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95% स्कूलों में बंद पड़े एजुसेट सिस्टम की 14 साल बाद विभाग ने ली सुध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 11:57 PM IST
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After 14 years, the department took care of the education system closed in 95% of the schools.
राजकीय स्कूल में लगा एजुसेट सिस्टम। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। राजकीय स्कूलों में नकारा पड़े एजुसेट सिस्टम की 14 साल बाद शिक्षा विभाग ने सुध ली है। इस संबंध में सभी स्कूल मुखियाओं से एजुसेट की स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है ताकि इनको फिर से काम में लिया जा सके। बिजली व नेटवर्क की किल्लत के चलते यह सिस्टम 95 प्रतिशत स्कूलों में नकारा पड़े हैं।
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गत कांग्रेस सरकार के शासनकाल में सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए एजुसेट लगाए गए थे, ताकि इनको आधुनिक तकनीक से पढ़ाया जा सके। जब ये सिस्टम स्कूलों में लगाए गए तब कुछ समय तक वे वर्किंग में रहे, लेकिन इसके बाद रखरखाव के अभाव में नकारा हो गए। हालांकि जेनरेटर की भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन जेनरेटर में तेल डालने के लिए बजट की समस्या आ गई। इसी प्रकार नेटवर्किंग की समस्या भी प्रमुख कारण बनी रही। कोरोनाकॉल में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को बेहद कठिनाइयां झेलनी पड़ी थी। अब सरकार की योजना है कि खराब पड़े एजुसेट को चालू करने विद्यार्थियों की पढ़ाई करवाई जा सके। इसके लिए शिक्षा विभाग के मुख्यालय से सभी स्कूल मुखियाओं से एजुसेट की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है।
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जेनरेटर का डीजल और विशेषज्ञ की तैनाती भी अहम
एजुसेट को चालू करने के लिए विभाग को जेनरेटर में तेल की व्यवस्था के लिए बजट का प्रावधान भी करने की जरूरत है। इस समय 95 प्रतिशत स्कूलों में एजुसेट वर्किंग में नहीं हैं। एजुसेट के लिए एक्सपर्ट तैनात करने की भी जरूरत है, ताकि इस रखरखाव ठीक प्रकार से हो सके और सही ढंग से ऑपरेट किया जा सके। एजुसेट में बढ़िया तकनीक का कैमरा भी लगा है।
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वर्जन
विभाग एजुसेट सिस्टम को सभी स्कूल में काम में लाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए स्कूल मुखियाओं से रिपोर्ट मांगी गई है, कि स्कूल में लगे ये एजुसेट किस स्थिति में हैं। इसके आधार पर अधिकारियों को सूचित कर समस्या का हल करवाया जाएगा।
-जलधीर सिंह कलकल, बीईओ
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