{"_id":"695c013a318d4970fc083e4a","slug":"animals-are-at-risk-of-pneumonia-during-the-winter-season-farmers-should-include-jaggery-oil-cake-bran-and-mineral-mixture-in-their-diet-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1004-149753-2026-01-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: ठंड के मौसम में पशुओं में निमाेनिया का खतरा, किसान गुड़, खल, चोकर और खनिज मिक्सचर का आहार करें शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: ठंड के मौसम में पशुओं में निमाेनिया का खतरा, किसान गुड़, खल, चोकर और खनिज मिक्सचर का आहार करें शामिल
Mon, 05 Jan 2026 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:51 PM IST
विज्ञापन
चरखी दादरी। कड़ाके की ठंड ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं पशुपालकों के लिए यह मौसम सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। जिले में लगातार गिरते तापमान और ठंडी हवाओं के चलते पशु विभिन्न मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पशुओं की देखभाल, आवास और खानपान पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया तो दूध उत्पादन घटने के साथ-साथ पशुओं की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
बीमारियों की चपेट में आ रहे पशु
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में पशुओं में निमोनियो का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसके अलावा दस्त, त्वचा रोग और थनैला जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर बछड़े, दूध देने वाली गाय-भैंस और बुजुर्ग पशु ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ठंड से बचाव न होने पर पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे मामूली बीमारी भी गंभीर रूप ले सकती है। इन्ही दिनों में पशुओं को मुंहखोरी, गलघोंटू जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
ये रखें सावधानियां
पशुओं के रहने की जगह को ठंड से सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। पशुशाला में ठंडी हवा के सीधे प्रवेश को रोकना चाहिए। खिड़की-दरवाजों को बोरी, प्लास्टिक शीट या तिरपाल से ढकना उपयोगी रहता है, लेकिन वेंटिलेशन का ध्यान भी जरूरी है ताकि नमी जमा न हो। जमीन पर सूखी पुआल, भूसा या रबर मैट बिछाने से पशुओं को ठंड से राहत मिलती है। रात के समय छोटे बछड़ों को बोरी या पुराने कंबल से ढकना भी जरूरी है। पशुओं को घर से बाहर देरी से निकालें और उन्हें धूप हो तभी नहलाएं।
विज्ञापन
खानपान का रखें ख्याल
खानपान को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है। ठंड में पशुओं को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है, इसलिए उनके आहार में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा, सूखा चारा और दाना देना चाहिए। गुड़, खल, चोकर और खनिज मिक्सचर को आहार में शामिल करने से पशुओं की ताकत बनी रहती है। ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पिलाने से पाचन बेहतर रहता है और सर्दी-जुकाम का खतरा कम होता है।
दुधारू पशुओं के लिए विशेष सावधानियां
दूध देने वाले पशुओं के थनों की नियमित सफाई और मालिश भी बेहद जरूरी है। ठंड में थन फटने या थनैला होने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए दूध निकालने से पहले और बाद में गुनगुने पानी से सफाई करनी चाहिए। नहलाते समय और पीने के लिए गुनगुना पानी दें। यदि किसी पशु में खांसी, बुखार, सुस्ती, भूख न लगना या दूध में अचानक कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
वर्जन :
पशुपालकों से अपील की है कि वे ठंड के मौसम को हल्के में न लें। समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई, संतुलित आहार और उचित आवास व्यवस्था से पशुओं को ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है। सही देखभाल न केवल पशुओं की सेहत को सुरक्षित रखती है, बल्कि पशुपालकों की आय को भी स्थिर बनाए रखने में सहायक होती है। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं में मुंहखोरी और गलघोंटू बीमारी के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। - डाॅ. महासिंह, पशु चिकित्सक।
विज्ञापन
बीमारियों की चपेट में आ रहे पशु
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में पशुओं में निमोनियो का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसके अलावा दस्त, त्वचा रोग और थनैला जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर बछड़े, दूध देने वाली गाय-भैंस और बुजुर्ग पशु ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ठंड से बचाव न होने पर पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे मामूली बीमारी भी गंभीर रूप ले सकती है। इन्ही दिनों में पशुओं को मुंहखोरी, गलघोंटू जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
विज्ञापन
ये रखें सावधानियां
पशुओं के रहने की जगह को ठंड से सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। पशुशाला में ठंडी हवा के सीधे प्रवेश को रोकना चाहिए। खिड़की-दरवाजों को बोरी, प्लास्टिक शीट या तिरपाल से ढकना उपयोगी रहता है, लेकिन वेंटिलेशन का ध्यान भी जरूरी है ताकि नमी जमा न हो। जमीन पर सूखी पुआल, भूसा या रबर मैट बिछाने से पशुओं को ठंड से राहत मिलती है। रात के समय छोटे बछड़ों को बोरी या पुराने कंबल से ढकना भी जरूरी है। पशुओं को घर से बाहर देरी से निकालें और उन्हें धूप हो तभी नहलाएं।
विज्ञापन
खानपान का रखें ख्याल
खानपान को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है। ठंड में पशुओं को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है, इसलिए उनके आहार में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा, सूखा चारा और दाना देना चाहिए। गुड़, खल, चोकर और खनिज मिक्सचर को आहार में शामिल करने से पशुओं की ताकत बनी रहती है। ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पिलाने से पाचन बेहतर रहता है और सर्दी-जुकाम का खतरा कम होता है।
दुधारू पशुओं के लिए विशेष सावधानियां
दूध देने वाले पशुओं के थनों की नियमित सफाई और मालिश भी बेहद जरूरी है। ठंड में थन फटने या थनैला होने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए दूध निकालने से पहले और बाद में गुनगुने पानी से सफाई करनी चाहिए। नहलाते समय और पीने के लिए गुनगुना पानी दें। यदि किसी पशु में खांसी, बुखार, सुस्ती, भूख न लगना या दूध में अचानक कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
वर्जन :
पशुपालकों से अपील की है कि वे ठंड के मौसम को हल्के में न लें। समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई, संतुलित आहार और उचित आवास व्यवस्था से पशुओं को ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकता है। सही देखभाल न केवल पशुओं की सेहत को सुरक्षित रखती है, बल्कि पशुपालकों की आय को भी स्थिर बनाए रखने में सहायक होती है। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं में मुंहखोरी और गलघोंटू बीमारी के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। - डाॅ. महासिंह, पशु चिकित्सक।