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कादमा कांड की 26वीं बरसी पर अर्पित किए श्रद्घासुमन, पांच किसानों ने गंवाई थी जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Aug 2021 02:05 AM IST
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anniversary of Kadma incident, five farmers had lost their lives
कादमा कांड की 26वीं बरसी पर अर्पित किए श्रद्धासुमन, पांच किसानों ने गंवाई थी जान
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बाढड़ा (चरखी दादरी)। बिजली संकट को लेकर 26 साल पहले कादमा में हुए आंदोलन के दौरान मारे गए पांच किसानों को क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने श्रद्घांजलि दी। कादमा स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के लोगों समेत राजनेता भी शामिल हुए। वहीं, जनसंगठनों के पदाधिकारियों और आंदोलन में पुलिस की तरफ से की गई फायरिंग में मारे गए किसानों के परिजनों ने भाग लिया और क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं पर मंथन किया। सर्वप्रथम, मृतक किसानों को श्रद्घासुमन अर्पित किए गए।
कादमा शहीद स्मारक स्थल पर किसान संघर्ष समिति संयोजक रामअवतार कादमा की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा हुई। पूर्व विधायक नृपेंद्र मांढ़ी ने कहा कि हमें आज घटते जलस्तर पर व्यापक चिंतन करने की जरूरत है और इसमें किसान की भागीदारी जरूरी है। जब-जब देश पर किसी तरह की आपदा आती है तो जवान व किसान अपने जीवन को कुर्बान करने से पीछे नहीं रहता। इन किसानों ने अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि देश के किसानों पर किए जा रहे जुल्मों के विरोध में अपने प्राणों का बलिदान दिया। इन धरती पुत्रों की कुर्बानी को किसान और कमेरा वर्ग सदैव याद रखेगा।
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पूर्व विधायक व किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र मांढ़ी ने कहा कि किसान देश की रीढ़ है और भाजपा सरकार किसान के सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है। वह स्वयं किसान परिवार के होने के कारण उनकी जायज मांगों को पूरा करवाने के लिए सजग जनप्रतिनिधि के तौर पर उनकी सेवा में मौजूद रहेंगे।
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कार्यक्रम संयोजक रामौतार कादमा ने कहा कि किसान व कृषि के बिना देश की प्रगति संभव नहीं है। केंद्र व प्रदेश सरकार को किसानों की सभी मांगों पर अतिशीघ्र विचार कर अन्नदाताओं को उनके वाजिब हक मुहैया करवाना चाहिए। जजपा जिलाध्यक्ष नरेश द्वारका ने कहा कि इन किसानों की शहादत पर जनसेवा का संकल्प लेते हुए विधायक नैना चौटाला ने शहीद स्मारक स्थल पर एक भव्य मुख्य द्वार व पानी के बोरिंग का निर्माण करवाने का निर्णय लिया है।
- श्रद्घांजलि सभा में ये रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा में झोझूकलां निवर्तमान सरपंच दलबीर गांधी, कमेटी अध्यक्ष रामअवतार, प्रधान सुरेश कुमार, हरीराम पहलवान, समाजसेवी अशोक कादमा, सूबेदार कर्ण सिंह, मांगेराम, दलीप सिंह, सरपंच नरेश पूनिया, युवा हलकाध्यक्ष रामफल कादमा, धर्मबीर बड़राई, धर्मेंद्र कांहड़ा, रेलवे सलाहकार बोर्ड सदस्य सुधीर चांदवास, ईश्वर पहलवान, सूबेदार कर्ण सिंह, पूर्व चेयरमैन अनूप सोनी आदि मौजूद रहे।
- ये है कादमा कांड
23 अगस्त 1995 को कादमा कांड हुआ। इसमें पांच किसानों की मौत हुई थी जबकि चार किसान घायल हुए थे। उस दौरान पांच मुकदमे भी दर्ज किए गए। किसान बिजली संकट को लेकर उस दौरान आंदोलन कर रहे थे और इसे लेकर उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
- मृतकों के परिजनों को 13 वर्ष बाद दी गई नौकरी
- मेरा पिता रामप्रसाद की कादमा कांड में मौत हो गई थी। 13 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद सरकार ने रोडवेज विभाग में नौकरी दी और दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी परिवार को सरकार की तरफ से मिली थी।
सोमबीर, कादमा
- मेरे पिता सुबेदार हवा सिंह की 1995 में हुए कादमा कांड में मौत हुई थी। सरकार की ओर से परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी गई और हमें दो लाख की आर्थिक सहायता भी मिली। पिता को खोने का गम बयां नहीं कर सकता।
भूप सिंह, धनासरी
- मेरा भाई जयप्रकाश ने कादमा आंदोलन में भाग लिया था और उस दौरान उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी थी। सरकार ने नौकरी और आर्थिक सहायता तो दे दी, लेकिन अपने को खोने का दर्द इसके सामने बेहद कम है।

सतबीर, दगड़ोली
- मेरे पिता धर्मवीर की कादमा किसान आंदोलन में गोली लगने से मौत हुई थी। 13 वर्ष के इंतजार के बाद सरकार ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी है। शहीद स्मारक का निर्माण भी उनकी याद में करवाया गया है।
ओमबीर, झोझू
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