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स्वतंत्रता सेनानी सुमेर सिंह के लिए राष्ट्रपति ने भेजे अंग वस्त्र

Mon, 10 Aug 2020 10:57 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2020 10:57 PM IST
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आजाद हिंद फौज के सिपाही सुमेर सिंह को राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए अंग वस्त्र और शॉल भेंट करते उपाय - फोटो : CharkhiDadri
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग लड़ने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानी सुमेर सिंह को उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा ने सोमवार को घर जाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की ओर से भेजे गए अंगवस्त्र और शॉल भेंट की गई। इस मौके पर बाढड़ा के एसडीएम प्रीतपाल सिंह व तहसीलदार नरेश कुमार भी उपस्थित रहे।
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गांव बडेसरा निवासी सुमेर सिंह लगभग 100 वर्ष के हैं और आज भी उनके मन में राष्ट्रभक्ति का जज्बा और देश सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है। उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा ने राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए अंग वस्त्र और शॉल भेंट कर आजाद हिंद फौज के सिपाही सुमेर सिंह का सम्मान किया। उन्होंने बुजुर्ग सुमेर सिंह को दीर्घायु व स्वस्थ जीवन के लिए शुभकामना दी। उन्होंने कहा कि उनका जीवन सदा प्रेरणादायी रहेगा। उनके जैसे वीर सिपाही की जीवन गाथा से युवा पीढ़ी को भी देश के लिए खुद को दांव पर लगा देने की प्रेरणा मिलती रहेगी।
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उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा ने सुमेर सिंह के परिवार से बातचीत की और उनके पौत्र मंजीत के अनुरोध पर उन्होंने सुमेर सिंह के नाम का बोर्ड घर के बाहर सड़क पर लगवाने का आश्वासन दिया। उपायुक्त ने इस बारे में एसडीमए प्रीतपाल सिंह को निर्देश दिए। इस अवसर पर जोगेंद्र, रामपाल, भगत सिंह आदि उपस्थित रहे।
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तोपखाना में थी तैनाती, सिंगापुर और बर्मा में लड़ी अंग्रेजों से लड़ाई
सुमेर सिंह इस समय दादरी जिला के एकमात्र आजाद हिंद फौज के जीवित सिपाही हैं। वे वर्ष 1940 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी नियुक्ति तोपखाना में थी और अपने समय में वह कबड्डी के कुशल खिलाड़ी रहे। जब सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी की जंग छेड़ने का एलान किया तो वे भी सेना की नौकरी छोड़कर नेताजी की आईएनए में शामिल हो गए। इस दौरान उनको जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने सिंगापुर और बर्मा में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
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