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86 राजकीय स्कूलों के 168 कमरे कंडम घोषित, नए बनाने की कवायद शुरू
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राजकीय स्कूल का कंडम भवन। संवाद
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। लंबे इंतजार के बाद शिक्षा विभाग निदेशालय ने जिले में 86 राजकीय स्कूलों के खस्ताहाल 168 कमरों को कंडम घोषित कर दिया है। इसके साथ स्कूूलों में हॉल, चाहरदीवारी व अन्य प्रकार की बिल्डिंग को कंडम घोषित किया है। अब विभाग ने नए कमरों का निर्माण करवाने की कवायद शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम अब इन स्कूलों में पहुंच रही है, ताकि यहां बनाए जाने वाले नए कमरों का एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा जा सके। वहीं, इन कमरों के कंडम घोषित न होने के चलते स्कूलों में जगह की कमी बनी हुई है। छह हजार से अधिक विद्यार्थियों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
जिले के 86 स्कूलों में खस्ताहाल कमरे हाल ही में निदेशालय ने कंडम घोषित किए हैं। दो साल से कंडम घोषित करवाने के लिए शिक्षा विभाग प्रयास में जुटा था। अब जल्द ही इन कमरों को तुड़वाया जाएगा। इनकी जगह नए कमरे बनाए जाए जाने के लिए प्रपोजल तैयार होगा। स्कूलों में कंडम कमरों, छत्त व चाहरदीवारी आदि की लंबे समय हालत खराब बनी हुई है। इन स्कूलों के भवन बारिश, सर्दी व गर्मी का मौसम झेलने की स्थिति में नहीं हैं। जिले में 365 प्राइमरी, मिडिल, हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं।
जिले के अधिकतर राजकीय स्कूल के कमरे 45 से 50 वर्ष पुराने हो चुके हैं। अब इन स्कूलों के भवन जवाब दे चुके हैं। किसी स्कूल में कमरों की छत्त कंडम हो चुकी हैं तो कही कमरों की दीवारों में दरारें बनी हुई हैं। कई स्कूलों में चाहरदीवारी तक टूटी पड़ी हैं। इस कारण स्कूल परिसरों में लगे पौधों को लावारिस पशु नष्ट कर देेेते हैं। कई ऐसे भी स्कूल हैं जिनका लेवल काफी नीचा होने की वजह से जलभराव की समस्या बन जाती है जिससे कई दिनो तक स्कूल बंद करने पड़ते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। जिला में दो साल से करीब 165 कमरे कंडम घोषित किए जाने के इंतजार में थे।
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सरकार की ओर से दो बार मांगा गया विवरण
सरकार की ओर से जिला के स्कूलों में जर्जर कमरों का दो बार विवरण मांगा गया। दोनों बार शिक्षा विभाग ने इसका ब्योरा सरकार को भेज दिया। फिर शिक्षा विभाग व पीडीब्ल्यूडी अधिकारियों ने मौके पर जाकर इन स्कूलों के भवन का आकलन कर इसकी रिपोर्ट तैयार की, जो निदेशालय को भेजी गई। रिपोर्ट में जर्जर कमरों को कंडम घोषित किया गया। जिले में 86 स्कूलों में कमरे, छत्त, हॉल व अन्य प्रकार का भवन कंडम घोषित किए गए हैं।
कन्या प्राथमिक पाठशाला को मिलेगा नया भवन
कोर्ट के पिछली तरफ स्थित राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला में वीरवार सुबह शिक्षा विभाग की टीम पहुंची। टीम में शामिल जेई राजकुमार ने बताया कि यहां नए भवन का निर्माण करवाया जाएगा। भवन दो मंजिला होगा जिसमें आठ कमरे होंगे। चार कमरे ऊपर और चार नीचे बनाए जाएंगे। विदित रहे शहर में स्थित शहीद दलबीर सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भवन को कंडम घोषित हुए कई साल हो गए हैं, लेकिन इसकी जगह नया भवन नहीं बनाया जा सका है। इस कंडम घोषित भवन में ही बीईओ व डीईओ के कार्यालय चला रखे हैं, जिससे खासकर बारिश के मौसम में खतरा बना रहता है।
स्कूलों में पर्याप्त नहीं बुनियादी ढांचा
राजकीय अध्यापक संघ नेता संजय शास्त्री का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता की बात तो कर रही है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले बुनियादी ढांचा(इंफ्रास्ट्रक्चर) तो पर्याप्त होना चाहिए। स्कूलों के कंडम कमरों का निर्माण जल्दी ही करवाना चाहिए। इस बार तो सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या भी बढ़ी है।
86 स्कूलों में कमरों को कंडम घोषित किया गया
86 स्कूलों में कमरे, हॉल, चाहरदीवारी व अन्य प्रकार की बिल्डिंग को कंडम घोषित किया गया है। अब जल्द ही इन कंडम कमरों को तोड़ा जाएगा। उसके बाद नया भवन निर्माण के लिए प्रपोजल तैयार होगा।
-जयवीर सिंह, एसडीओ, समग्र शिक्षा
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जिले के 86 स्कूलों में खस्ताहाल कमरे हाल ही में निदेशालय ने कंडम घोषित किए हैं। दो साल से कंडम घोषित करवाने के लिए शिक्षा विभाग प्रयास में जुटा था। अब जल्द ही इन कमरों को तुड़वाया जाएगा। इनकी जगह नए कमरे बनाए जाए जाने के लिए प्रपोजल तैयार होगा। स्कूलों में कंडम कमरों, छत्त व चाहरदीवारी आदि की लंबे समय हालत खराब बनी हुई है। इन स्कूलों के भवन बारिश, सर्दी व गर्मी का मौसम झेलने की स्थिति में नहीं हैं। जिले में 365 प्राइमरी, मिडिल, हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं।
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जिले के अधिकतर राजकीय स्कूल के कमरे 45 से 50 वर्ष पुराने हो चुके हैं। अब इन स्कूलों के भवन जवाब दे चुके हैं। किसी स्कूल में कमरों की छत्त कंडम हो चुकी हैं तो कही कमरों की दीवारों में दरारें बनी हुई हैं। कई स्कूलों में चाहरदीवारी तक टूटी पड़ी हैं। इस कारण स्कूल परिसरों में लगे पौधों को लावारिस पशु नष्ट कर देेेते हैं। कई ऐसे भी स्कूल हैं जिनका लेवल काफी नीचा होने की वजह से जलभराव की समस्या बन जाती है जिससे कई दिनो तक स्कूल बंद करने पड़ते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। जिला में दो साल से करीब 165 कमरे कंडम घोषित किए जाने के इंतजार में थे।
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सरकार की ओर से दो बार मांगा गया विवरण
सरकार की ओर से जिला के स्कूलों में जर्जर कमरों का दो बार विवरण मांगा गया। दोनों बार शिक्षा विभाग ने इसका ब्योरा सरकार को भेज दिया। फिर शिक्षा विभाग व पीडीब्ल्यूडी अधिकारियों ने मौके पर जाकर इन स्कूलों के भवन का आकलन कर इसकी रिपोर्ट तैयार की, जो निदेशालय को भेजी गई। रिपोर्ट में जर्जर कमरों को कंडम घोषित किया गया। जिले में 86 स्कूलों में कमरे, छत्त, हॉल व अन्य प्रकार का भवन कंडम घोषित किए गए हैं।
कन्या प्राथमिक पाठशाला को मिलेगा नया भवन
कोर्ट के पिछली तरफ स्थित राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला में वीरवार सुबह शिक्षा विभाग की टीम पहुंची। टीम में शामिल जेई राजकुमार ने बताया कि यहां नए भवन का निर्माण करवाया जाएगा। भवन दो मंजिला होगा जिसमें आठ कमरे होंगे। चार कमरे ऊपर और चार नीचे बनाए जाएंगे। विदित रहे शहर में स्थित शहीद दलबीर सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भवन को कंडम घोषित हुए कई साल हो गए हैं, लेकिन इसकी जगह नया भवन नहीं बनाया जा सका है। इस कंडम घोषित भवन में ही बीईओ व डीईओ के कार्यालय चला रखे हैं, जिससे खासकर बारिश के मौसम में खतरा बना रहता है।
स्कूलों में पर्याप्त नहीं बुनियादी ढांचा
राजकीय अध्यापक संघ नेता संजय शास्त्री का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता की बात तो कर रही है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले बुनियादी ढांचा(इंफ्रास्ट्रक्चर) तो पर्याप्त होना चाहिए। स्कूलों के कंडम कमरों का निर्माण जल्दी ही करवाना चाहिए। इस बार तो सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या भी बढ़ी है।
86 स्कूलों में कमरों को कंडम घोषित किया गया
86 स्कूलों में कमरे, हॉल, चाहरदीवारी व अन्य प्रकार की बिल्डिंग को कंडम घोषित किया गया है। अब जल्द ही इन कंडम कमरों को तोड़ा जाएगा। उसके बाद नया भवन निर्माण के लिए प्रपोजल तैयार होगा।
-जयवीर सिंह, एसडीओ, समग्र शिक्षा