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Charkhi Dadri News: दादरी में 33 केवीए क्षमता का बिजलीघर बनाने के लिए जमीन हस्तांतरित
Mon, 04 Mar 2024 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 04 Mar 2024 01:11 AM IST
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चरखी दादरी। शहर में रेलवे रोड पर 33 केवीए क्षमता का नया बिजलीघर बनाया जाएगा। इसके लिए एचवीएन ने डीएचबीवीएन को जमीन हस्तांतरित कर दी है। अब यहां पुराने भवन को तोड़कर यह निर्माण कार्य किया जाएगा। ये कवायद जल्द शुरू होगी। इसके लिए बिजली निगम ने एजेंसी को कार्यादेश जारी कर दिया है। यह निर्माण कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा होने से शहर की बिजली आपूर्ति में सुधार आएगा।
शहर के रेलवे रोड पर मुख्य सब स्टेशन पहले से ही बना है, लेकिन पिछले एक दशक में शहर का दायर काफी बढ़ गया है। आवासीय कॉलोनियां बढ़ी हैं। जिला बनने के बाद सरकारी कार्यालयों में भी बिजली की खपत बढ़ी है। मजबूरी में बिजली निगम अधिकारियों को शहर की कई कॉलोनियों में गांवों में बने बिजलीघरों से आपूर्ति करनी पड़ रही है। इससे लाइनों में फॉल्ट हो जाते हैं। लाइन में खराबी आने पर कई घंटे ठीक करने में लग जाते हैं जिससे उपभोक्ताओं को खासी परेशानी होती है।
इन क्षेत्रों के लोग उनकी कॉलोनियों में शहरी बिजली घर से ही बिजली आपूर्ति करने की मांग उठा चुके हैं। इसीलिए यहां 33 केवीए क्षमता का एक और बिजलीघर बनाने की मंजूरी मिली है। नए बिजलीघर के निर्माण से ही ये मांग पूरी हो सकेगी।
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इनसेट
- ये कॉलोनियां जुड़ी हैं गांव के बिजलीघर से
शहर के कॉलेज रोड, शंकर कॉलोनी, प्रेमनगर, दिल्ली रोड, ढाणी फाटक ओवरब्रिज और महेंद्रगढ़ रोड के क्षेत्र को गांव घसोला के बिजलीघर से जोड़ा गया है, जिससे बिजली आपूर्ति में व्यवधान बना रहता है। इन कॉलोनियों के उपभोक्ताओं का तर्क है कि वे शहर की दरों पर बिजली बिल जमा करते हैं जबकि आपूर्ति गांवों के फीडर से की जा रही है। गांवों से लंबी दूरी होने की वजह से लाइन में फॉल्ट अधिक आते हैं।
बिजलीघर बनाने के लिए एजेंसी को कार्यादेश जारी हो गया है। जमीन डीएचबीवीएन को सौंप दी गई है। यह काम दिसंबर 2024 तक पूरा होना है। कुछ पुराना भवन तोड़ा जाना है। उसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - बिजेंद्र लांबा, एसई, बिजली निगम (हिसार)
रानीला, गोठड़ा और मानकावास में बिजलीघर निर्माण कार्य शुरू
चरखी दादरी। जिले के गांव रानीला, गोठड़ा, मानकावास में 33 केवीए क्षमता के नए बिजलीघर बनाने के लिए बिजली निगम ने कंपनी को कार्यादेश जारी कर दिए हैं। एजेंसी ने बिजलीघरों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्य भी दिसंबर 2024 तक पूरा होगा। तीन बिजलीघर बनने से करीब 40 गांवों में आपूर्ति में सुधार हो सकेगा। कम वोल्टेज की समस्या से भी निजात मिल सकेगी।
जिला बनने के बाद बिजली की खपत भी बढ़ने लगी है। जिले में 90 फीडर हैं। इन पर 11,260 बिजली ट्रांसफार्मर लगे हैं। अकेले शहर में 2,160 ट्रांसफार्मर लगे हैं। आपूर्ति में सुधार के लिए बिजली निगम लगातार प्रयासरत है। बिजली निगम ने जिले को जगमग योजना में भी शामिल किया है। इस योजना पर भी काम तेजी से जारी है। जगमग योजना के तहत नए तार और 900 नए खंभे भी लगाए जा रहे हैं। लाइन लॉस कम करने के लिए भी बिजली निगम तेजी से काम कर रहा है। इसके तहत बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार छापे मारे जा रहे हैं।
एक सब स्टेशन की जगह डेढ़ एकड़
हर बिजलीघर करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर बनना है। इन तीन बिजली घरों के निर्माण से करीब 40 से अधिक गांवों में बिजली आपूर्ति में व्यापक सुधार आएगा। कम वोल्टेज की समस्या से भी छुटकारा मिल सकेगा। गांव रानीला की आबादी ज्यादा होने के कारण यहां लंबे समय से बिजलीघर निर्माण की जरूरत है। इससे सटा अचीना भी बड़ा गांव है। यह काम पूरा होने से गांव रानीला के लोगों को 22 से 24 घंटे बिजली मिलने की उम्मीद है।
इन तीनों बिजलीघरों का निर्माण कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी को कार्यादेश जारी कर दिया गया है। शुरुआत में बिजलीघर के लिए नींव तैयार की जा रही है। बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए निगम व्यापक स्तर पर काम कर रहा है। - बिजेंद्र लांबा, मुख्य अभियंता, बिजली निगम (हिसार)।
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शहर के रेलवे रोड पर मुख्य सब स्टेशन पहले से ही बना है, लेकिन पिछले एक दशक में शहर का दायर काफी बढ़ गया है। आवासीय कॉलोनियां बढ़ी हैं। जिला बनने के बाद सरकारी कार्यालयों में भी बिजली की खपत बढ़ी है। मजबूरी में बिजली निगम अधिकारियों को शहर की कई कॉलोनियों में गांवों में बने बिजलीघरों से आपूर्ति करनी पड़ रही है। इससे लाइनों में फॉल्ट हो जाते हैं। लाइन में खराबी आने पर कई घंटे ठीक करने में लग जाते हैं जिससे उपभोक्ताओं को खासी परेशानी होती है।
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इन क्षेत्रों के लोग उनकी कॉलोनियों में शहरी बिजली घर से ही बिजली आपूर्ति करने की मांग उठा चुके हैं। इसीलिए यहां 33 केवीए क्षमता का एक और बिजलीघर बनाने की मंजूरी मिली है। नए बिजलीघर के निर्माण से ही ये मांग पूरी हो सकेगी।
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- ये कॉलोनियां जुड़ी हैं गांव के बिजलीघर से
शहर के कॉलेज रोड, शंकर कॉलोनी, प्रेमनगर, दिल्ली रोड, ढाणी फाटक ओवरब्रिज और महेंद्रगढ़ रोड के क्षेत्र को गांव घसोला के बिजलीघर से जोड़ा गया है, जिससे बिजली आपूर्ति में व्यवधान बना रहता है। इन कॉलोनियों के उपभोक्ताओं का तर्क है कि वे शहर की दरों पर बिजली बिल जमा करते हैं जबकि आपूर्ति गांवों के फीडर से की जा रही है। गांवों से लंबी दूरी होने की वजह से लाइन में फॉल्ट अधिक आते हैं।
बिजलीघर बनाने के लिए एजेंसी को कार्यादेश जारी हो गया है। जमीन डीएचबीवीएन को सौंप दी गई है। यह काम दिसंबर 2024 तक पूरा होना है। कुछ पुराना भवन तोड़ा जाना है। उसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - बिजेंद्र लांबा, एसई, बिजली निगम (हिसार)
रानीला, गोठड़ा और मानकावास में बिजलीघर निर्माण कार्य शुरू
चरखी दादरी। जिले के गांव रानीला, गोठड़ा, मानकावास में 33 केवीए क्षमता के नए बिजलीघर बनाने के लिए बिजली निगम ने कंपनी को कार्यादेश जारी कर दिए हैं। एजेंसी ने बिजलीघरों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्य भी दिसंबर 2024 तक पूरा होगा। तीन बिजलीघर बनने से करीब 40 गांवों में आपूर्ति में सुधार हो सकेगा। कम वोल्टेज की समस्या से भी निजात मिल सकेगी।
जिला बनने के बाद बिजली की खपत भी बढ़ने लगी है। जिले में 90 फीडर हैं। इन पर 11,260 बिजली ट्रांसफार्मर लगे हैं। अकेले शहर में 2,160 ट्रांसफार्मर लगे हैं। आपूर्ति में सुधार के लिए बिजली निगम लगातार प्रयासरत है। बिजली निगम ने जिले को जगमग योजना में भी शामिल किया है। इस योजना पर भी काम तेजी से जारी है। जगमग योजना के तहत नए तार और 900 नए खंभे भी लगाए जा रहे हैं। लाइन लॉस कम करने के लिए भी बिजली निगम तेजी से काम कर रहा है। इसके तहत बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार छापे मारे जा रहे हैं।
एक सब स्टेशन की जगह डेढ़ एकड़
हर बिजलीघर करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर बनना है। इन तीन बिजली घरों के निर्माण से करीब 40 से अधिक गांवों में बिजली आपूर्ति में व्यापक सुधार आएगा। कम वोल्टेज की समस्या से भी छुटकारा मिल सकेगा। गांव रानीला की आबादी ज्यादा होने के कारण यहां लंबे समय से बिजलीघर निर्माण की जरूरत है। इससे सटा अचीना भी बड़ा गांव है। यह काम पूरा होने से गांव रानीला के लोगों को 22 से 24 घंटे बिजली मिलने की उम्मीद है।
इन तीनों बिजलीघरों का निर्माण कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी को कार्यादेश जारी कर दिया गया है। शुरुआत में बिजलीघर के लिए नींव तैयार की जा रही है। बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए निगम व्यापक स्तर पर काम कर रहा है। - बिजेंद्र लांबा, मुख्य अभियंता, बिजली निगम (हिसार)।