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Chandigarh-Haryana News: जुर्माना माफ करने का पत्र जारी न होने से स्कूल सोसायटियों का काम अधर में लटका
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वार्षिक फीस भरने के लिए तैयार, केवल जुर्माना माफी के लेटर की इंतजार
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी स्कूल सोसायटियों का जुर्माना माफ करने का पत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है जबकि प्रदेश की सभी सोसायटियां वार्षिक फीस भरने के लिए तैयार हैं केवल जुर्माना माफी के पत्र के इंतजार में हैं। इसी कारण स्कूल सोसायटियों का काम अधर में लटका हुआ है। प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि दोबारा से मुख्यमंत्री सैनी को पत्र लिखकर स्कूल सोसायटियों का जुर्माना माफ करने का पत्र जारी करवाने की मांग की है।
कुंडू ने कहा कि सोसाइटी एक्ट 2012 के अनुसार सभी पंजीकृत सोसायटियों को रिन्यू करवाने का वार्षिक शुल्क जमा करवाने के लिए 2017 से ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत की गई व फीस ऑनलाइन न करने का जुर्माना निर्धारित किया गया। लेकिन किसी भी सोसायटी को इसकी सूचना नहीं दी गई और 2013 से यह जुर्माना लगा दिया गया जबकि ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत 2017 से हुई।
अब ये जुर्माना वार्षिक फीस समेत प्रति सोसायटी लगभग एक-एक लाख रुपये से भी अधिक हो गया जिसका कोई भी नोटिस या सूचना सोसायटियों को नहीं दी गई और जुर्माना माफ न होने से अब सोसायटियों का काम अधर में लटक गया है। अब न तो किसी सदस्य को सोसायटी से निकाला जा सकता और न ही नए सदस्य को शामिल किया जा सकता।
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चंडीगढ़। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी स्कूल सोसायटियों का जुर्माना माफ करने का पत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है जबकि प्रदेश की सभी सोसायटियां वार्षिक फीस भरने के लिए तैयार हैं केवल जुर्माना माफी के पत्र के इंतजार में हैं। इसी कारण स्कूल सोसायटियों का काम अधर में लटका हुआ है। प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि दोबारा से मुख्यमंत्री सैनी को पत्र लिखकर स्कूल सोसायटियों का जुर्माना माफ करने का पत्र जारी करवाने की मांग की है।
कुंडू ने कहा कि सोसाइटी एक्ट 2012 के अनुसार सभी पंजीकृत सोसायटियों को रिन्यू करवाने का वार्षिक शुल्क जमा करवाने के लिए 2017 से ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत की गई व फीस ऑनलाइन न करने का जुर्माना निर्धारित किया गया। लेकिन किसी भी सोसायटी को इसकी सूचना नहीं दी गई और 2013 से यह जुर्माना लगा दिया गया जबकि ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत 2017 से हुई।
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अब ये जुर्माना वार्षिक फीस समेत प्रति सोसायटी लगभग एक-एक लाख रुपये से भी अधिक हो गया जिसका कोई भी नोटिस या सूचना सोसायटियों को नहीं दी गई और जुर्माना माफ न होने से अब सोसायटियों का काम अधर में लटक गया है। अब न तो किसी सदस्य को सोसायटी से निकाला जा सकता और न ही नए सदस्य को शामिल किया जा सकता।
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