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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   The investigation in the cooperative department is incomplete, more than 8 officers involved in the scam have been posted.

Chandigarh-Haryana News: सहकारिता विभाग में जांच अधूरी, घोटाले में शामिल 8 से अधिक अधिकारी पा चुके हैं तैनाती

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- 2022 के में सामने आया था घोटाला सामने आया था, 100 करोड़ के घोटाले के थे आरोप
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- शुरूआत में छह जिलों में घोटाला आया था सामने, विभाग ने माना 8 करोड़ का घोटाला
चंडीगढ़। सहकारिता विभाग की जांच आज भी अधूरी है। विभाग में हुए घोटालों के बाद ऑडिट भी हुआ। करीब 14 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई थी। सख्ती के बाद आठ से नाै अधिकारी तैनाती पा चुके हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल के समय में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका के चलते ऑडिट कराने का निर्णय हुआ था। हरियाणा सहकारिता विभाग ने बाद में यह घोटाला केवल 8 करोड़ तक का माना था।
केंद्र सरकार की एजेंसी के सहयोग से हरियाणा सहकारिता विभाग में आईसीडीपी (इंटीग्रेटेड काे-ऑपरेटिव डेवलपमेंट प्रोजेक्ट) संचालित था। रेवाड़ी में तैनाती के दाैरान सहायक रजिस्ट्रार अनु काैशिश पर आरोप लगे थे कि उन्होंने योजना की रकम को निजी उपयोग के लिए बैंक खातों में स्थानांतरित करा लिया। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने भी जांच की थी। जांच के दाैरान सिरसा और अन्य स्थानों पर करीब चार करोड़ रुपये में जमीन खरीदने के आरोप थे। इसी के साथ उप मुख्य लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल पर भी करीब 50 लाख रुपये की गड़बड़ियों के आरोप थे। खास बात यह है कि योजना से संबंधित रकम विभाग के पास जमा कराने के बजाय निजी उपयोग के आरोप लगे थे। सहकारिता विभाग में हुई जांच के दाैरान यह भी पाया गया कि मुख्यालय के पास संबंधित रकम के 5-6 चालान भेजे गए, जोकि बाद में फर्जी पाए गए थे।
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इस प्रकरण में 2024 में विधानसभा सत्र के दाैरान मनोहरलाल की सरकार ने सहकारी समितियों में तैनात सहायक रजिस्ट्रार अनु काैशिश, उप मुख्य लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल और सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार को बर्खास्त करने की जानकारी दी थी। तीनों ही अधिकारी हाईकोर्ट में गए तो सरकार के एडवोकेट जनरल की राय यही थी कि इन अधिकारियों को पक्ष रखने का माैका देना चाहिए था। फिलहाल इन अधिकारियों के निलंबन का फैसला बरकरार है, लेकिन बर्खास्तगी के आदेश वापस लिए गए हैं। काे-ऑपरेटिव सोसाइटी हरियाणा के रजिस्ट्रार अमरदीप सिंह का कहना है कि मेरे समय से पूर्व का मामला है, इस प्रकरण में कोर्ट के आदेशों के बाद बहाली का निर्णय लिया गया है, सरकार ने निष्पक्षता से जांच कराई।
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छह जिलों में मिलीं थीं गड़बड़ियां, योजना भी हो चुकी है बंद
एंटी करप्शन ब्यूरो को रेवाड़ी में घपला मिला तो दूसरे कई जिलों में भी जांच शुरू की थी। प्रदेश के गुरुग्राम, कैथल, करनाल, सोनीपत, पानीपत, रेवाड़ी और कुरुक्षेत्र में भी घोटालों के साक्ष्य मिले थे। यही कारण था कि उस दाैरान कार्रवाई हुई है। मनोहरलाल सरकार ने सहकारिता विभाग में 1995 से योजना की जांच करने का निर्णय लिया था। संबंधित योजना फिलहाल बंद हो चुकी है।
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