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राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए 31 से पहले करें आवेदन : डॉ. जसवंत
Fri, 09 Aug 2024 05:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 09 Aug 2024 05:46 AM IST
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26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाएंगे पुरस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए ऑनलाइन नामांकन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक पशुपालक 31 अगस्त तक राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन भेज सकते हैं। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डाॅ. जसवंत जून ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के प्रभावी विकास के लिए अथक प्रयास कर रहा है। ताकि, किसानों को स्थायी आजीविका प्रदान की जा सके। भारत की स्वदेशी गोजातीय नस्लें बहुत अच्छी हैं। उनमें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आनुवंशिक क्षमता मौजूद है। स्वदेशी गोजातीय नस्लों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और विकास करने के उद्देश्य से देश में पहली बार दिसंबर 2014 में राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) की शुरुआत की गई थी।
उन्होंने बताया कि आरजीएम के तहत, दूध उत्पादक किसानों, डेयरी सहकारी समितियों/एफपीओ और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों (एआईटी) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, इस विभाग ने 2024 के दौरान भी निम्नलिखित तीन श्रेणियों में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करना जारी रखा है। इसमें पंजीकृत स्वदेशी मवेशी, मुर्राह भैंस नस्लों को पालने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस)/दूध उत्पादक कंपनी (एमपीसी)/डेयरी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) व सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) शामिल हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए ऑनलाइन नामांकन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक पशुपालक 31 अगस्त तक राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन भेज सकते हैं। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डाॅ. जसवंत जून ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के प्रभावी विकास के लिए अथक प्रयास कर रहा है। ताकि, किसानों को स्थायी आजीविका प्रदान की जा सके। भारत की स्वदेशी गोजातीय नस्लें बहुत अच्छी हैं। उनमें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आनुवंशिक क्षमता मौजूद है। स्वदेशी गोजातीय नस्लों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और विकास करने के उद्देश्य से देश में पहली बार दिसंबर 2014 में राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) की शुरुआत की गई थी।
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उन्होंने बताया कि आरजीएम के तहत, दूध उत्पादक किसानों, डेयरी सहकारी समितियों/एफपीओ और कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों (एआईटी) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, इस विभाग ने 2024 के दौरान भी निम्नलिखित तीन श्रेणियों में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान करना जारी रखा है। इसमें पंजीकृत स्वदेशी मवेशी, मुर्राह भैंस नस्लों को पालने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस)/दूध उत्पादक कंपनी (एमपीसी)/डेयरी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) व सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) शामिल हैं।
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