कमी होती चली गई। प्रयोगशालाओं में मिट्टी की जांच से पता चला है कि भूमि में नाइट्रोजन, फास्फोरस व जिंक सल्फेट की कमी पाई गई है। किसानों से अपील है कि डीएपी की जगह एनपीके का चयन करें।