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चित्रकारी से सफाईकर्मी तिलकराज को मिली अलग पहचान, पेड़ों पर बनाई पेंटिंग का हर कोई मुरीद
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नंदीशाला के सामने पेड़ पर बनाई गई गोवंश की पेटिंग के साथ चित्रकार तिलकराज।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। नवसृजन की लहर जब उठे तो कहीं न कहीं रचनात्मक पहल अवश्य होती है। शहर की नंदीशाला के समीप के विशाल वृक्ष इन दिनों एक नए रंग रूप में दिखाई दे रहे हैं, जो कि आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
आमतौर पर ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर, प्रयागराज, वृंदावन, बिहार का मैथिली और पाश्चात्य देशों में सड़कों, दीवारों, पुल, रेलवे स्टेशन, पेड़ और सार्वजनिक स्थानों पर की गई कलात्मक चित्रकारी राह चलते लोगों का मन अपनी ओर खींच लेतीं हैं। अब यही कलाकारी दादरी शहर में भी नजर आ रही है। नगर परिषद के सफाई कर्मचारी तिलकराज ने अपने मनोभावों को सुंदर रूप प्रदान करते हुए वृक्षों के तनों व टहनियों पर रंगों से उकेरा है। उनके बनाए चित्र देखकर लगता है कि यह काम बाहर से बुलाए माहिर रंगकर्मी से करवाया गया है। किंतु इसे अंजाम दिया है एक गुमनाम कलाकार ने, जिसकी पहचान केवल सफाईकर्मी तिलकराज तक ही सीमित थी।
कुछ ही लोग जानते थे कि वाल्मीकि बस्ती में रहने वाला तिलकराज पेंटिंग भी कर लेता है। यही सोचकर नगर परिषद में उससे कुछ स्लोगन बोर्ड आदि बनवाए गए थे। फिर एक दिन नगर परिषद सचिव प्रशांत पाराशर ने नंदीशाला के आस-पास खड़े नीम, पीपल, बड़ आदि के वृक्षों को देखा तो उन्हें ख्याल आया कि इन पर उभरी हुई आकृतियों को रंग से एक अलग रूप दिया जा सकता है। नगरपरिषद चेयरमैन संजय छपारिया ने भी प्रशांत पाराशर के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए यह कार्य तिलकराज को सौंप दिया।
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वाटरकलर से बनाईं जानवरों की कलाकृतियां
तिलकराज ने बाजार से वाटरकलर मंगवाए और उनसे गाय, हाथी, ऊंट, बंदर आदि की शानदार चित्रकारी की। कोरोना महामारी के दौर में ये चित्र देखकर मन भी कुछ हल्का हो जाता है। इन चित्रों के बनाए जाने के बाद नंदीशाला में आने वाले गोसेवकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है।
अन्य जगहों पर बनवाएंगे तस्वीरें
नगर परिषद सचिव प्रशांत पाराशर ने बताया कि भविष्य में तिलकराज से दादरी शहर के रोजगार्डन, रेस्ट हाऊस, कोर्ट परिसर में भी ये तस्वीरें बनवाई जाएंगी। नप चेयरमैन संजय छपारिया ने कहा कि कर्मचारी तिलकराज को जल्दी ही परिषद की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
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आमतौर पर ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर, प्रयागराज, वृंदावन, बिहार का मैथिली और पाश्चात्य देशों में सड़कों, दीवारों, पुल, रेलवे स्टेशन, पेड़ और सार्वजनिक स्थानों पर की गई कलात्मक चित्रकारी राह चलते लोगों का मन अपनी ओर खींच लेतीं हैं। अब यही कलाकारी दादरी शहर में भी नजर आ रही है। नगर परिषद के सफाई कर्मचारी तिलकराज ने अपने मनोभावों को सुंदर रूप प्रदान करते हुए वृक्षों के तनों व टहनियों पर रंगों से उकेरा है। उनके बनाए चित्र देखकर लगता है कि यह काम बाहर से बुलाए माहिर रंगकर्मी से करवाया गया है। किंतु इसे अंजाम दिया है एक गुमनाम कलाकार ने, जिसकी पहचान केवल सफाईकर्मी तिलकराज तक ही सीमित थी।
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कुछ ही लोग जानते थे कि वाल्मीकि बस्ती में रहने वाला तिलकराज पेंटिंग भी कर लेता है। यही सोचकर नगर परिषद में उससे कुछ स्लोगन बोर्ड आदि बनवाए गए थे। फिर एक दिन नगर परिषद सचिव प्रशांत पाराशर ने नंदीशाला के आस-पास खड़े नीम, पीपल, बड़ आदि के वृक्षों को देखा तो उन्हें ख्याल आया कि इन पर उभरी हुई आकृतियों को रंग से एक अलग रूप दिया जा सकता है। नगरपरिषद चेयरमैन संजय छपारिया ने भी प्रशांत पाराशर के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए यह कार्य तिलकराज को सौंप दिया।
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वाटरकलर से बनाईं जानवरों की कलाकृतियां
तिलकराज ने बाजार से वाटरकलर मंगवाए और उनसे गाय, हाथी, ऊंट, बंदर आदि की शानदार चित्रकारी की। कोरोना महामारी के दौर में ये चित्र देखकर मन भी कुछ हल्का हो जाता है। इन चित्रों के बनाए जाने के बाद नंदीशाला में आने वाले गोसेवकों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है।
अन्य जगहों पर बनवाएंगे तस्वीरें
नगर परिषद सचिव प्रशांत पाराशर ने बताया कि भविष्य में तिलकराज से दादरी शहर के रोजगार्डन, रेस्ट हाऊस, कोर्ट परिसर में भी ये तस्वीरें बनवाई जाएंगी। नप चेयरमैन संजय छपारिया ने कहा कि कर्मचारी तिलकराज को जल्दी ही परिषद की ओर से सम्मानित किया जाएगा।