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Charkhi Dadri News: किसानों के लिए खुशखबरी, आज पहुंचेंगे डीएपी खाद के 8700 बैग
Wed, 01 Oct 2025 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 01 Oct 2025 02:06 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में रबी सीजन की तैयारियों के बीच खाद की उपलब्धता पर राहत भरी खबर है। बुधवार को जिले में डीएपी खाद के 8700 बैग पहुंच जाएंगे, जबकि मंगलवार को यूरिया खाद की बड़ी खेप आ चुकी है।
प्रशासन ने खाद वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित करने के लिए जमीन सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है। अब किसान को खाद लेने से पहले मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज जमीन की जानकारी की प्रति पटवारी को दिखानी होगी। पटवारी संबंधित भूमि का भौतिक सत्यापन करेगा और उसी के अनुसार खाद उपलब्ध करवाई जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि खाद की कालाबाजारी और अनावश्यक भंडारण पर रोक लगाई जा सके।
जिले में रबी सीजन के लिए करीब 20 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की आवश्यकता है। डीएपी का वितरण जुलाई से ही जारी है, लेकिन अब तक आधार कार्ड के माध्यम से खाद दी जा रही थी। इस व्यवस्था में कुछ किसानों द्वारा जरूरत से ज्यादा खाद उठाने के मामले सामने आए थे, जिससे बाकी किसानों को परेशानी हुई।
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रबी की फसलों की बुआई 15 अक्तूबर के बाद शुरू होगी, लेकिन सरसों जैसी फसलें तभी बोई जा सकेंगी जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ जाएगा। अधिक तापमान में बीज के अंकुरण पर विपरीत असर पड़ सकता है।
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चरखी दादरी। जिले में रबी सीजन की तैयारियों के बीच खाद की उपलब्धता पर राहत भरी खबर है। बुधवार को जिले में डीएपी खाद के 8700 बैग पहुंच जाएंगे, जबकि मंगलवार को यूरिया खाद की बड़ी खेप आ चुकी है।
प्रशासन ने खाद वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित करने के लिए जमीन सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है। अब किसान को खाद लेने से पहले मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज जमीन की जानकारी की प्रति पटवारी को दिखानी होगी। पटवारी संबंधित भूमि का भौतिक सत्यापन करेगा और उसी के अनुसार खाद उपलब्ध करवाई जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि खाद की कालाबाजारी और अनावश्यक भंडारण पर रोक लगाई जा सके।
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जिले में रबी सीजन के लिए करीब 20 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की आवश्यकता है। डीएपी का वितरण जुलाई से ही जारी है, लेकिन अब तक आधार कार्ड के माध्यम से खाद दी जा रही थी। इस व्यवस्था में कुछ किसानों द्वारा जरूरत से ज्यादा खाद उठाने के मामले सामने आए थे, जिससे बाकी किसानों को परेशानी हुई।
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रबी की फसलों की बुआई 15 अक्तूबर के बाद शुरू होगी, लेकिन सरसों जैसी फसलें तभी बोई जा सकेंगी जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ जाएगा। अधिक तापमान में बीज के अंकुरण पर विपरीत असर पड़ सकता है।