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सॉफ्टवेयर या एप को इंस्टाल करने से पहले परखें विश्वसनीयता: एसपी दीपक गहलावत
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सॉफ्टवेयर या एप को इंस्टाल करने से पहले परखें विश्वसनीयता : एसपी दीपक गहलावत
चरखी दादरी। लोगों को साइबर ठगी से बचाने के लिए जिला पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत ने बताया कि स्मार्टफोन प्रयोग करने वाले साइबर ठगी के सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल में कोई भी एप या सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने से पहले विश्वसनीयता परखना बेहद जरूरी है। शुरुआती चरण में सतर्कता बरतकर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नकली एप या सॉफ्टवेयर साइबर अपराधियों द्वारा डाटा चोरी करने के लिए बनाए जाते हैं। इनका लुक और फंक्शन बिल्कुल असली एप व सॉफ्टवेयर की तरह बनाए जाते हैं, जिनमें केवल नाममात्र अंतर होता है, जिनकी पहचान आसान नहीं होती। अगर कोई इन नकली एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड कर लेता है तो यह डाटा तक पहुंचने के लिए अनुमति का अनुरोध करते हैं और एक क्लिक करते ही सारी जानकारी उन तक पहुंच जाती है और फिर वो ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं।
यूं करें नकली एप और सॉफ्टवेयर की पहचान
1. किसी एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले उसकी जारी होने की तारीख की जांच कर लें। अगर कोई नई एप थोडे समय में ज्यादा लोगों द्वारा डाउनलोड की गई है तो यह एक नकली एप होने का संकेत हो सकता है।
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2. किसी एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर के बारे में शोध करने के लिए अतिरिक्त समय लें। इस तरह की जानकारी आप गूगल पर खोज सकते हैं जिससे पता चल जाता है कि यह विश्वसनीय है या नहीं।
3- नकली एप या सॉफ्टवेयर डेवलपर्स नकली एप को उसकी एप के जैसा दिखने वाला बनाते है, इसलिए किसी एप को डाउनलोड करने से पहले प्रत्येक अक्षर को ध्यान से पढेे़ और किसी भी गलत वर्तनी की तलाश करें।
4. नकली एप आपके डाटा संबंधी ज्यादा परमिशन मांगते है जिसकी वास्तव में जरुरत नहीं होती है। कोई भी परमिशन देने से पहले उसकी आवश्यकता है या नहीं उसकी जांच कर लें।
5. अपने डिवाइस में सॉफ्टवेयर अपडेट केवल अपनी डिवाइस की सेटिंग से ही करें। कोई भी संदिग्ध वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफार्म या आपके सिस्टम को अपडेट करने का वादा करने वाली एप से भी अपनी डिवाइस को अपडेट न करें।
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चरखी दादरी। लोगों को साइबर ठगी से बचाने के लिए जिला पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधीक्षक दीपक गहलावत ने बताया कि स्मार्टफोन प्रयोग करने वाले साइबर ठगी के सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल में कोई भी एप या सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने से पहले विश्वसनीयता परखना बेहद जरूरी है। शुरुआती चरण में सतर्कता बरतकर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नकली एप या सॉफ्टवेयर साइबर अपराधियों द्वारा डाटा चोरी करने के लिए बनाए जाते हैं। इनका लुक और फंक्शन बिल्कुल असली एप व सॉफ्टवेयर की तरह बनाए जाते हैं, जिनमें केवल नाममात्र अंतर होता है, जिनकी पहचान आसान नहीं होती। अगर कोई इन नकली एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड कर लेता है तो यह डाटा तक पहुंचने के लिए अनुमति का अनुरोध करते हैं और एक क्लिक करते ही सारी जानकारी उन तक पहुंच जाती है और फिर वो ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं।
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यूं करें नकली एप और सॉफ्टवेयर की पहचान
1. किसी एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले उसकी जारी होने की तारीख की जांच कर लें। अगर कोई नई एप थोडे समय में ज्यादा लोगों द्वारा डाउनलोड की गई है तो यह एक नकली एप होने का संकेत हो सकता है।
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2. किसी एप या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर के बारे में शोध करने के लिए अतिरिक्त समय लें। इस तरह की जानकारी आप गूगल पर खोज सकते हैं जिससे पता चल जाता है कि यह विश्वसनीय है या नहीं।
3- नकली एप या सॉफ्टवेयर डेवलपर्स नकली एप को उसकी एप के जैसा दिखने वाला बनाते है, इसलिए किसी एप को डाउनलोड करने से पहले प्रत्येक अक्षर को ध्यान से पढेे़ और किसी भी गलत वर्तनी की तलाश करें।
4. नकली एप आपके डाटा संबंधी ज्यादा परमिशन मांगते है जिसकी वास्तव में जरुरत नहीं होती है। कोई भी परमिशन देने से पहले उसकी आवश्यकता है या नहीं उसकी जांच कर लें।
5. अपने डिवाइस में सॉफ्टवेयर अपडेट केवल अपनी डिवाइस की सेटिंग से ही करें। कोई भी संदिग्ध वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफार्म या आपके सिस्टम को अपडेट करने का वादा करने वाली एप से भी अपनी डिवाइस को अपडेट न करें।
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