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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में बाढ़ का खतरा
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला/यमुनानगर/पंचकूला/सिरसा/चंडीगढ़। पंजाब व जम्मू के बाद हरियाणा का खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश के सात जिलों अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, सिरसा, फतेहाबाद, कैथल व पानीपत में प्रशासन अलर्ट पर है। इन जिलों में नदियों व बरसाती नालों ने तबाही मचाई है। सबसे ज्यादा नुकसान अंबाला, पंचकूला व यमुनानगर में हुआ।
अंबाला में शुक्रवार दोपहर बरसाती नदी टांगरी का पानी किनारों से निकलकर अंबाला की 40 काॅलोनियों तक पहुंच गया। घरों के अंदर तक पांच फीट पानी भरा है। राज्य आपदा मोचन दल (एसडीआरफ) ने बचाव अभियान चलाकर 120 लोगों को निकाला। तीन हजार लोग अभी भी घरों की छतों पर फंसे हुए हैं। रात में बचाव अभियान रोक दिया गया। टांगरी नदी की क्षमता 15,400 क्यूसेक पानी की है जबकि शुक्रवार को इसमें 38000 क्यूसेक पानी आया, जिससे ये हालात बने। परिवहन मंत्री अनिल विज रात के समय टांगरी नदी में जलस्तर का मुआयना करने के लिए घसीटपुर और शाहपुर में पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की।
इसके अलावा, यमुनानगर में भी खोल, सोम और पथराला नदी ने कहर बरपाया। हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे धनौरा गांव में हरिपुर खोल नदी में उफान से फसलें खराब हो गई है और बिजली के खंभे टूटकर गिर गए हैं। रणजीतपुर से हिमाचल को जाने वाली सड़क के किनारे कट गए। सोम नदी में उफान से 500 एकड़ फसल डूब गई जबकि पथराला में उफान से जैतपुर गांव में वन विभाग की 15 एकड़ भूमि पर कटाव हो गया है। यमुनानगर में भी सुबह घग्गर का पानी ओवरफ्लो होकर पुल के ऊपर से गुजरा। लगा। यहां सोम नदी का पानी भी घरों में घुसा। चिंतपुर गांव में रात को पानी आसपास के गांवों में पहुंच गया।
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पंचकूला में वीरवार रात रिकॉर्ड 120 एमएम बारिश हुई है। यहां के मोरनी क्षेत्र में भारी बारिश से कई जगहों पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और इलाका शहरी पंचकूला से कट गया। वहीं, घग्गर नदी उफान पर है। इसका जलस्तर 31800 क्यूसिक दर्ज किया गया। बरवाला औद्योगिक क्षेत्र को खटौली व समीपवर्ती गांवों से जोड़ने वाला पुल भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। जिला प्रशासन ने टांगरी, घग्गर, कौशल्या सहित नालों एवं अन्य जल स्रोतों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। जलस्तर में अचानक वृद्धि व बाढ़ की संभावना बनी हुई है।
अंबाला के स्कूलों में की छुट्टी
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों पर अत्याधिक बारिश की वजह से यह भयावह स्थिति बनी है। दो पास पहले भी टांगरी नदी का पानी शहर तक पहुंचा था। हालांकि, शाम छह बजे पानी में कमी आई और यह 35 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन ने सुबह ही स्कूलों की छुट्टी कर दी थी।
कैथल के कई गांवों में लोग सुरक्षित स्थानों पर गए, पानीपत व करनाल में डूबीं फसलें
कैथल में अंबाला-यमुनानगर में लगातार बारिश से घग्गर का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह टटियाना हेड पर 14,630 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जिसके चलते मंदिरों-गुरुद्वारों से मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया गया। लोग खेतों से सामान व पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे, जबकि किसानों को फसलों के नुकसान का डर सता रहा है। पानीपत में हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ने के कारण यमुना नदी में फिर से उफान आ गया है। शुक्रवार सुबह जलस्तर चेतावनी बिंदू 231 मीटर के आसपास था। जलस्तर बढ़ने से तटबंध के अंदर करीब छह हजार एकड़ फसल डूब गई है। करनाल में हथिनीकुंड बैराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से यमुना उफान पर है।
सिरसा में घग्गर का पानी खतरे के निशान पर, ओटू हेड खोल पानी राजस्थान की तरफ मोड़ा
सिरसा व फतेहाबाद में घग्गर में जलस्तर कम नहीं होने से प्रशासन सतर्क है। शुक्रवार को जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया। ऐसे में ओटू हेड को पूरी तरह से खोल दिया गया है। पानी को तेजी से राजस्थान की ओर छोड़ा जा रहा है, ताकि जलस्तर कम किया जा सके। सरदूरगढ़ पुल पर पानी खतरे के निशान 21 फीट पर बह रहा है। मल्लेवाला, नेजाडेला, खैरेकां, सहारणी, बुडाभाणा, अहमदपुर, मीरपुर आदि क्षेत्रों में किसान व प्रशासन तटबंधों को मजबूत करने में लगा है। सिंचाई विभाग के अनुसार ओटू हेड पर शुक्रवार को 28,000 क्यूसेक पानी पहुंचा है। अभी पंजाब से निरंतर पानी आ रहा है। वहीं, सरदूलगढ़ के पास 40 हजार क्यूसिक पानी पहुंचा है। रोडी, सिरसा, रानियां, ऐलनाबाद क्षेत्रों में शुक्रवार को तेज बारिश हुई। आगामी 24 घंटे बेहद अहम है। बारिश हुई तो बाढ़ की आशंका बढ़ जाएगी।
आज रात फिर बारिश की संभावना
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ व मानसून रेखा के असर से शुक्रवार को कई जिलों में बारिश हुई है। शुक्रवार को हिसार, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, जींद, पलवल, पानीपत व सिरसा जिलों में बारिश हुई है। 30 अगस्त की रात को एक और विक्षोभ सक्रिय होगा। पश्चिमी विक्षोभ व मानसून रेखा के असर से 5 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की संभावना रहेगी। उन्होंने बताया कि हिसार में 20.4 एमएम, नारनौल में 65.5 एमएम, पानीपत-16.5 एमएम व सिरसा में 14.5 एमएम बारिश हुई।
बैराज के 18 गेट खुले, दिल्ली में तबाही मचा सकता है पानी
यमुनानगर में उत्तराखंड के पहाड़ी कैचमेंट एरिया में 177 एमएम बारिश होने पर यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया। शुक्रवार शाम पांच बजे हथिनीकुंड बैराज का जलस्तर बढ़कर 90,926 क्यूसेक पहुंच गया, ऐसे में बैराज के सभी 18 गेटों को खोल दिया गया जिसमें 82,406 क्यूसेक पानी को दिल्ली की तरफ डायवर्ट किया गया। 72 घंटे में यह पानी दिल्ली पहुंचेगा इससे दिल्ली बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन विजय गर्ग का कहना है कि यदि लगातार मूसलादार बारिश हुई तो जलस्तर और बढ़ सकता है।
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अंबाला/यमुनानगर/पंचकूला/सिरसा/चंडीगढ़। पंजाब व जम्मू के बाद हरियाणा का खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश के सात जिलों अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, सिरसा, फतेहाबाद, कैथल व पानीपत में प्रशासन अलर्ट पर है। इन जिलों में नदियों व बरसाती नालों ने तबाही मचाई है। सबसे ज्यादा नुकसान अंबाला, पंचकूला व यमुनानगर में हुआ।
अंबाला में शुक्रवार दोपहर बरसाती नदी टांगरी का पानी किनारों से निकलकर अंबाला की 40 काॅलोनियों तक पहुंच गया। घरों के अंदर तक पांच फीट पानी भरा है। राज्य आपदा मोचन दल (एसडीआरफ) ने बचाव अभियान चलाकर 120 लोगों को निकाला। तीन हजार लोग अभी भी घरों की छतों पर फंसे हुए हैं। रात में बचाव अभियान रोक दिया गया। टांगरी नदी की क्षमता 15,400 क्यूसेक पानी की है जबकि शुक्रवार को इसमें 38000 क्यूसेक पानी आया, जिससे ये हालात बने। परिवहन मंत्री अनिल विज रात के समय टांगरी नदी में जलस्तर का मुआयना करने के लिए घसीटपुर और शाहपुर में पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की।
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इसके अलावा, यमुनानगर में भी खोल, सोम और पथराला नदी ने कहर बरपाया। हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे धनौरा गांव में हरिपुर खोल नदी में उफान से फसलें खराब हो गई है और बिजली के खंभे टूटकर गिर गए हैं। रणजीतपुर से हिमाचल को जाने वाली सड़क के किनारे कट गए। सोम नदी में उफान से 500 एकड़ फसल डूब गई जबकि पथराला में उफान से जैतपुर गांव में वन विभाग की 15 एकड़ भूमि पर कटाव हो गया है। यमुनानगर में भी सुबह घग्गर का पानी ओवरफ्लो होकर पुल के ऊपर से गुजरा। लगा। यहां सोम नदी का पानी भी घरों में घुसा। चिंतपुर गांव में रात को पानी आसपास के गांवों में पहुंच गया।
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पंचकूला में वीरवार रात रिकॉर्ड 120 एमएम बारिश हुई है। यहां के मोरनी क्षेत्र में भारी बारिश से कई जगहों पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और इलाका शहरी पंचकूला से कट गया। वहीं, घग्गर नदी उफान पर है। इसका जलस्तर 31800 क्यूसिक दर्ज किया गया। बरवाला औद्योगिक क्षेत्र को खटौली व समीपवर्ती गांवों से जोड़ने वाला पुल भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। जिला प्रशासन ने टांगरी, घग्गर, कौशल्या सहित नालों एवं अन्य जल स्रोतों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। जलस्तर में अचानक वृद्धि व बाढ़ की संभावना बनी हुई है।
अंबाला के स्कूलों में की छुट्टी
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों पर अत्याधिक बारिश की वजह से यह भयावह स्थिति बनी है। दो पास पहले भी टांगरी नदी का पानी शहर तक पहुंचा था। हालांकि, शाम छह बजे पानी में कमी आई और यह 35 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन ने सुबह ही स्कूलों की छुट्टी कर दी थी।
कैथल के कई गांवों में लोग सुरक्षित स्थानों पर गए, पानीपत व करनाल में डूबीं फसलें
कैथल में अंबाला-यमुनानगर में लगातार बारिश से घग्गर का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह टटियाना हेड पर 14,630 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जिसके चलते मंदिरों-गुरुद्वारों से मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया गया। लोग खेतों से सामान व पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे, जबकि किसानों को फसलों के नुकसान का डर सता रहा है। पानीपत में हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ने के कारण यमुना नदी में फिर से उफान आ गया है। शुक्रवार सुबह जलस्तर चेतावनी बिंदू 231 मीटर के आसपास था। जलस्तर बढ़ने से तटबंध के अंदर करीब छह हजार एकड़ फसल डूब गई है। करनाल में हथिनीकुंड बैराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से यमुना उफान पर है।
सिरसा में घग्गर का पानी खतरे के निशान पर, ओटू हेड खोल पानी राजस्थान की तरफ मोड़ा
सिरसा व फतेहाबाद में घग्गर में जलस्तर कम नहीं होने से प्रशासन सतर्क है। शुक्रवार को जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया। ऐसे में ओटू हेड को पूरी तरह से खोल दिया गया है। पानी को तेजी से राजस्थान की ओर छोड़ा जा रहा है, ताकि जलस्तर कम किया जा सके। सरदूरगढ़ पुल पर पानी खतरे के निशान 21 फीट पर बह रहा है। मल्लेवाला, नेजाडेला, खैरेकां, सहारणी, बुडाभाणा, अहमदपुर, मीरपुर आदि क्षेत्रों में किसान व प्रशासन तटबंधों को मजबूत करने में लगा है। सिंचाई विभाग के अनुसार ओटू हेड पर शुक्रवार को 28,000 क्यूसेक पानी पहुंचा है। अभी पंजाब से निरंतर पानी आ रहा है। वहीं, सरदूलगढ़ के पास 40 हजार क्यूसिक पानी पहुंचा है। रोडी, सिरसा, रानियां, ऐलनाबाद क्षेत्रों में शुक्रवार को तेज बारिश हुई। आगामी 24 घंटे बेहद अहम है। बारिश हुई तो बाढ़ की आशंका बढ़ जाएगी।
आज रात फिर बारिश की संभावना
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ व मानसून रेखा के असर से शुक्रवार को कई जिलों में बारिश हुई है। शुक्रवार को हिसार, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, जींद, पलवल, पानीपत व सिरसा जिलों में बारिश हुई है। 30 अगस्त की रात को एक और विक्षोभ सक्रिय होगा। पश्चिमी विक्षोभ व मानसून रेखा के असर से 5 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की संभावना रहेगी। उन्होंने बताया कि हिसार में 20.4 एमएम, नारनौल में 65.5 एमएम, पानीपत-16.5 एमएम व सिरसा में 14.5 एमएम बारिश हुई।
बैराज के 18 गेट खुले, दिल्ली में तबाही मचा सकता है पानी
यमुनानगर में उत्तराखंड के पहाड़ी कैचमेंट एरिया में 177 एमएम बारिश होने पर यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया। शुक्रवार शाम पांच बजे हथिनीकुंड बैराज का जलस्तर बढ़कर 90,926 क्यूसेक पहुंच गया, ऐसे में बैराज के सभी 18 गेटों को खोल दिया गया जिसमें 82,406 क्यूसेक पानी को दिल्ली की तरफ डायवर्ट किया गया। 72 घंटे में यह पानी दिल्ली पहुंचेगा इससे दिल्ली बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन विजय गर्ग का कहना है कि यदि लगातार मूसलादार बारिश हुई तो जलस्तर और बढ़ सकता है।