{"_id":"683e031c09d5fb9aaf055a5f","slug":"the-farmer-does-not-have-much-money-if-he-does-not-burn-stubble-then-what-will-he-do-high-court-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1060-727387-2025-06-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान के पास बहुत पैसा नहीं, फाने नहीं जलाएगा तो क्या करेगा : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान के पास बहुत पैसा नहीं, फाने नहीं जलाएगा तो क्या करेगा : हाईकोर्ट
विज्ञापन
यमुनानगर में आग लगाने की सात घटनाओं का जिक्र करते हुए दाखिल की गई जनहित याचिका
कोर्ट ने कहा- फसल अवशेषों के निपटान का समाधान किसानों को उपलब्ध कराया जाए
जिला उपायुक्त को याची की ओर से दी गई शिकायत पर निर्णय लेने का आदेश दिया
चंडीगढ़। गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेषों (फानों) को जलाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि किसानों के पास बहुत पैसा नहीं है। ऐसे में किसान पराली जलाने को मजबूर हो जाता है, जो उसके लिए सबसे सस्ता विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि धान की पराली से असल में पर्यावरण को समस्या होती है, यह प्रैक्टिकल समस्या है, इसका समाधान ढूंढना जरूरी है।
याचिकाकर्ता प्रवीण दत्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि यमुनानगर गेहूं के फानों में को आग लगाई जा रही है। सात बार आग लग चुकी है और शिकायत के बावजूद प्रशासन कुछ नहीं कर रहा, जबकि फसल अवशेष जलाने पर सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा कि दो फसलों के बीच कम समय होता है तो किसान क्या करेगा। किसानों के पास बहुत पैसा नहीं है। ऐसे में किसान फसल अवशेष जलाने के लिए मजबूर हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रैक्टिकल समस्या है, इसका समाधान किसानों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसानों के पास फसल कटाई के बाद सबसे सस्ता विकल्प अवशेषों को आग लगाना ही है।
याची ने कहा कि इसका पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि धान की पराली के समय पर्यावरण की समस्या आती है। गेहूूं के मामले में अधिकतर हिस्सा भूसे के रूप में इस्तेमाल हो जाता है। भूमि से लगता कुछ हिस्सा ही बचता है, जिसे आग लगाकर समाप्त किया जाता है। याची ने कहा कि उसने यमुनानगर के जिला उपायुक्त को मांगपत्र दिया था। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए जिला उपायुक्त को मांगपत्र पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा- फसल अवशेषों के निपटान का समाधान किसानों को उपलब्ध कराया जाए
जिला उपायुक्त को याची की ओर से दी गई शिकायत पर निर्णय लेने का आदेश दिया
चंडीगढ़। गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेषों (फानों) को जलाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि किसानों के पास बहुत पैसा नहीं है। ऐसे में किसान पराली जलाने को मजबूर हो जाता है, जो उसके लिए सबसे सस्ता विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि धान की पराली से असल में पर्यावरण को समस्या होती है, यह प्रैक्टिकल समस्या है, इसका समाधान ढूंढना जरूरी है।
याचिकाकर्ता प्रवीण दत्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि यमुनानगर गेहूं के फानों में को आग लगाई जा रही है। सात बार आग लग चुकी है और शिकायत के बावजूद प्रशासन कुछ नहीं कर रहा, जबकि फसल अवशेष जलाने पर सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा कि दो फसलों के बीच कम समय होता है तो किसान क्या करेगा। किसानों के पास बहुत पैसा नहीं है। ऐसे में किसान फसल अवशेष जलाने के लिए मजबूर हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रैक्टिकल समस्या है, इसका समाधान किसानों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसानों के पास फसल कटाई के बाद सबसे सस्ता विकल्प अवशेषों को आग लगाना ही है।
विज्ञापन
याची ने कहा कि इसका पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि धान की पराली के समय पर्यावरण की समस्या आती है। गेहूूं के मामले में अधिकतर हिस्सा भूसे के रूप में इस्तेमाल हो जाता है। भूमि से लगता कुछ हिस्सा ही बचता है, जिसे आग लगाकर समाप्त किया जाता है। याची ने कहा कि उसने यमुनानगर के जिला उपायुक्त को मांगपत्र दिया था। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए जिला उपायुक्त को मांगपत्र पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
विज्ञापन