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Chandigarh-Haryana News: बिछड़ों को परिजनों से मिलाकर पुलिस ने 281 परिवारों के चेहरों पर लाैटाई मुस्कान
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- फोटो
- राज्य पुलिस ने छह महीने में 57 बच्चों समेत 281 गुमशुदा लोगों को परिवारों से मिलाया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। किसी परिवार के लिए अपने बच्चे या अपनों के अचानक लापता होने से बड़ा दर्द शायद ही कोई हो। हर दिन उम्मीद और निराशा के बीच बीतता है लेकिन हरियाणा पुलिस ने इस दर्द को कम करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य अपराध शाखा की 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 281 गुमशुदा लोगों को तलाशकर उनके परिवारों से मिलाया। इनमें 57 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं।
सबसे भावुक मामला वर्ष 2019 में लापता हुई एक बच्ची का रहा है। करीब सात साल बाद उसे उत्तर प्रदेश से सुरक्षित बरामद कर उसके परिवार से मिलाया गया। वर्षों बाद बेटी को सामने देखकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि हर गुमशुदगी के मामले को संवेदनशीलता के साथ लिया जाता है। आधुनिक तकनीक, खुफिया जानकारी, अंतरराज्यीय समन्वय और त्वरित कार्रवाई के जरिए लगातार खोज अभियान चलाए जा रहे हैं। बरामद किए गए 57 बच्चों में 30 लड़के और 27 लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा 224 वयस्कों का भी पता लगाया गया जिनमें 53 पुरुष और 171 महिलाएं हैं। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षित वापसी के लिए पुलिस ने स्थानीय प्रशासन, बाल संरक्षण संस्थाओं और अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान चलाया।
राज्य अपराध शाखा के पुलिस महानिरीक्षक राकेश आर्या ने बताया कि खोज अभियान केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में अभियान चलाए गए और जरूरत पड़ने पर नेपाल तक समन्वय स्थापित किया गया। इन प्रयासों से सैकड़ों परिवारों के बिछड़े रिश्ते फिर जुड़ सके और उनके घरों में लंबे इंतजार के बाद खुशियां लौट सकीं।
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- राज्य पुलिस ने छह महीने में 57 बच्चों समेत 281 गुमशुदा लोगों को परिवारों से मिलाया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। किसी परिवार के लिए अपने बच्चे या अपनों के अचानक लापता होने से बड़ा दर्द शायद ही कोई हो। हर दिन उम्मीद और निराशा के बीच बीतता है लेकिन हरियाणा पुलिस ने इस दर्द को कम करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य अपराध शाखा की 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 281 गुमशुदा लोगों को तलाशकर उनके परिवारों से मिलाया। इनमें 57 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं।
सबसे भावुक मामला वर्ष 2019 में लापता हुई एक बच्ची का रहा है। करीब सात साल बाद उसे उत्तर प्रदेश से सुरक्षित बरामद कर उसके परिवार से मिलाया गया। वर्षों बाद बेटी को सामने देखकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि हर गुमशुदगी के मामले को संवेदनशीलता के साथ लिया जाता है। आधुनिक तकनीक, खुफिया जानकारी, अंतरराज्यीय समन्वय और त्वरित कार्रवाई के जरिए लगातार खोज अभियान चलाए जा रहे हैं। बरामद किए गए 57 बच्चों में 30 लड़के और 27 लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा 224 वयस्कों का भी पता लगाया गया जिनमें 53 पुरुष और 171 महिलाएं हैं। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षित वापसी के लिए पुलिस ने स्थानीय प्रशासन, बाल संरक्षण संस्थाओं और अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान चलाया।
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राज्य अपराध शाखा के पुलिस महानिरीक्षक राकेश आर्या ने बताया कि खोज अभियान केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में अभियान चलाए गए और जरूरत पड़ने पर नेपाल तक समन्वय स्थापित किया गया। इन प्रयासों से सैकड़ों परिवारों के बिछड़े रिश्ते फिर जुड़ सके और उनके घरों में लंबे इंतजार के बाद खुशियां लौट सकीं।
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