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Charkhi Dadri News: क्रशर-माइनिंग जोन बंद, निर्माण कार्याें पर भी लगाई रोक
Sat, 04 Nov 2023 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 04 Nov 2023 12:03 AM IST
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दादरी शहर में छाया स्मॉग
चरखी दादरी। प्रदूषण के बढ़ते स्तर से सांसों पर संकट बना हुआ है। इसके मद्देनजर ग्रेप का तीसरा चरण लागू हो गया है। वहीं, दादरी जिला प्रशासन ने क्रशर व माइनिंग जोन को बंद करवा दिया है जबकि निर्माण कार्याें व भवन निर्माण सामग्री लेकर जाने वाले भारी वाहनों के आवागमन पर भी रोक लगा दी है। शुक्रवार को उपायुक्त मनदीप कौर ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए है।
उपायुक्त की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि गत 2 नवंबर को एनजीटी द्वारा दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिनके अनुसार दिल्ली व आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण ग्रेप के तीसरे स्तर पर पहुंच गया है। इस लिहाज से वायु प्रदूषण को रोकने और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने जरूरी हैं। एनजीटी के आदेशों की अनुपालन में लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए जिला में तुरंत प्रभाव से सभी स्टोन क्रशरों और माइनिंग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है और निर्माण सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों के आवागमन को भी बंद कर दिया है।
इतना ही नहीं, उपायुक्त ने सभी निर्माण गतिविधियों को भी बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। निर्माण सामग्री को भरने और उतारने पर भी पाबंदी लगाई गई है। इसके अलावा पेंटिग, पॉलिशिंग व वार्निशिंग गतिविधियां भी अब नहीं की जा सकेंगी। वहीं, सभी प्रकार की सड़कों के निर्माण और मरम्मत के कार्य भी बंद रहेंगे। साथ ही बैच मिक्स प्लांट के संचालन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। टाइल, पत्थर व फ्लोर से संबंधित सामग्री को काटने और लगाने पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा ग्राइंडिग, पिलिंग और वाटर प्रूफ्रिंग कार्य भी बंद रहेंगे।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की क्रशरों की बिजली आपूर्ति काटने की सिफारिश
वैसे तो जिला प्रशासन ने क्रशरों व माइनिंग जोन की गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी है, फिर भी एहतियात के तौर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी क्रशर व माइनिंग जोन की बिजली आपूर्ति काटने की सिफारिश बिजली निगम से की है। इस संबंध में बाकायदा निगम को पत्र भेजा जा चुका है।
9 माइनिंग जोन के 20 हजार श्रमिक हुए बेरोजगार
जिले में 9 माइनिंग जोन हैं जिनमें करीब 260 क्रशर संचालित हैं। जिले से निर्माण सामग्री लेकर प्रतिदिन करीब पांच हजार भारी वाहन जाते हैं। क्रशर व माइनिंग जोन से करीब 20 हजार श्रमिकों को काम मिला हुआ है और ज्यादातर श्रमिक प्रवासी हैं। अब इनके समक्ष खुद की रोजी-रोटी के साथ उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, बिहार और राजस्थान में रहने वाले परिवार के पालन-पोषण का संकट भी पैदा हो गया है।
शुक्रवार को भी हवा रही खराब
शुक्रवार की बात करें तो जिले में 351 एक्यूआई तक प्रदूषण का अधिकतम स्तर पहुंचा। वहीं, औसतन स्तर 239 एक्यूआई दर्ज किया गया। ओवरऑल स्थिति देखें तो हवा की स्थिति पांचवें दिन भी खराब रही।
पानी के छिड़काव के लिए नगर परिषद को लिखा पत्र
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर परिषद को पत्र लिखा है। एसडीओ नवनीत कुमार ने बताया कि पत्र के जरिये शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाने के लिए कहा गया है, ताकि धूल न उड़े। इसके अलावा 500 स्क्वेयर मीटर या इससे अधिक एरिया में चल रहे निर्माण कार्याें पर भी रोक लगाई गई है।
कचरे को आग लगाने से बाज नहीं आ रहे लोग
भले ही प्रशासन ने क्रशर व माइनिंग जोन की गतिविधियां बंद करवा दी हैं, लेकिन अब भी लोग लापरवाही बरतते हुए कचरे को आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। शुक्रवार को रावलधी-दिल्ली बाईपास पर एक जगह कचरे को आग लगाई गई और काफी देर तक उससे धुआं उठता रहा।
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उपायुक्त की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि गत 2 नवंबर को एनजीटी द्वारा दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिनके अनुसार दिल्ली व आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण ग्रेप के तीसरे स्तर पर पहुंच गया है। इस लिहाज से वायु प्रदूषण को रोकने और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने जरूरी हैं। एनजीटी के आदेशों की अनुपालन में लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए जिला में तुरंत प्रभाव से सभी स्टोन क्रशरों और माइनिंग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है और निर्माण सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों के आवागमन को भी बंद कर दिया है।
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इतना ही नहीं, उपायुक्त ने सभी निर्माण गतिविधियों को भी बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। निर्माण सामग्री को भरने और उतारने पर भी पाबंदी लगाई गई है। इसके अलावा पेंटिग, पॉलिशिंग व वार्निशिंग गतिविधियां भी अब नहीं की जा सकेंगी। वहीं, सभी प्रकार की सड़कों के निर्माण और मरम्मत के कार्य भी बंद रहेंगे। साथ ही बैच मिक्स प्लांट के संचालन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। टाइल, पत्थर व फ्लोर से संबंधित सामग्री को काटने और लगाने पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा ग्राइंडिग, पिलिंग और वाटर प्रूफ्रिंग कार्य भी बंद रहेंगे।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की क्रशरों की बिजली आपूर्ति काटने की सिफारिश
वैसे तो जिला प्रशासन ने क्रशरों व माइनिंग जोन की गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी है, फिर भी एहतियात के तौर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी क्रशर व माइनिंग जोन की बिजली आपूर्ति काटने की सिफारिश बिजली निगम से की है। इस संबंध में बाकायदा निगम को पत्र भेजा जा चुका है।
9 माइनिंग जोन के 20 हजार श्रमिक हुए बेरोजगार
जिले में 9 माइनिंग जोन हैं जिनमें करीब 260 क्रशर संचालित हैं। जिले से निर्माण सामग्री लेकर प्रतिदिन करीब पांच हजार भारी वाहन जाते हैं। क्रशर व माइनिंग जोन से करीब 20 हजार श्रमिकों को काम मिला हुआ है और ज्यादातर श्रमिक प्रवासी हैं। अब इनके समक्ष खुद की रोजी-रोटी के साथ उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, बिहार और राजस्थान में रहने वाले परिवार के पालन-पोषण का संकट भी पैदा हो गया है।
शुक्रवार को भी हवा रही खराब
शुक्रवार की बात करें तो जिले में 351 एक्यूआई तक प्रदूषण का अधिकतम स्तर पहुंचा। वहीं, औसतन स्तर 239 एक्यूआई दर्ज किया गया। ओवरऑल स्थिति देखें तो हवा की स्थिति पांचवें दिन भी खराब रही।
पानी के छिड़काव के लिए नगर परिषद को लिखा पत्र
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर परिषद को पत्र लिखा है। एसडीओ नवनीत कुमार ने बताया कि पत्र के जरिये शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाने के लिए कहा गया है, ताकि धूल न उड़े। इसके अलावा 500 स्क्वेयर मीटर या इससे अधिक एरिया में चल रहे निर्माण कार्याें पर भी रोक लगाई गई है।
कचरे को आग लगाने से बाज नहीं आ रहे लोग
भले ही प्रशासन ने क्रशर व माइनिंग जोन की गतिविधियां बंद करवा दी हैं, लेकिन अब भी लोग लापरवाही बरतते हुए कचरे को आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। शुक्रवार को रावलधी-दिल्ली बाईपास पर एक जगह कचरे को आग लगाई गई और काफी देर तक उससे धुआं उठता रहा।