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Chandigarh-Haryana News: आठ दिन बाद भी नहीं सुलझा मसला, सरकार की बढ़ी परेशानी
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कांग्रेस ने हमले तेज किए, सरकार के वरिष्ठ मंत्री व शीर्ष अधिकारी भी अपनी आईएएस को नहीं मना पाए
बीच का रास्ता निकालने में असफल रही नायब सैनी सरकार, डीजीपी पर फैसला लेने में देरी से भी मामला उलझा
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। आईपीएस वाई पूरण कुमार के परिजनों व हरियाणा सरकार के बीच चला आ रहा गतिरोध आठवें दिन भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। नायब सैनी सरकार इस पूरे मसले में बीच का रास्ता निकालने में असफल रही है। वहीं, कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर हमला तेज कर दिया है। राहुल गांधी के पूरण कुमार के परिजनों से मिलने के बाद राहुल और प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके भाजपा सरकार को घेरा। इसी केस से जुड़े रोहतक में एएसआई की आत्महत्या के बाद सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब इस पूरे मामले को जातीय रंग देने की कोशिश की जा रही है।
हरियाणा सरकार आईपीएस वाई पूरण कुमार के मामले को संभाल नहीं पाई। यह स्थिति तब है जब सरकार के वरिष्ठ मंत्री, शीर्ष स्तर के अफसर और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की टीम अमनीत कुमार और उनके परिजनों में मनाने में जुटी रही। इससे एक यह धारणा भी बनी है कि राज्य सरकार के पास ऐसा कोई संकटमोचक अफसर नहीं है जो अपनी ही आईएएस को मना नहीं पाए।
वहीं, जब मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अमनीत कुमार को भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही डीजीपी व एसपी पर फैसला ले लेंगे तो डीजीपी को छुट्टी भेजने में देरी क्यों की गई। जानकार कहते हैं कि जिस दिन सीएम अमनीत कुमार से मिलने पहुंचे थे यदि उसी दिन शाम को इस बारे में फैसला ले लेते तो मसला उसी दिन निपट जाता। इससे पीड़ित परिवार को विश्वास होता कि सरकार उनके साथ है। सरकार के फैसला लेने में देरी भी इस मामले को उलझा गई और परिवार के बीच विश्वास बहाली नहीं हो सकी।
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डीजीपी को छुट्टी भेजने के फैसले की टाइमिंग पर भी सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य सरकार ने यह फैसला तब लिया जब राहुल गांधी का दौरा तय हो गया। इससे यह भी संदेश गया कि राज्य सरकार राहुल गांधी के दबाव में आ गई है।
राज्य सरकार की गतिविधियों से हाईकमान संतुष्ट नहीं
इस पूरे मसले में नायब सैनी सरकार की गतिविधियों से भाजपा हाईकमान संतुष्ट नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को जिस तरह से संभालने की कोशिश की है उससे पार्टी हाईकमान संतुष्ट नहीं है। इससे सरकार की छवि को भी काफी नुकसान पहुंचा है। हाल फिलहाल भाजपा शासित किसी राज्य में ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिला जो इतना लंबा खिंचा हो और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की किरकिरी हुई हो। पीएम मोदी की रैली और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा रद्द होना भी सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका है। इसके अलावा राज्य सरकार अपनी पहली वर्षगांठ पर पूरे प्रदेश में जश्न मनाने की तैयारी में जुटी थी। अब सरकार यह जश्न भी नहीं मना पाएगी।
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बीच का रास्ता निकालने में असफल रही नायब सैनी सरकार, डीजीपी पर फैसला लेने में देरी से भी मामला उलझा
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। आईपीएस वाई पूरण कुमार के परिजनों व हरियाणा सरकार के बीच चला आ रहा गतिरोध आठवें दिन भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। नायब सैनी सरकार इस पूरे मसले में बीच का रास्ता निकालने में असफल रही है। वहीं, कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर हमला तेज कर दिया है। राहुल गांधी के पूरण कुमार के परिजनों से मिलने के बाद राहुल और प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके भाजपा सरकार को घेरा। इसी केस से जुड़े रोहतक में एएसआई की आत्महत्या के बाद सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब इस पूरे मामले को जातीय रंग देने की कोशिश की जा रही है।
हरियाणा सरकार आईपीएस वाई पूरण कुमार के मामले को संभाल नहीं पाई। यह स्थिति तब है जब सरकार के वरिष्ठ मंत्री, शीर्ष स्तर के अफसर और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की टीम अमनीत कुमार और उनके परिजनों में मनाने में जुटी रही। इससे एक यह धारणा भी बनी है कि राज्य सरकार के पास ऐसा कोई संकटमोचक अफसर नहीं है जो अपनी ही आईएएस को मना नहीं पाए।
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वहीं, जब मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अमनीत कुमार को भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही डीजीपी व एसपी पर फैसला ले लेंगे तो डीजीपी को छुट्टी भेजने में देरी क्यों की गई। जानकार कहते हैं कि जिस दिन सीएम अमनीत कुमार से मिलने पहुंचे थे यदि उसी दिन शाम को इस बारे में फैसला ले लेते तो मसला उसी दिन निपट जाता। इससे पीड़ित परिवार को विश्वास होता कि सरकार उनके साथ है। सरकार के फैसला लेने में देरी भी इस मामले को उलझा गई और परिवार के बीच विश्वास बहाली नहीं हो सकी।
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डीजीपी को छुट्टी भेजने के फैसले की टाइमिंग पर भी सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य सरकार ने यह फैसला तब लिया जब राहुल गांधी का दौरा तय हो गया। इससे यह भी संदेश गया कि राज्य सरकार राहुल गांधी के दबाव में आ गई है।
राज्य सरकार की गतिविधियों से हाईकमान संतुष्ट नहीं
इस पूरे मसले में नायब सैनी सरकार की गतिविधियों से भाजपा हाईकमान संतुष्ट नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को जिस तरह से संभालने की कोशिश की है उससे पार्टी हाईकमान संतुष्ट नहीं है। इससे सरकार की छवि को भी काफी नुकसान पहुंचा है। हाल फिलहाल भाजपा शासित किसी राज्य में ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिला जो इतना लंबा खिंचा हो और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की किरकिरी हुई हो। पीएम मोदी की रैली और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा रद्द होना भी सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका है। इसके अलावा राज्य सरकार अपनी पहली वर्षगांठ पर पूरे प्रदेश में जश्न मनाने की तैयारी में जुटी थी। अब सरकार यह जश्न भी नहीं मना पाएगी।