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Charkhi Dadri News: अस्पताल की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग का सख्त रुख, रिफंड और मुआवजा देने के दिए आदेश

Mon, 04 May 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 04 May 2026 11:40 PM IST
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Consumer Commission takes strict stance on hospital negligence, orders refund and compensation
चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चिकित्सा सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार के एक मामले में भिवानी के एक निजी अस्पताल के चिकित्सक के खिलाफ फैसला दिया है। आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने चिकित्सक को आदेश दिया कि वे शिकायतकर्ताओं को उपचार की राशि लौटाने के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भी भरें।
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यह था मामला
गांव हंसावास कलां निवासी शिकायतकर्ता रामनिवास और उसकी पत्नी कृष्णा मार्च 2022 में एक वाहन दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि एंबुलेंस चालक उन्हें रोहतक पीजीआई ले जाने के बजाय भिवानी स्थित एक निजी अस्पताल में ले गया। शिकायतकर्ताओं ने आयोग को बताया कि अस्पताल में उसकी पत्नी को 11 दिनों तक भर्ती रखा गया लेकिन उनकी चोटों का उचित उपचार करने के स्थान पर अनावश्यक और महंगे टेस्ट किए गए। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ताओं के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उन्हें कैशलेस उपचार की सुविधा नहीं दी गई और उनसे उपचार के नाम पर काफी रुपये वसूले गए।
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आयोग ने पाया कि अस्पताल ने इलाज के लिए 1,99,370 रुपये के बिल जारी किए थे, जबकि शिकायतकर्ताओं ने करीब 3 लाख 80 हजार रुपये वसूलने का आरोप लगाया था। डिस्ट्रिक्ट मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड की जांच रिपोर्ट ने भी अस्पताल के उपचार में खामियों और लापरवाही की पुष्टि की।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करना और पारदर्शी बिलिंग न करना सेवा में कमी है। निर्णय में आयोग ने चिकित्सक को निर्देश दिए कि वे शिकायतकर्ताओं को बिल की राशि 1,99,370 रुपये वापस करें। साथ ही मानसिक पीड़ा और शारीरिक कष्ट के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने के आदेश भी दिए। आयोग ने यह भी कहा कि यदि 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो इस पर नौ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देय होगा। इस मामले में एम्बुलेंस मालिक के खिलाफ कोई ठोस सबूत न मिलने से उसके विरुद्ध शिकायत को खारिज कर दिया गया।
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