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शहर में तीन हजार लावारिस कुत्ते तो एक हजार है बंदरों की तादाद, लोग परेशान
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शहर में एक हजार से अधिक बंदर और तीन हजार लावारिस कुत्तों के उत्पात से लोग परेशान हैं। इनके हमले से अक्सर लोग घायल हो रहे हैं। वहीं, सिविल अस्पताल में एंटी रैबिज वैक्सीन (एआरवी) होने से लोग महंगा उपचार करवाने को विवश हैं। शहरवासियों ने नगर परिषद अधिकारियों से लावारिस कुत्तों और बंदरों से निजात दिलाने की गुहार लगाई है। दूसरी ओर नप अधिकारियों का कहना है कि बंदर पकड़ो अभियान शुरू करवाने पर काम चल रहा है। जल्द ही इसके लिए एजेंसी की मदद ली जाएगी।
दादरी में बंदरों और लावारिस कुत्तों की समस्या वर्षों पुरानी है। दोनों ही समस्याओं से नगर परिषद ने शहरवासियों को अब तक निजात नहीं दिलाया है। बंदरों को पकड़ने की योजना तो अधिकारियों ने कई बार तैैयार कीं जो अधर में ही लटक गईं। पिछले तीन साल से दादरी शहर में बंदर पकड़ो अभियान नहीं चला है। लोग लगातार बंदरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर गत दिनों ही नगर परिषद और पशुपालन विभाग की टीम ने लावारिस कुत्तों की संख्या का पता लगाने के लिए सर्वे किया था। नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि चार टीमों ने शहर की गली-गली जाकर लावारिस कुत्तों की संख्या का आकलन किया था। शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या लगभग तीन हजार है।
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प्रतिमाह नप के पास पहुंच रही 150 शिकायतें
लावारिस कुत्तों और बंदरों से संबंधी शिकायतें प्रतिदिन नगर परिषद अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं। एक दिन में औसतन चार से पांच शिकायतें आ रही हैं और एक माह में करीब 150 लोग बंदरों व कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने की गुहार अधिकारियों से लगाते हैं।
बंदर पकड़ो अभियान जल्द ही शुरू करवाने का हमारा प्रयास है। टेंडर संबंधी औपचारिकता को हम पूरी कर रहे हैं और जल्द ही एजेंसी हायर कर शहर में अभियान शुरू करवा दिया जाएगा। वन्य जीव एवं प्राणी विभाग से पहले चरण में हमें 500 बंदर पकड़े की अनुमति मिल चुकी है। उन्हें कालेसर के जंगल में छोड़ा जाएगा। -मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद।
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दादरी में बंदरों और लावारिस कुत्तों की समस्या वर्षों पुरानी है। दोनों ही समस्याओं से नगर परिषद ने शहरवासियों को अब तक निजात नहीं दिलाया है। बंदरों को पकड़ने की योजना तो अधिकारियों ने कई बार तैैयार कीं जो अधर में ही लटक गईं। पिछले तीन साल से दादरी शहर में बंदर पकड़ो अभियान नहीं चला है। लोग लगातार बंदरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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दूसरी ओर गत दिनों ही नगर परिषद और पशुपालन विभाग की टीम ने लावारिस कुत्तों की संख्या का पता लगाने के लिए सर्वे किया था। नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि चार टीमों ने शहर की गली-गली जाकर लावारिस कुत्तों की संख्या का आकलन किया था। शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या लगभग तीन हजार है।
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प्रतिमाह नप के पास पहुंच रही 150 शिकायतें
लावारिस कुत्तों और बंदरों से संबंधी शिकायतें प्रतिदिन नगर परिषद अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं। एक दिन में औसतन चार से पांच शिकायतें आ रही हैं और एक माह में करीब 150 लोग बंदरों व कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने की गुहार अधिकारियों से लगाते हैं।
बंदर पकड़ो अभियान जल्द ही शुरू करवाने का हमारा प्रयास है। टेंडर संबंधी औपचारिकता को हम पूरी कर रहे हैं और जल्द ही एजेंसी हायर कर शहर में अभियान शुरू करवा दिया जाएगा। वन्य जीव एवं प्राणी विभाग से पहले चरण में हमें 500 बंदर पकड़े की अनुमति मिल चुकी है। उन्हें कालेसर के जंगल में छोड़ा जाएगा। -मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद।