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दिग्विजय चौटाला व उनके परिवार की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करे सरकार : हाईकोर्ट
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कहा, नागरिक पर खतरे की निष्पक्ष समीक्षा कर उचित सुरक्षा देना राज्य का दायित्व
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिग्विजय चौटाला की ओर से दायर सुरक्षा याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान-माल की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि नागरिक पर खतरे की निष्पक्ष समीक्षा कर उचित सुरक्षा देना राज्य का दायित्व है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया कि बिश्नोई गैंग की ओर से याचिकाकर्ता को गंभीर धमकियां प्राप्त हुई थीं। इस आधार पर 30 जुलाई 2025 को डबवाली थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद पुलिस महानिदेशक ने 10 दिसंबर 2025 को बिना किसी ठोस कारण अथवा लिखित स्पष्टीकरण के याचिकाकर्ता की सुरक्षा वापस ले ली जो मनमाना कदम है। याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया डीजीपी का चौटाला परिवार के प्रति कथित विरोधात्मक रवैया उनके एक आंतरिक संचार से भी झलकता है जो 11 दिसंबर को मीडिया मंच में प्रकाशित हुआ था। दलील दी गई कि ऐसे माहौल में सुरक्षा हटाया जाना याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान को गंभीर जोखिम में डाल सकता है। हाईकोर्ट नेसरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाओं को गंभीरता से लें और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिग्विजय चौटाला की ओर से दायर सुरक्षा याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान-माल की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि नागरिक पर खतरे की निष्पक्ष समीक्षा कर उचित सुरक्षा देना राज्य का दायित्व है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया कि बिश्नोई गैंग की ओर से याचिकाकर्ता को गंभीर धमकियां प्राप्त हुई थीं। इस आधार पर 30 जुलाई 2025 को डबवाली थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद पुलिस महानिदेशक ने 10 दिसंबर 2025 को बिना किसी ठोस कारण अथवा लिखित स्पष्टीकरण के याचिकाकर्ता की सुरक्षा वापस ले ली जो मनमाना कदम है। याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया डीजीपी का चौटाला परिवार के प्रति कथित विरोधात्मक रवैया उनके एक आंतरिक संचार से भी झलकता है जो 11 दिसंबर को मीडिया मंच में प्रकाशित हुआ था। दलील दी गई कि ऐसे माहौल में सुरक्षा हटाया जाना याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान को गंभीर जोखिम में डाल सकता है। हाईकोर्ट नेसरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाओं को गंभीरता से लें और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं।
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