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नौनिहाल कैसे रहे तंदरुस्त... जब 83 आंगनबाड़ी केंद्र ही ‘बीमार’
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वार्ड-11 के आंगनबाड़ी केंद्र में भरा पानी।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। एकतरफ सरकार प्रदेश में 4000 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल में बदलने की योजना पर काम कर रही है तो दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों पर जगह, संसाधनों और बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा अभी बरकरार है। इस समय जिले के 83 आंगनबाड़ी केंद्र ‘बीमार’ हैं। इनमें से 61 में तो पानी और बिजली का कनेक्शन नहीं है, जबकि 22 शौचालयों की कमी का दंश झेल रहे हैं। ऐसे में यहां पढ़ने वाले बच्चों के अलावा कार्यरत महिला स्टाफ को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि जिले में इस समय 228 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं।
जिले में 634 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 93 को सरकार प्ले स्कूल में अपग्रेड करने को मंजूरी दे चुकी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुछ और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी प्ले स्कूल में अपग्रेड करवाने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। जिले में 621 आंगनबाड़ी केंद्र गांवों में जबकि 23 शहर में हैं। शुक्रवार को संवाददाता ने इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान सामने आया कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में तो शौचालय, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यहां तैनात स्टाफ पड़ोस में बने घरों का शौचालय इस्तेमाल करने को विवश है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और जल्द ही इन खामियों को दूर करवाया जाएगा।
कहीं एक कमरे में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र तो कहीं परिसर में भरा सीवर का दूषित पानी
केस -1 : संवाददाता बुधवार सुबह वार्ड-11 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा। यहां आंगनबाड़ी केंद्र एक धर्मशाला में चल रहा है, जिसमें पहले बारिश का पानी भरा था और अब सीवर का दूषित पानी भरा हुआ है। दूषित पानी भरने से आंगनबाड़ी केंद्र बंद है।
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केस:2- संवाददाता ने वार्ड-12 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा लिया। यह केंद्र भी किराये के भवन में चल रहा है और इसके शौचालय की छत जर्जर हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार लंबे समय से छत की मरम्मत की दरकार है, लेकिन अब तक दशा नहीं सुधारी गई है।
केस:3- रविदास नगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहा है। आंगनबाड़ी वर्कर अनिल श्योराण ने बताया कि इसका किराया भी वे अपनी जेब से दे रही हैं, जबकि कोई बिल पास नहीं होता। यहां एक हॉल व एक कमरे समेत शौचालय का प्रबंध है।
केस:4- वार्ड-10 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तो सिर्फ एक कमरे में चल रहा है। राशन से लेकर बच्चों के बैठने की कुर्सियां और खिलौने भी यहीं रखे हैं। इस केंद्र में शौचालय और पानी का प्रबंध नहीं है। आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर अपने स्तर पर प्रबंध करने को विवश हैं।
इन आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए हम प्रयासरत हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को लिख चुके हैं। जगह की कमी के कारण आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं।
गीता सहारण, सीडीपीओ
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जिले में 634 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 93 को सरकार प्ले स्कूल में अपग्रेड करने को मंजूरी दे चुकी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुछ और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी प्ले स्कूल में अपग्रेड करवाने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। जिले में 621 आंगनबाड़ी केंद्र गांवों में जबकि 23 शहर में हैं। शुक्रवार को संवाददाता ने इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान सामने आया कि कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में तो शौचालय, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यहां तैनात स्टाफ पड़ोस में बने घरों का शौचालय इस्तेमाल करने को विवश है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और जल्द ही इन खामियों को दूर करवाया जाएगा।
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कहीं एक कमरे में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र तो कहीं परिसर में भरा सीवर का दूषित पानी
केस -1 : संवाददाता बुधवार सुबह वार्ड-11 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा। यहां आंगनबाड़ी केंद्र एक धर्मशाला में चल रहा है, जिसमें पहले बारिश का पानी भरा था और अब सीवर का दूषित पानी भरा हुआ है। दूषित पानी भरने से आंगनबाड़ी केंद्र बंद है।
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केस:2- संवाददाता ने वार्ड-12 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा लिया। यह केंद्र भी किराये के भवन में चल रहा है और इसके शौचालय की छत जर्जर हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार लंबे समय से छत की मरम्मत की दरकार है, लेकिन अब तक दशा नहीं सुधारी गई है।
केस:3- रविदास नगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहा है। आंगनबाड़ी वर्कर अनिल श्योराण ने बताया कि इसका किराया भी वे अपनी जेब से दे रही हैं, जबकि कोई बिल पास नहीं होता। यहां एक हॉल व एक कमरे समेत शौचालय का प्रबंध है।
केस:4- वार्ड-10 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तो सिर्फ एक कमरे में चल रहा है। राशन से लेकर बच्चों के बैठने की कुर्सियां और खिलौने भी यहीं रखे हैं। इस केंद्र में शौचालय और पानी का प्रबंध नहीं है। आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर अपने स्तर पर प्रबंध करने को विवश हैं।
इन आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए हम प्रयासरत हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को लिख चुके हैं। जगह की कमी के कारण आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं।
गीता सहारण, सीडीपीओ

वार्ड-12 आंगनबाड़ी केंद्र में टूटी शौचालय की छत।- फोटो : CharkhiDadri