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Charkhi Dadri News: थाने में ही जमा रहेंगी टोपीदार बंदूकें, लौटाने से प्रशासन का इन्कार
Tue, 02 Jul 2024 06:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 02 Jul 2024 06:28 AM IST
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टाेपीदार बंदूक
चरखी दादरी/बौंदकलां/बाढड़ा। थाने में जमा टोपीदार बंदूक वापस न मिलने पर खेतों में चौकीदारी करने वाले लोगों का समूह सोमवार को डीसी मनदीप कौर से मिला। उन्होंने कुछ माह पहले जमा करवाई टोपीदार बंदूक अन्य जिलों की तरह वापस दिलाने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने पूर्व में हुईं वारदातों का हवाला देकर ये बंदूकें जमा करवाने वालों को लौटाने से इन्कार कर दिया।
टोपीदार बंदूक जमा करवाने वालों में विभिन्न गांवों के लोग शामिल हुए। नरेंद्र कोहलावास और प्यारेलाल ने बताया कि जिले के थानों में करीब 100 टोपीदार बंदूकें जमा हैं। उन्होंने बताया कि पहले पूरे प्रदेश में टोपीदार बंदूकों का इस्तेमाल बंद करने की सूचना उन्हें मिली थी। इसलिए उन्होंने टोपीदार बंदूक पुलिस प्रशासन के पास जमा करवा दी थी।
प्रतिनिधिमंडल सदस्यों ने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों में जमा करवाई गई टोपीदार बंदूकें वापस दे दी गईं हैं, लेकिन दादरी प्रशासन ने यह बंदूकें नहीं लौटाईं हैं। उन्होंने बताया कि खेत में चौकीदारी करते समय वह यह बंदूक अपने पास रखते थे। अगर ये बंदूक उनके पास रहेगी तो वे रात के समय जंगली जानवरों से भी अपना बचाव कर सकेंगे।
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उन्होंने दावा किया कि जमा करवाई गई टोपीदार बंदूकों के लाइसेंस उनके पास हैं। लाइसेंस धारक समेसिंह, ऋषिकेश, आजाद, मंगतराम, चित्रपाल, मीर सिंह, रमेश कोहलावास, आजाद, मीठू सिंह, रमेश, सत्यवान और लक्ष्मण खातीवास आदि ने उपायुक्त से आदेश जारी कर बंदूकें वापस दिलवाने की मांग की लेकिन उपायुक्त ने बंदूकें जमा रखने की बात कही।
- प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे इन गांवों के लोग
उपायुक्त मनदीप कौर से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में खातीवास, उण, सांकरोड, बाढड़ा, कोहलावास, बास, नरसिंहवास, रावलधी और बौंद के लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि टोपीदार बंदूक पास न होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जंगली जानवरों के हमले का भी खतरा है।
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टोपीदार बंदूक जमा करवाने वालों में विभिन्न गांवों के लोग शामिल हुए। नरेंद्र कोहलावास और प्यारेलाल ने बताया कि जिले के थानों में करीब 100 टोपीदार बंदूकें जमा हैं। उन्होंने बताया कि पहले पूरे प्रदेश में टोपीदार बंदूकों का इस्तेमाल बंद करने की सूचना उन्हें मिली थी। इसलिए उन्होंने टोपीदार बंदूक पुलिस प्रशासन के पास जमा करवा दी थी।
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प्रतिनिधिमंडल सदस्यों ने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों में जमा करवाई गई टोपीदार बंदूकें वापस दे दी गईं हैं, लेकिन दादरी प्रशासन ने यह बंदूकें नहीं लौटाईं हैं। उन्होंने बताया कि खेत में चौकीदारी करते समय वह यह बंदूक अपने पास रखते थे। अगर ये बंदूक उनके पास रहेगी तो वे रात के समय जंगली जानवरों से भी अपना बचाव कर सकेंगे।
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उन्होंने दावा किया कि जमा करवाई गई टोपीदार बंदूकों के लाइसेंस उनके पास हैं। लाइसेंस धारक समेसिंह, ऋषिकेश, आजाद, मंगतराम, चित्रपाल, मीर सिंह, रमेश कोहलावास, आजाद, मीठू सिंह, रमेश, सत्यवान और लक्ष्मण खातीवास आदि ने उपायुक्त से आदेश जारी कर बंदूकें वापस दिलवाने की मांग की लेकिन उपायुक्त ने बंदूकें जमा रखने की बात कही।
- प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे इन गांवों के लोग
उपायुक्त मनदीप कौर से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में खातीवास, उण, सांकरोड, बाढड़ा, कोहलावास, बास, नरसिंहवास, रावलधी और बौंद के लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि टोपीदार बंदूक पास न होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जंगली जानवरों के हमले का भी खतरा है।