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Charkhi Dadri News: पहाड़ियों से चलीं गोलियां, हर तरफ था धुएं का गुबार...दादरी के 8 बच्चे अभी भी सदमे में
Wed, 02 Aug 2023 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 02 Aug 2023 01:20 AM IST
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अमित शर्मा।
चरखी दादरी। नूंह में सोमवार को हुई हिंसा को दादरी जिले के 55 लोगों ने अपनी आंखों से देखा। नूंह से अपना बचाव कर सोमवार रात तीन बजे दादरी पहुंचे यात्रा में शामिल कुछ लोगों ने मंगलवार को संवाददाता के समक्ष वहां का मंजर बयां किया। उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान पहाड़ियों से गोलियां चलीं जबकि हर तरफ उन्होंने धुएं के गुबार उठते देखे। उन्होंने कहा कि इतना भयानक मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। इस हिंसा के साक्षी बने जिले के आठ बच्चे अभी भी सदमे में हैं।
बता दें कि नूंह में सोमवार को ब्रजमंडल 84 कोस धार्मिक यात्रा में जिला से 55 लोगों ने भाग लिया था। इनमें 25 युवतियां, महिलाएं व बच्चों के अलावा 30 पुरुष शामिल हुए। यात्रा में शामिल हुए लोगों ने बताया कि चारों तरफ से चल रही गोलियों और बरसते पत्थर व पेट्रोल बम समेत जलते वाहनों से खुद को बचाना बड़ा संघर्षपूर्ण रहा।
जत्थे में शामिल लोगों ने बताया कि सोमवार सुबह जिले से एक बस में 55 लोग इस यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यह दल 12 बजे वहां पहुंच गया था। नलहड़ मंदिर नूंह के बाहर बस को खड़ी कर सभी यात्रा की तैयारियों में जुट गए। 1:30 बजे जब काफिला नलहड़ के नलेश्वर मंदिर से पूजा कर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने रवाना हुआ तो कुछ दूरी पर चलते ही वाहनों में लगी आग से धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इसके बाद तो माजरा समझते देर न लगी। इसके बाद चौराहे पर पहुंचे तो पत्थरबाजी शुरू हो गई। चारों ओर से पत्थर बस के शीशों से टकराने लगे। इसके बाद बस को वापस नलेश्वर मंदिर की तरफ मोड़ दिया। सड़कों पर पत्थर, वाहनों के टूटे शीशे बिखरे पड़े थे।
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जानिये... उस मंजर को लेकर किसने क्या दी प्रतिक्रिया
तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है मंदिर
नलेश्वर मंदिर परिसर तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। सभी महिलाओं एवं युवतियों के साथ बच्चों को मंदिर परिसर में सुरक्षित स्थान पर बैठाया गया। 250 से अधिक की उग्र भीड़ ने मंदिर के करीब 200 मीटर दूरी से फायरिंग पत्थरबाजी शुरू कर दी। वहीं, पहाड़ियों से भी लगातार पत्थर फेंके गए। उसी दौरान दो युवकों को गोलियां लगने से महिलाओं में चीख-पुकार मच गई।
-सीताराम कौशिक, जिला मंत्री, विश्व हिंदू परिषद
युवाओं की उग्र भीड़ ने वाहनों को कर दिया आग के हवाले
युवाओं ने हाथों में पत्थर, राइफल, पिस्टल, पेट्रोल की बोतलें ली हुई थी। वाहनों को लगातार वो आग लगा रहे थे। उग्र भीड़ मंदिर के करीब 200 मीटर ही दूर थी। मंदिर में ढाई घंटे के तांडव के बाद पुलिस के कुछ कर्मचारी पहुंचे तो लोगों ने भी राहत की सांस ली। पुलिस की उपस्थिति में भी पहाड़ियों से लगातार फायरिंग होती रही। छह बजे और पुलिस फोर्स वहां पहुंच गई और इसके जान में जान आई।
-अमित शर्मा, जिला संयोजक, बजरंग दल
बहुत सहम गए थे यात्रा में शामिल बच्चे
इस यात्रा में जिले से पहुंचे दल में छोटे बच्चे भी शामिल थे। 25 महिला, युवतियां व बच्चे भी इस यात्रा में भाग लेने पहुंचे थे। चारों तरफ से गोलियों व पत्थरबाजी की आवाज से बच्चे सहमे हुए थे। युवाओं ने सबसे पहले महिलाओं व बच्चों को सुरक्षित किया। उग्र भीड़ पहाड़ियों पर चढ़ी हुई थी। आखिर उनके पास हथियार होना बड़ी घटना को अंजाम देने की तरफ संकेत है। गनीमत रही की जिला से पहुंचे सभी दल के सदस्य सुरक्षित घर पहुंचे।
-परमिंद्र सांगवान, जिला संयोजक, बजरंग दल
चार-चार बसों के ग्रुप में पुलिस ने सुरक्षित निकाले लोग
युवाओं ने धैर्य से काम लेते हुए अधिक नुकसान नहीं होने दिया। छह बजे जब पुलिस के कर्मचारी काफी संख्या में पहुंचे और महिलाओं एवं बच्चों को पुलिस लाइन ले जाने का प्रयास किया तो एक बार फिर से उग्र भीड़ ने अंधाधुंध फायर व पत्थरबाजी शुरू कर दी। रात 10 बजे चार-चार बसों के ग्रुप बनाकर पुलिस की गाड़ियों के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। रात को करीब तीन बजे जिले में पहुंचे।
-राजरानी राजपूत, जिला संयोजिका मातृशक्ति
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बता दें कि नूंह में सोमवार को ब्रजमंडल 84 कोस धार्मिक यात्रा में जिला से 55 लोगों ने भाग लिया था। इनमें 25 युवतियां, महिलाएं व बच्चों के अलावा 30 पुरुष शामिल हुए। यात्रा में शामिल हुए लोगों ने बताया कि चारों तरफ से चल रही गोलियों और बरसते पत्थर व पेट्रोल बम समेत जलते वाहनों से खुद को बचाना बड़ा संघर्षपूर्ण रहा।
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जत्थे में शामिल लोगों ने बताया कि सोमवार सुबह जिले से एक बस में 55 लोग इस यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यह दल 12 बजे वहां पहुंच गया था। नलहड़ मंदिर नूंह के बाहर बस को खड़ी कर सभी यात्रा की तैयारियों में जुट गए। 1:30 बजे जब काफिला नलहड़ के नलेश्वर मंदिर से पूजा कर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने रवाना हुआ तो कुछ दूरी पर चलते ही वाहनों में लगी आग से धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इसके बाद तो माजरा समझते देर न लगी। इसके बाद चौराहे पर पहुंचे तो पत्थरबाजी शुरू हो गई। चारों ओर से पत्थर बस के शीशों से टकराने लगे। इसके बाद बस को वापस नलेश्वर मंदिर की तरफ मोड़ दिया। सड़कों पर पत्थर, वाहनों के टूटे शीशे बिखरे पड़े थे।
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तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है मंदिर
नलेश्वर मंदिर परिसर तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। सभी महिलाओं एवं युवतियों के साथ बच्चों को मंदिर परिसर में सुरक्षित स्थान पर बैठाया गया। 250 से अधिक की उग्र भीड़ ने मंदिर के करीब 200 मीटर दूरी से फायरिंग पत्थरबाजी शुरू कर दी। वहीं, पहाड़ियों से भी लगातार पत्थर फेंके गए। उसी दौरान दो युवकों को गोलियां लगने से महिलाओं में चीख-पुकार मच गई।
-सीताराम कौशिक, जिला मंत्री, विश्व हिंदू परिषद
युवाओं की उग्र भीड़ ने वाहनों को कर दिया आग के हवाले
युवाओं ने हाथों में पत्थर, राइफल, पिस्टल, पेट्रोल की बोतलें ली हुई थी। वाहनों को लगातार वो आग लगा रहे थे। उग्र भीड़ मंदिर के करीब 200 मीटर ही दूर थी। मंदिर में ढाई घंटे के तांडव के बाद पुलिस के कुछ कर्मचारी पहुंचे तो लोगों ने भी राहत की सांस ली। पुलिस की उपस्थिति में भी पहाड़ियों से लगातार फायरिंग होती रही। छह बजे और पुलिस फोर्स वहां पहुंच गई और इसके जान में जान आई।
-अमित शर्मा, जिला संयोजक, बजरंग दल
बहुत सहम गए थे यात्रा में शामिल बच्चे
इस यात्रा में जिले से पहुंचे दल में छोटे बच्चे भी शामिल थे। 25 महिला, युवतियां व बच्चे भी इस यात्रा में भाग लेने पहुंचे थे। चारों तरफ से गोलियों व पत्थरबाजी की आवाज से बच्चे सहमे हुए थे। युवाओं ने सबसे पहले महिलाओं व बच्चों को सुरक्षित किया। उग्र भीड़ पहाड़ियों पर चढ़ी हुई थी। आखिर उनके पास हथियार होना बड़ी घटना को अंजाम देने की तरफ संकेत है। गनीमत रही की जिला से पहुंचे सभी दल के सदस्य सुरक्षित घर पहुंचे।
-परमिंद्र सांगवान, जिला संयोजक, बजरंग दल
चार-चार बसों के ग्रुप में पुलिस ने सुरक्षित निकाले लोग
युवाओं ने धैर्य से काम लेते हुए अधिक नुकसान नहीं होने दिया। छह बजे जब पुलिस के कर्मचारी काफी संख्या में पहुंचे और महिलाओं एवं बच्चों को पुलिस लाइन ले जाने का प्रयास किया तो एक बार फिर से उग्र भीड़ ने अंधाधुंध फायर व पत्थरबाजी शुरू कर दी। रात 10 बजे चार-चार बसों के ग्रुप बनाकर पुलिस की गाड़ियों के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। रात को करीब तीन बजे जिले में पहुंचे।
-राजरानी राजपूत, जिला संयोजिका मातृशक्ति