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सात टेस्ट की प्रशासन ने अधिकतम फीस की निर्धारित
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चरखी दादरी। जिला प्रशासन ने विभिन्न प्रकार के टेस्टों की अधिकतम फीस निर्धारित कर दी है। रेट लिस्ट में टेस्ट का सैंपल लेने के लिए इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुओं एवं उपकरणों के खर्चे सहित टैक्स भी शामिल है।
जिलाधीश राजेश जोगपाल ने प्रदेश सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार आदेश जारी करते हुए 7 प्रकार के टेस्ट के अधिकतम रेट निर्धारित किए हैं। इनमे सीटी एवं एचआरसीटी के लिए 2100 रुपये, आईएल-6 के लिए 1000 रुपये, डी-डिमर के लिए 400 रुपये, एलडीएच के लिए 250 रुपये, सीआरपी के लिए 350 रुपये, प्रोकैल्सीटोनिन के लिए 1500 रुपये और फ्रिटीन के लिए 300 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
जिलाधीश द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि निर्धारित रेट में टेस्ट के दौरान इस्तेमाल की जानी वालीं वस्तुएं एवं उपकरण जैसे पीपीई किट, पैकिंग, कागजाती कार्यवाही, रिपोर्टिंग सहित टेस्ट पर लगने वाले टैक्स भी शामिल हैं। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि घर पर सैंपल लेने के लिए निर्धारित रेट से अधिकतम 200 रुपये ज्यादा लिए जा सकते हैं और यह घर के एक या अधिक सदस्यों के लिए भी समान चार्ज होगा। जिलाधीश ने जिला के सभी लैब संचालको और अस्पतालों को निर्धारित रेट के अनुसार ही फीस लेने के निर्देश दिए हैं। आदेशों के अवहेलना करने वालों पर आईपीसी की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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जिलाधीश राजेश जोगपाल ने प्रदेश सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार आदेश जारी करते हुए 7 प्रकार के टेस्ट के अधिकतम रेट निर्धारित किए हैं। इनमे सीटी एवं एचआरसीटी के लिए 2100 रुपये, आईएल-6 के लिए 1000 रुपये, डी-डिमर के लिए 400 रुपये, एलडीएच के लिए 250 रुपये, सीआरपी के लिए 350 रुपये, प्रोकैल्सीटोनिन के लिए 1500 रुपये और फ्रिटीन के लिए 300 रुपये निर्धारित किए गए हैं।
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जिलाधीश द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि निर्धारित रेट में टेस्ट के दौरान इस्तेमाल की जानी वालीं वस्तुएं एवं उपकरण जैसे पीपीई किट, पैकिंग, कागजाती कार्यवाही, रिपोर्टिंग सहित टेस्ट पर लगने वाले टैक्स भी शामिल हैं। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि घर पर सैंपल लेने के लिए निर्धारित रेट से अधिकतम 200 रुपये ज्यादा लिए जा सकते हैं और यह घर के एक या अधिक सदस्यों के लिए भी समान चार्ज होगा। जिलाधीश ने जिला के सभी लैब संचालको और अस्पतालों को निर्धारित रेट के अनुसार ही फीस लेने के निर्देश दिए हैं। आदेशों के अवहेलना करने वालों पर आईपीसी की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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