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अखाड़े से मैट चोरी मामले में दो कुश्ती कोच, तत्कालीन डीएसओ और एएसआई समेत पांच पर केस दर्ज
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खेल केंद्र जहां से कुश्ती मैट चोरी हुए हैं।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। ठाकुर बागला योग एवं खेल केंद्र से एक साल पहले चोरी हुए कुश्ती मैट के मामले में दो कुश्ती कोच, तत्कालीन जिला खेल अधिकारी और एएसआई समेत पांच लोगों पर सिटी थाना पुलिस ने केस दर्ज किया है। यह मामला कोर्ट के आदेशों पर दर्ज किया गया है।
सीजेएम कोर्ट में दायर की गई याचिका में रणधीर सिंह ने बताया था कि खेल विभाग ने खेल केंद्र को 72 पीस का फुल साइज मैट जारी किया था। छह अगस्त 2020 को मैट खेल केंद्र से चोरी हो गया था और इसकी शिकायत उसने सिटी थाने में दी थी। मामले की जांच एएसआई विजयपाल को सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ने 11 अगस्त 2020 को कोच रमेश कुमार के बयान दर्ज किए थे। रमेश ने बयान में बताया था कि उसने मैट खेल विभाग में जमा करवा दिया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि जब उसने खेल विभाग में जाकर पता किया तो सामने आया कि कोच रमेश कुमार ने कोई मैट विभाग में जमा नहीं करवाया है। इसके बाद उसने अपने स्तर पर पूछताछ की तो पता चला कि मैट को कोच रमेश कुमार और अन्य ने चोरी किया है। जब उसने कोच रमेश और तत्कालीन जिला खेल अधिकारी सुदेश कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने बताया मैट कोच रमेश के नाम से जारी है। रणधीर ने बताया इसके बाद उसने खेल विभाग से कोच रमेश को जारी हुए खेल सामान की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो जवाब मिला कि कोच रमेश को विभाग की ओर से कोई खेल सामान जारी नहीं किया गया है। आरटीआई के तहत उसे जानकारी मिली कि खेल केंद्र के लिए जो मैट जारी है वो भी उसी के नाम पर है। खेल केंद्र से मैट चोरी होने के मामले की जांच एएसआई विजयपाल ने की थी। कोर्ट में दायर की गई याचिका में विजयपाल पर झूठी जांच रिपोर्ट तैयार कर दफ्तर दाखिल करने का आरोप लगाया गया।
इन पांच लोगों पर दर्ज हुआ केस
मैट चोरी मामले में कोच रमेश कुमार, कोच विकास, तत्कालीन डीएसओ सुदेश, दिनेश और एएसआई विजयपाल पर केस दर्ज किया गया है। उन पर छह धाराओं के तहत केस दर्ज है जिनमें धमकी देने का भी आरोप है। मैट की कीमत एफआईआर के अनुसार करीब 80 हजार रुपये है।
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रणधीर की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज नहीं किया तो हमने उच्चाधिकारियों को शिकायत भी दी और अंत में कोर्ट में इस्तगासा दायर करनी पड़ी। कोर्ट ने माना कि इस मामले में एफआईआर होनी चाहिए थी और इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है। अब केस दर्ज हुआ है। एसआईटी या बड़े लेवल की एजेंसी इसकी जांच करे तो सही तथ्य सामने आएंगे।
संजीव तक्षक, याची पक्ष के वकील
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सीजेएम कोर्ट में दायर की गई याचिका में रणधीर सिंह ने बताया था कि खेल विभाग ने खेल केंद्र को 72 पीस का फुल साइज मैट जारी किया था। छह अगस्त 2020 को मैट खेल केंद्र से चोरी हो गया था और इसकी शिकायत उसने सिटी थाने में दी थी। मामले की जांच एएसआई विजयपाल को सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ने 11 अगस्त 2020 को कोच रमेश कुमार के बयान दर्ज किए थे। रमेश ने बयान में बताया था कि उसने मैट खेल विभाग में जमा करवा दिया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि जब उसने खेल विभाग में जाकर पता किया तो सामने आया कि कोच रमेश कुमार ने कोई मैट विभाग में जमा नहीं करवाया है। इसके बाद उसने अपने स्तर पर पूछताछ की तो पता चला कि मैट को कोच रमेश कुमार और अन्य ने चोरी किया है। जब उसने कोच रमेश और तत्कालीन जिला खेल अधिकारी सुदेश कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने बताया मैट कोच रमेश के नाम से जारी है। रणधीर ने बताया इसके बाद उसने खेल विभाग से कोच रमेश को जारी हुए खेल सामान की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो जवाब मिला कि कोच रमेश को विभाग की ओर से कोई खेल सामान जारी नहीं किया गया है। आरटीआई के तहत उसे जानकारी मिली कि खेल केंद्र के लिए जो मैट जारी है वो भी उसी के नाम पर है। खेल केंद्र से मैट चोरी होने के मामले की जांच एएसआई विजयपाल ने की थी। कोर्ट में दायर की गई याचिका में विजयपाल पर झूठी जांच रिपोर्ट तैयार कर दफ्तर दाखिल करने का आरोप लगाया गया।
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इन पांच लोगों पर दर्ज हुआ केस
मैट चोरी मामले में कोच रमेश कुमार, कोच विकास, तत्कालीन डीएसओ सुदेश, दिनेश और एएसआई विजयपाल पर केस दर्ज किया गया है। उन पर छह धाराओं के तहत केस दर्ज है जिनमें धमकी देने का भी आरोप है। मैट की कीमत एफआईआर के अनुसार करीब 80 हजार रुपये है।
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रणधीर की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज नहीं किया तो हमने उच्चाधिकारियों को शिकायत भी दी और अंत में कोर्ट में इस्तगासा दायर करनी पड़ी। कोर्ट ने माना कि इस मामले में एफआईआर होनी चाहिए थी और इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है। अब केस दर्ज हुआ है। एसआईटी या बड़े लेवल की एजेंसी इसकी जांच करे तो सही तथ्य सामने आएंगे।
संजीव तक्षक, याची पक्ष के वकील